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राशन कार्ड बनाने के लिए पूर्ति विभाग के चक्कर काट रहे उपभोक्ता
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निर्मला देवी।
- फोटो : RUDRAPUR
खाद्य विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के चलते बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को परेशानियां झेलनी पड़ रही है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के पीले राशन कार्ड बनने से उन्हें जरूरत के मुताबिक राशन तक नसीब नहीं हो पा रहा है। अब उपभोक्ता नया राशन कार्ड बनाने के लिए अधिकारियों के दफ्तरों में सुबह से शाम तक चक्कर काट रहे हैं।
जिले में चार लाख से अधिक राशनकार्ड धारक हैं। आमदनी के हिसाब से लोगों के एपीएल, बीपीएल व अंत्योदन राशन कार्ड बनाए गए हैं। इन उपभोक्ताओं को हर माह तीन श्रेणियों में चावल, गेहूं, दाल बांटी जाती है। जिले में सैकड़ों ऐसे लोगों के पीले यानी एपीएल राशन कार्ड बना दिए गए हैं, जिनकी आमदनी मानकों से बहुत कम है।
कोरोना काल में कामकाज ठप होने से इन लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। सरकार की ओर से राशन के नाम पर हर माह दो किलो चावल और तीन किलो गेहूं दिया जा रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि खाद्य अधिकारियों ने स्थानीय नेताओं के कहने पर मनमाने ढंग से राशन कार्ड बना दिए थे।
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स्मार्ट कार्ड के लिए डाटा एकत्र करने में छूट रहे पसीने
रुद्रपुर। स्मार्ट कार्ड बनाने के लिए डाटा एकत्र करने में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के पसीने छूट रहे हैं। फरवरी से डाटा एकत्र करने का काम सितंबर तक भी पूरा नहीं हो पाया है। पूर्ति अधिकारी अनीता तिवारी ने बताया कि डाटा कंप्यूटर में सुरक्षित रखा जा रहा है। जिसे देहरादून भेजा जाएगा। वहीं से स्मार्ट राशन कार्ड बनकर आएंगे।
- मेरी बहू दिन में मजदूरी कर अपने बच्चों को पालन-पोषण करती है। उसका एपीएल राशन कार्ड बना दिया गया था। हाल में मिलने वाला राशन बहुत कम है। नया राशन कार्ड बनाने के लिए कई दिनों से अधिकारियों के पास चक्कर लगा रही हूं। -छोटी देवी, ग्राम मलसी
- परिवार में 12 सदस्य हैं जो मेहनत मजदूरी का काम करते हैं। विभाग ने हमारे एपीएल राशन कार्ड बना दिया। महीने में मिलने वाले दो किलो चावल और तीन किलो गेहूं से परिवार का पूरा नहीं हो पाता है। बीपीएल राशन कार्ड बनेगा तो सहूलियत होगी। समुंद्री देवी, खेड़ा
- हादसे में तीन साल पहले पति का पैर टूट गया था। वह कुछ काम नहीं कर सकते हैं। मैं मजदूरी कर परिवार के पांच सदस्यों का भरण पोषण कर रही हूं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी हमारा एपीएल कार्ड बना दिया गया। बीपीएल राशन कार्ड बनाने के लिए कई दिनों से परेशान हूं। निर्मला देवी, खेड़ा
- सर्वे के बावजूद लोगों के राशन कार्ड बनाए जाते तो दफ्तरों में आने की जरूरत ही नहीं पड़ती। विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से उपभोक्ता परेशान हैं। जरुरतमंदो के बीपीएल राशन कार्ड बनाए जाने चाहिए। सरोज चौहान, नजीमाबाद
राशन कार्ड इन दिनों नहीं बनाए जा रहे हैं। कुछ लोगों के बहकावे में आकर लोग राशन कार्ड बनाने के लिए आ रहे हैं। सभी उपभोक्ताओं के राशन कार्ड मानकों को ध्यान में रखकर ही बनाए गए थे। अनीता तिवारी, पूर्ति अधिकारी।
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जिले में चार लाख से अधिक राशनकार्ड धारक हैं। आमदनी के हिसाब से लोगों के एपीएल, बीपीएल व अंत्योदन राशन कार्ड बनाए गए हैं। इन उपभोक्ताओं को हर माह तीन श्रेणियों में चावल, गेहूं, दाल बांटी जाती है। जिले में सैकड़ों ऐसे लोगों के पीले यानी एपीएल राशन कार्ड बना दिए गए हैं, जिनकी आमदनी मानकों से बहुत कम है।
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कोरोना काल में कामकाज ठप होने से इन लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। सरकार की ओर से राशन के नाम पर हर माह दो किलो चावल और तीन किलो गेहूं दिया जा रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि खाद्य अधिकारियों ने स्थानीय नेताओं के कहने पर मनमाने ढंग से राशन कार्ड बना दिए थे।
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स्मार्ट कार्ड के लिए डाटा एकत्र करने में छूट रहे पसीने
रुद्रपुर। स्मार्ट कार्ड बनाने के लिए डाटा एकत्र करने में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के पसीने छूट रहे हैं। फरवरी से डाटा एकत्र करने का काम सितंबर तक भी पूरा नहीं हो पाया है। पूर्ति अधिकारी अनीता तिवारी ने बताया कि डाटा कंप्यूटर में सुरक्षित रखा जा रहा है। जिसे देहरादून भेजा जाएगा। वहीं से स्मार्ट राशन कार्ड बनकर आएंगे।
- मेरी बहू दिन में मजदूरी कर अपने बच्चों को पालन-पोषण करती है। उसका एपीएल राशन कार्ड बना दिया गया था। हाल में मिलने वाला राशन बहुत कम है। नया राशन कार्ड बनाने के लिए कई दिनों से अधिकारियों के पास चक्कर लगा रही हूं। -छोटी देवी, ग्राम मलसी
- परिवार में 12 सदस्य हैं जो मेहनत मजदूरी का काम करते हैं। विभाग ने हमारे एपीएल राशन कार्ड बना दिया। महीने में मिलने वाले दो किलो चावल और तीन किलो गेहूं से परिवार का पूरा नहीं हो पाता है। बीपीएल राशन कार्ड बनेगा तो सहूलियत होगी। समुंद्री देवी, खेड़ा
- हादसे में तीन साल पहले पति का पैर टूट गया था। वह कुछ काम नहीं कर सकते हैं। मैं मजदूरी कर परिवार के पांच सदस्यों का भरण पोषण कर रही हूं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी हमारा एपीएल कार्ड बना दिया गया। बीपीएल राशन कार्ड बनाने के लिए कई दिनों से परेशान हूं। निर्मला देवी, खेड़ा
- सर्वे के बावजूद लोगों के राशन कार्ड बनाए जाते तो दफ्तरों में आने की जरूरत ही नहीं पड़ती। विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से उपभोक्ता परेशान हैं। जरुरतमंदो के बीपीएल राशन कार्ड बनाए जाने चाहिए। सरोज चौहान, नजीमाबाद
राशन कार्ड इन दिनों नहीं बनाए जा रहे हैं। कुछ लोगों के बहकावे में आकर लोग राशन कार्ड बनाने के लिए आ रहे हैं। सभी उपभोक्ताओं के राशन कार्ड मानकों को ध्यान में रखकर ही बनाए गए थे। अनीता तिवारी, पूर्ति अधिकारी।

सरोज चौहान।- फोटो : RUDRAPUR