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गढ़वाली मांगल गीत गाकर बिहार की बेटी मैथिली ने जीता दिल
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दे द्यावा बाबाजी कन्या को दान हे..... उत्तराखंड में विवाह के दौरान हल्दी हाथ में गाया जाने वाला यह मांगल गीत सदैव प्रचलन में रहा, लेकिन अब यह गीत यह हर जगह गूंज रहा है। शास्त्रीय संगीत के साथ ही विभिन्न लोकभाषाओं में गीत गाकर संगीत के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाली बिहार की बेटी मैथिली ठाकुर ने उत्तराखंड के लोगों दिलों में भी अपनी खास जगह बना ली है। मैथिली द्वारा गढ़वाली भाषा में गाया गया मांगल गीत सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा। उत्तराखंड वासी मैथिली को सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं देने के साथ ही आभार व्यक्त कर रहे हैं।
बिहार के मधुबनी जिला निवासी मैथिली ठाकुर द्वारा गाया गढ़वाली मांगल दे द्यावा बाबाजी कन्या को दान हे.....सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। 20 वर्षीय शास्त्रीय संगीत से जुड़ी गायिका ने हिंदी, मैथिली व अन्य कई भाषाओं में गीत भजन गाए हैं। अब गढ़वाली में उनके द्वारा गाये गए मांगल ने उन्हें उत्तराखंड में भी घर-घर तक पहुंचा दिया है। मैथिली ठाकुर द्वारा हारमोनियम और तबले की जुगलबंदी के बीच गढ़वाली मांगल दे द्यावा बाबाजी गौ कन्या दान हे...मांगल गाया जा रहा है। एचएनबी केंद्रीय विवि श्रीनगर गढ़वाल के लोक संस्कृति एवं निष्पादन केंद्र के पूर्व निदेशक डा. डीआर पुरोहित का कहना है कि मैथिली ने गढ़वाली लोक संस्कृति को नई पहचान देने का काम किया है। साथ ही इससे उत्तराखंड की लोक परंपराओं के प्रचार-प्रसार को बल मिला है। लोक कवि ओम प्रकाश सेमवाल, लोक मांगल से जुड़ी लक्ष्मी शाह ने बताया कि युवा गायिका, जिसका गढ़वाली बोली-भाषा से कभी संबंध ही नहीं रहा, के द्वारा गाया सुंदर मांगल गायन हमारी नई पीढ़ी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। मैथिली ठाुकर ने सोमवार को अपने फेसबुक पेज पर गढ़वाली मांगलगीत अपलोड किया। अपलोड होते ही यह गढ़वाली मांगलगीत खूब वायरल होने लगा। देखते ही देखते उत्तराखंड में मांगलगीत सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से हर एक व्यक्ति तक पहुंचने लगा। एक दिन में इस वीडियो को 36 हजार लाइक, 3 हजार कमेंट व 10 हजार शेयर हो चुके हैं।
हमारी गढ़वाली संस्कृति कितनी समृद्ध: बिष्ट
प्रसिद्ध लोकगायक अनिल बिष्ट ने कहा कि मैथिली के मांगलगीत गाने से स्पष्ट होता है कि हमारी गढ़वाली संस्कृति कितनी समृद्ध है। साथ ही यह यहां के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। वरिष्ठ रंगकर्मी गौरीशंकर थपलियाल ने कहा कि किसी भी बोली-भाषा को समझने के लिए उसे आत्मसात करना होता है। यह अच्छी पहल है कि मैथिली भाषा की गायिका ने हमारी दुधबोली भाषा को आत्मसात कर लोक संस्कृति के संरक्षण में योगदान दिया है। इससे पूर्व मैथिली ने कुमाऊंनी लोकगीत सुआ रे सुआ बरखंडी सुवा गाकर खूब सराहना बटोरी थी।
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बिहार के मधुबनी जिला निवासी मैथिली ठाकुर द्वारा गाया गढ़वाली मांगल दे द्यावा बाबाजी कन्या को दान हे.....सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। 20 वर्षीय शास्त्रीय संगीत से जुड़ी गायिका ने हिंदी, मैथिली व अन्य कई भाषाओं में गीत भजन गाए हैं। अब गढ़वाली में उनके द्वारा गाये गए मांगल ने उन्हें उत्तराखंड में भी घर-घर तक पहुंचा दिया है। मैथिली ठाकुर द्वारा हारमोनियम और तबले की जुगलबंदी के बीच गढ़वाली मांगल दे द्यावा बाबाजी गौ कन्या दान हे...मांगल गाया जा रहा है। एचएनबी केंद्रीय विवि श्रीनगर गढ़वाल के लोक संस्कृति एवं निष्पादन केंद्र के पूर्व निदेशक डा. डीआर पुरोहित का कहना है कि मैथिली ने गढ़वाली लोक संस्कृति को नई पहचान देने का काम किया है। साथ ही इससे उत्तराखंड की लोक परंपराओं के प्रचार-प्रसार को बल मिला है। लोक कवि ओम प्रकाश सेमवाल, लोक मांगल से जुड़ी लक्ष्मी शाह ने बताया कि युवा गायिका, जिसका गढ़वाली बोली-भाषा से कभी संबंध ही नहीं रहा, के द्वारा गाया सुंदर मांगल गायन हमारी नई पीढ़ी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। मैथिली ठाुकर ने सोमवार को अपने फेसबुक पेज पर गढ़वाली मांगलगीत अपलोड किया। अपलोड होते ही यह गढ़वाली मांगलगीत खूब वायरल होने लगा। देखते ही देखते उत्तराखंड में मांगलगीत सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से हर एक व्यक्ति तक पहुंचने लगा। एक दिन में इस वीडियो को 36 हजार लाइक, 3 हजार कमेंट व 10 हजार शेयर हो चुके हैं।
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हमारी गढ़वाली संस्कृति कितनी समृद्ध: बिष्ट
प्रसिद्ध लोकगायक अनिल बिष्ट ने कहा कि मैथिली के मांगलगीत गाने से स्पष्ट होता है कि हमारी गढ़वाली संस्कृति कितनी समृद्ध है। साथ ही यह यहां के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। वरिष्ठ रंगकर्मी गौरीशंकर थपलियाल ने कहा कि किसी भी बोली-भाषा को समझने के लिए उसे आत्मसात करना होता है। यह अच्छी पहल है कि मैथिली भाषा की गायिका ने हमारी दुधबोली भाषा को आत्मसात कर लोक संस्कृति के संरक्षण में योगदान दिया है। इससे पूर्व मैथिली ने कुमाऊंनी लोकगीत सुआ रे सुआ बरखंडी सुवा गाकर खूब सराहना बटोरी थी।
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