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बर्फविहीन पहाडिय़ों पर कई जगह पर दरक रही मिट्टी
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Wed, 07 Dec 2016 10:28 PM IST
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पिछले तीन वर्षो की अपेक्षा इस वर्ष 2 नवंबर से 7 दिसंबर के बीच बारिश व बर्फबारी नहीं हुई है। यहां मौसम सुहावना बना हुआ है। दिन में तापमान 18 से 22 डिग्री सेल्सियश तक पहुंच रहा है। जबकि रात को न्यूनमत 2 डिग्री। केदारनाथ में इस वर्ष यात्राकाल में सितंबर माह में बारिश के साथ कुछ देर के लिए हिमपात जरूर हुआ।
कपाट बंद होने के दिन 1 नवंबर को शाम को 4 इंच तक बर्फबारी भी हुई, जो अगली सुबह तक पिघल चुकी थी। लेकिन तब, से केदारनाथ में न तो बारिश हुई और न बर्फबारी। बाबा केदार के मंदिर के चारों तरफ की पहाडिय़ां सूखी पड़ी है। कई स्थानों पर मिट्टी भी दरक रही है। यहां सिर्फ मेरू व सुमेरू पर्वत श्रृंखलाओं पर बर्फ जमी हुई है।
तलहटी पर नामात्र बर्फ है। जबकि आपदा के बाद, वर्ष 2014 में केदारनाथ में अक्तूबर माह से ही जमकर बर्फबारी होने लगी थी। दिसंबर माह के पहले सप्ताह में यहां 10 फिट तक बर्फ थी। वर्ष 2015 में भी धाम में अच्छी बर्फबारी हुई थी।
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केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य में जुटे निम के हवलदार देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि तीन वर्ष में पहली बार देखने को मिला है, जब नवंबर में सिर्फ एक दिन बर्फबारी हुई और दिसंबर के पहले सप्ताह बारिश हुई न बर्फबारी। दोपहर बाद चल रही हवा में भी नमी कम हो रही है।
इस संबंध में पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली का कहना है कि मध्य हिमालयी क्षेत्र में दिसंबर माह तक बर्फ का न गिरना गंभीर विषय है। अगर, जल्द बारिश के साथ बर्फ नहीं गिरती, तो निचले इलाकों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
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कपाट बंद होने के दिन 1 नवंबर को शाम को 4 इंच तक बर्फबारी भी हुई, जो अगली सुबह तक पिघल चुकी थी। लेकिन तब, से केदारनाथ में न तो बारिश हुई और न बर्फबारी। बाबा केदार के मंदिर के चारों तरफ की पहाडिय़ां सूखी पड़ी है। कई स्थानों पर मिट्टी भी दरक रही है। यहां सिर्फ मेरू व सुमेरू पर्वत श्रृंखलाओं पर बर्फ जमी हुई है।
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तलहटी पर नामात्र बर्फ है। जबकि आपदा के बाद, वर्ष 2014 में केदारनाथ में अक्तूबर माह से ही जमकर बर्फबारी होने लगी थी। दिसंबर माह के पहले सप्ताह में यहां 10 फिट तक बर्फ थी। वर्ष 2015 में भी धाम में अच्छी बर्फबारी हुई थी।
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केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य में जुटे निम के हवलदार देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि तीन वर्ष में पहली बार देखने को मिला है, जब नवंबर में सिर्फ एक दिन बर्फबारी हुई और दिसंबर के पहले सप्ताह बारिश हुई न बर्फबारी। दोपहर बाद चल रही हवा में भी नमी कम हो रही है।
इस संबंध में पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली का कहना है कि मध्य हिमालयी क्षेत्र में दिसंबर माह तक बर्फ का न गिरना गंभीर विषय है। अगर, जल्द बारिश के साथ बर्फ नहीं गिरती, तो निचले इलाकों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।