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-विमान से ढाका और येशोर में बरसाये थे बम
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विंग कमांडर एचके राय।
- फोटो : RUDRAPUR
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1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत की सबसे बड़ी जीत की याद ताजा होते ही रुद्रपुर निवासी सेवानिवृत्त विंग कमांडर एचके राय (हरीश कुमार राय ) का सीना आज भी गर्व से चौड़ा हो जाता है। पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में वह पायलट के रूप में शामिल हुए थे। लड़ाई के दौरान उन्होंने ढाका और येशोर में विमान से पाकिस्तान की सेना पर बम बरसाए थे।
रुद्रपुर निवासी एचके राय वर्ष 1963 में भारतीय वायुसेना में पायलट के रूप में भर्ती हुए थे। 1965 में जब पाकिस्तान के साथ लड़ाई छिड़ी थी तो वह जोधपुर स्थित एयरफोर्स एविएशन एकेडमी जोधपुर में प्रशिक्षण ले रहे थे। सेवानिवृत्त विंग कमांडर राय बताते हैं कि उस समय प्रशिक्षु होने के कारण उनकी ड्यूटी पश्चिमी सीमा पर जवानों को दवा और भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही सुरक्षा की थी। इसके बाद वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में वह पूरी तैयारी और जोश के साथ शामिल हुए।
लड़ाई के दौरान उन्होंने ढाका और येशोर में पाकिस्तानी सेना पर हवाई हमले किए थे। देश के लिए दो जंग लड़ने पर गौरवान्वित महसूस करते हुए एचके राय कहते हैं कि 1971 में भारत को अपनी सबसे बड़ी जीत हासिल हुई थी और इस युद्ध का हिस्सा बनकर आज भी गौरव महसूस होता है। उन्होंने बताया कि युद्ध के बाद पाकिस्तान की सेना के आत्मसमर्पित करीब 90 हजार सैनिकों को भारत के सिलगुड़ी, बगडोदरा, मिजोरम समेत विभिन्न शिविरों में कैद किया गया।
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इसके बाद शिमला समझौते पर हस्ताक्षर के बाद पाकिस्तानी सैनिकों को रिहा कर दिया गया था। 76 वर्षीय एचके राय बताते हैं कि वर्ष 1987 में वह वायुसेना से वीआरएस लेकर जरूरतमंद लोगों की सेवा के उद्देश्य से बिलासपुर, यूपी में पांचवीं तक निशुल्क स्कूल शुरू किया, जो आज भी चल रहा है। इसके साथ ही बिलासपुर और रुद्रपुर में उनके दो अन्य इंटर कॉलेज भी चल रहे हैं। आज भी वह स्वयं को देश का सिपाही महसूस करते हैं।
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रुद्रपुर निवासी एचके राय वर्ष 1963 में भारतीय वायुसेना में पायलट के रूप में भर्ती हुए थे। 1965 में जब पाकिस्तान के साथ लड़ाई छिड़ी थी तो वह जोधपुर स्थित एयरफोर्स एविएशन एकेडमी जोधपुर में प्रशिक्षण ले रहे थे। सेवानिवृत्त विंग कमांडर राय बताते हैं कि उस समय प्रशिक्षु होने के कारण उनकी ड्यूटी पश्चिमी सीमा पर जवानों को दवा और भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही सुरक्षा की थी। इसके बाद वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में वह पूरी तैयारी और जोश के साथ शामिल हुए।
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लड़ाई के दौरान उन्होंने ढाका और येशोर में पाकिस्तानी सेना पर हवाई हमले किए थे। देश के लिए दो जंग लड़ने पर गौरवान्वित महसूस करते हुए एचके राय कहते हैं कि 1971 में भारत को अपनी सबसे बड़ी जीत हासिल हुई थी और इस युद्ध का हिस्सा बनकर आज भी गौरव महसूस होता है। उन्होंने बताया कि युद्ध के बाद पाकिस्तान की सेना के आत्मसमर्पित करीब 90 हजार सैनिकों को भारत के सिलगुड़ी, बगडोदरा, मिजोरम समेत विभिन्न शिविरों में कैद किया गया।
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इसके बाद शिमला समझौते पर हस्ताक्षर के बाद पाकिस्तानी सैनिकों को रिहा कर दिया गया था। 76 वर्षीय एचके राय बताते हैं कि वर्ष 1987 में वह वायुसेना से वीआरएस लेकर जरूरतमंद लोगों की सेवा के उद्देश्य से बिलासपुर, यूपी में पांचवीं तक निशुल्क स्कूल शुरू किया, जो आज भी चल रहा है। इसके साथ ही बिलासपुर और रुद्रपुर में उनके दो अन्य इंटर कॉलेज भी चल रहे हैं। आज भी वह स्वयं को देश का सिपाही महसूस करते हैं।