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रुद्रप्रयाग जिले में 94 स्कूल भवन जर्जर
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Tue, 12 Jul 2016 10:46 PM IST
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अगस्त्यमुनि ब्लाक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय तोलब का भवन। क्षतिग्रस्त छत के कारण खतरे के साए में पढ़ रहे बच्चे।
- फोटो : Amar Ujala
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पांच वर्षों में जिले में आपदा व अन्य कारणों ने 94 प्राथमिक विद्यालय क्षतिग्रस्त/जर्जर हो चुके हैं। कई विद्यालयों की स्थिति इस कदर दयनीय है कि इन दिनों आसमान में बादल घुमड़ते ही छुट्टी करनी पड़ रही है।
जिले में 15 से अधिक विद्यालय पंचायत व मिलन केंद्रों पर चल रहे हैं। जबकि राजकीय प्राथमिक विद्यालय खाट (ऊखीमठ) एक वर्ष से गांव के निजी घर में चल रहा है। जनपद में स्वीकृत 559 प्राथमिक विद्यालयों में दो बीते सत्र में बंद हो चुके हैं।
557 विद्यालयों में 94 तीक्ष्ण क्षतिग्रस्त हैं, जो कभी भी किसी हादसे का कारण बन सकते हैं। स्थिति इस कदर दयनीय है कि भवन के अभाव में बीते तीन वर्ष से राजकीय प्राथमिक विद्यालय क्यार्क और कोट तल्ला में पांच कक्षाओं का संचालन एक ही कमरे में चल रहा है।
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विभागीय स्तर पर इन भवनों के पुनर्निर्माण के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इन विद्यालयों में वर्तमान सत्र में साढ़े चार हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
रुद्रप्रयाग जिले में 94 स्कूल भवन जर्जर
आसमान में बादल घुमड़ते ही करनी पड़ती है कई स्कूलों में छुट्टी
केस एक -
अगस्त्यमुनि ब्लाक का राजकीय प्राथमिक विद्यालय लंबे समय से क्षतिग्रस्त है। भवन की छत नहीं होने से यहां बच्चे खतरे के साए में पढ़ने को मजबूर हैं। यहां वर्तमान सत्र में 35 बच्चे पढ़ रहे हैं। भवन के अभाव में आंगनबाड़ी भी इस जर्जर भवन पर संचालित हो रहा है।
केस दो -
जखोली ब्लाक का राजकीय प्राथमिक विद्यालय मखेत का परिसर भूस्खलन से ध्वस्त होने से यहां कक्षाओं का संचालन संभव नहीं है। ऐसे में यहां छात्र-छात्राओं को एक अतिरिक्त कक्ष में पढ़ना पढ़ रहा है।
केस तीन -
ऊखीमठ ब्लाक का प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़-नोडूर 30 जून को हुई तेज बारिश से क्षतिग्रस्त हो गया। यहां छत सहित दीवारों को व्यापक क्षति पहुंची है। बाबूजूद खतरे की जद में आखर ज्ञान हो रहा है। वर्तमान सत्र में 9 बच्चे पंजीकृत हैं।
प्रतिवर्ष विभिन्न मदों में प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। शासन से धन प्राप्त नहीं हो रहा है। इस वर्ष केंद्र और राज्य सरकार और आपदा के तहत 23 विद्यालयों का प्रस्ताव भेजा गया है। धन स्वीकृति होने पर प्राथमिकता के आधार पर पुनर्निर्माण या मरम्मत की जाएगी।
--- अजय शर्मा, सहायक अभियंता, सर्वशिक्षा अभियान, रुद्रप्रयाग
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जिले में 15 से अधिक विद्यालय पंचायत व मिलन केंद्रों पर चल रहे हैं। जबकि राजकीय प्राथमिक विद्यालय खाट (ऊखीमठ) एक वर्ष से गांव के निजी घर में चल रहा है। जनपद में स्वीकृत 559 प्राथमिक विद्यालयों में दो बीते सत्र में बंद हो चुके हैं।
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557 विद्यालयों में 94 तीक्ष्ण क्षतिग्रस्त हैं, जो कभी भी किसी हादसे का कारण बन सकते हैं। स्थिति इस कदर दयनीय है कि भवन के अभाव में बीते तीन वर्ष से राजकीय प्राथमिक विद्यालय क्यार्क और कोट तल्ला में पांच कक्षाओं का संचालन एक ही कमरे में चल रहा है।
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विभागीय स्तर पर इन भवनों के पुनर्निर्माण के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इन विद्यालयों में वर्तमान सत्र में साढ़े चार हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
रुद्रप्रयाग जिले में 94 स्कूल भवन जर्जर
आसमान में बादल घुमड़ते ही करनी पड़ती है कई स्कूलों में छुट्टी
केस एक -
अगस्त्यमुनि ब्लाक का राजकीय प्राथमिक विद्यालय लंबे समय से क्षतिग्रस्त है। भवन की छत नहीं होने से यहां बच्चे खतरे के साए में पढ़ने को मजबूर हैं। यहां वर्तमान सत्र में 35 बच्चे पढ़ रहे हैं। भवन के अभाव में आंगनबाड़ी भी इस जर्जर भवन पर संचालित हो रहा है।
केस दो -
जखोली ब्लाक का राजकीय प्राथमिक विद्यालय मखेत का परिसर भूस्खलन से ध्वस्त होने से यहां कक्षाओं का संचालन संभव नहीं है। ऐसे में यहां छात्र-छात्राओं को एक अतिरिक्त कक्ष में पढ़ना पढ़ रहा है।
केस तीन -
ऊखीमठ ब्लाक का प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़-नोडूर 30 जून को हुई तेज बारिश से क्षतिग्रस्त हो गया। यहां छत सहित दीवारों को व्यापक क्षति पहुंची है। बाबूजूद खतरे की जद में आखर ज्ञान हो रहा है। वर्तमान सत्र में 9 बच्चे पंजीकृत हैं।
प्रतिवर्ष विभिन्न मदों में प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। शासन से धन प्राप्त नहीं हो रहा है। इस वर्ष केंद्र और राज्य सरकार और आपदा के तहत 23 विद्यालयों का प्रस्ताव भेजा गया है। धन स्वीकृति होने पर प्राथमिकता के आधार पर पुनर्निर्माण या मरम्मत की जाएगी।
--- अजय शर्मा, सहायक अभियंता, सर्वशिक्षा अभियान, रुद्रप्रयाग