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भक्तों ने 101 जल कलश यात्रा के साथ निकाली झांकी
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रुद्रप्रयाग/ऊख्ीमठ। बेलणी वार्ड स्थित हनुमान गुफा में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ पर 101 जल कलश शोभा यात्रा निकाली गई। वहीं कालीमठ घाटी के प्रसिद्ध सिद्धपीठ कालीशिला मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत एवं शिव महापुराण कथा के नौवें दिन जल कलश यात्रा का आयोजन किया गया।
शनिवार को हनुमान गुफा में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रीमद्भागवत कथा अनुष्ठान का शुभारंभ हो गया। सुबह मंदिर में श्रीराम व हनुमान की पूजा अर्चना कर भोग लगाया गया। इसके बाद मंदिर समिति व स्थानीय भक्तों ने अलकनंदा व मंदाकिनी नदी के संगम पहुंचकर 101 कलशों में गंगाजल भरकर कलश यात्रा व शोभा यात्रा निकाली। श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए कथावाचक 108 हरिदास जी महाराज ने किया। 3 मई को पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ कथा का समापन किया जाएगा।
उधर ऊखीमठ में जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने जल कलश यात्रा में सम्मिलित होकर पुण्य अर्जित किया। रविवार को पूर्णाहुति व ब्रह्मभोज के साथ कथा का समापन किया जाएगा।
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बीते 19 अप्रैल से बरखा गिरी महाराज एवं सरस्वती माई के सहयोग से कालीशिला में कथा का आयोजन किया जा रहा है। जिसके नौंवे दिन शनिवार को कथा से पूर्व कालीशिला में प्रात: पंचाग पूजा संपन्न हुई। जिसके बाद ब्यूंखी गांव के प्राकृतिक स्रोत से दो किमी की खड़ी चढ़ाई के बाद 101 कलशों की यात्रा निकाली गई। कथावाचक स्वयंबर प्रसाद सेमवाल एवं सतीश देवशाली ने भगवान शिवि के स्वरूपों सहित मां भगवती के रुपों का वर्णन किया।
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शनिवार को हनुमान गुफा में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रीमद्भागवत कथा अनुष्ठान का शुभारंभ हो गया। सुबह मंदिर में श्रीराम व हनुमान की पूजा अर्चना कर भोग लगाया गया। इसके बाद मंदिर समिति व स्थानीय भक्तों ने अलकनंदा व मंदाकिनी नदी के संगम पहुंचकर 101 कलशों में गंगाजल भरकर कलश यात्रा व शोभा यात्रा निकाली। श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए कथावाचक 108 हरिदास जी महाराज ने किया। 3 मई को पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ कथा का समापन किया जाएगा।
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उधर ऊखीमठ में जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने जल कलश यात्रा में सम्मिलित होकर पुण्य अर्जित किया। रविवार को पूर्णाहुति व ब्रह्मभोज के साथ कथा का समापन किया जाएगा।
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बीते 19 अप्रैल से बरखा गिरी महाराज एवं सरस्वती माई के सहयोग से कालीशिला में कथा का आयोजन किया जा रहा है। जिसके नौंवे दिन शनिवार को कथा से पूर्व कालीशिला में प्रात: पंचाग पूजा संपन्न हुई। जिसके बाद ब्यूंखी गांव के प्राकृतिक स्रोत से दो किमी की खड़ी चढ़ाई के बाद 101 कलशों की यात्रा निकाली गई। कथावाचक स्वयंबर प्रसाद सेमवाल एवं सतीश देवशाली ने भगवान शिवि के स्वरूपों सहित मां भगवती के रुपों का वर्णन किया।