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चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम ने की गर्भवती महिला मौत की जांच
Updated Thu, 06 Sep 2018 10:57 PM IST
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रुद्रप्रयाग। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के डीजी के निर्देश पर जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग में गर्भवती महिला की मौत की जांच चार सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम ने पूरी कर ली है। टीम एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट डीजी को सौंपेगी।
जांच टीम में डीजी कार्यालय में तैनात डायरेक्टर डॉ. अंजलि नौटियाल, डायरेक्टर डॉ. सुमन आर्य, दून मेडिकल कॉलेज की एचओडी डॉ. चित्रा जोशी व सीएमओ डा. एसके झा शामिल थे। टीम ने बीते दिनों जिला चिकित्सालय पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच की। इस दौरान स्त्री रोग अनुभाग का जायजा लेते हुए आरोपी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ से पूछताछ की। साथ ही पीड़ित पक्ष से भी बातचीत की। इधर, सीएमओ डा. झा ने बताया कि जांच में सभी बिंदुओं को खंगालते हुए दोनों पक्षों से पूछताछ की गई है। रिपोर्ट का खुलासा डीजी हेल्थ द्वारा ही किया जाएगा। बीते 3/4 जुलाई को कांडा-सिमतोली की गर्भवती महिला आशा देवी को गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय से बेस अस्पताल रेफर किया गया था। जहां उपचार के दौरान उसकी और गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई थी। मामले में परिजनों के हंगामे के बाद डीएम द्वारा मजिस्ट्रेटी जांच की गई थी, जिसमें सीनियर गाइनोकोलॉजिस्ट डा. अर्चना वर्मा व स्टाफ की लापरवाही सामने आई थी, लेकिन मेडिकल बोर्ड ने संबंधित डॉक्टर को क्लीन चिट दे दी थी। इस पर डीएम ने उच्च स्तरीय जांच के लिए कमिश्नर को पत्र लिखा था।
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जांच टीम में डीजी कार्यालय में तैनात डायरेक्टर डॉ. अंजलि नौटियाल, डायरेक्टर डॉ. सुमन आर्य, दून मेडिकल कॉलेज की एचओडी डॉ. चित्रा जोशी व सीएमओ डा. एसके झा शामिल थे। टीम ने बीते दिनों जिला चिकित्सालय पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच की। इस दौरान स्त्री रोग अनुभाग का जायजा लेते हुए आरोपी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ से पूछताछ की। साथ ही पीड़ित पक्ष से भी बातचीत की। इधर, सीएमओ डा. झा ने बताया कि जांच में सभी बिंदुओं को खंगालते हुए दोनों पक्षों से पूछताछ की गई है। रिपोर्ट का खुलासा डीजी हेल्थ द्वारा ही किया जाएगा। बीते 3/4 जुलाई को कांडा-सिमतोली की गर्भवती महिला आशा देवी को गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय से बेस अस्पताल रेफर किया गया था। जहां उपचार के दौरान उसकी और गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई थी। मामले में परिजनों के हंगामे के बाद डीएम द्वारा मजिस्ट्रेटी जांच की गई थी, जिसमें सीनियर गाइनोकोलॉजिस्ट डा. अर्चना वर्मा व स्टाफ की लापरवाही सामने आई थी, लेकिन मेडिकल बोर्ड ने संबंधित डॉक्टर को क्लीन चिट दे दी थी। इस पर डीएम ने उच्च स्तरीय जांच के लिए कमिश्नर को पत्र लिखा था।
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