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मैं नदी में उतरा लेकिन अपने छोटे भाई को नहीं बचा पाया....

Thu, 01 Mar 2018 10:32 PM IST
Updated Thu, 01 Mar 2018 10:32 PM IST
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मैं नदी में उतरा लेकिन अपने छोटे भाई को नहीं बचा पाया....

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अगस्त्यमुनि। मैं नदी में भी उतर गया था। काफी दूर तक बचाने की कोशिश करता रहा, लेकिन गौरव का हाथ नहीं पकड़ पाया। इस कारण मैं अपने छोटे भाई को नहीं बचा पाया.. ये शब्द 10 वर्षीय अंकित पंवार के हैं, जिसे उपचार के बाद घर ले आए हैं। अपने छोटे भाई की याद में अंकित कई बार बिलख-बिलख कर रो रहा है तो कभी गुमसुम है।
अंकित ने बताया कि हर रोज की तरह बीते दिन हम दोनों भाई भी मैदान के किनारे खेल रहे थे। गौरव को प्यास लगी तो वह नदी किनारे पहुंच गया। मैं भी उसके पीछे नदी तट पर पहुंचा। पानी पीते समय मेरे छोटे भाई का पैर फिसला और वह नदी में गिरकर बहने लगा। यह देख मैं सीधे नदी में उतर गया। वह मुझसे कुछ ही दूर था। मैंने पूरी कोशिश की कि मैं उसके कपड़े पकड़ लूं, लेकिन मैं अपने भाई को नहीं पकड़ सका। वह मुझसे काफी दूर चला गया। वह, बहुत अच्छा था। हम दोनों साथ स्कूल जाते, घर आते और साथ खेलते थे। अंकित अपने छोटे भाई गौरव की याद में बार-बार रो रहा है। हर बार, सिर्फ एक ही बात उसकी जुबान पर आ रही है कि वह अपने छोटे भाई को नहीं बचा पाया। दूसरी तरफ बच्चों की मां रो-रोकर कई बार बेसुध हो रही है। नाते, रिश्तेदार, पड़ोसी, ग्रामीण व स्थानीय लोगों का उनके घर तांता लगा हुआ है। दूसरी तरफ बेटे को खोजने के लिए प्रबल सिंह पंवार एसडीआरएफ, पुलिस और अग्निशमन के कर्मचारियों के साथ मंदाकिनी नदी के किनारों को खंगाल रहे हैं।
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स्थानीय युवक भी कर रहे खोजबीन
अगस्त्यमुनि। गौरव को खोजने के लिए सौड़ी, हाट, गबनी और चंद्रापुरी के युवक व अन्य ग्रामीण भी रेस्क्यू में सहयोग कर रहे हैं। मंदाकिनी नदी की तेज जलधाराओं में तैराक युवक घटनास्थल से 500 मीटर दूरी तक दोनों किनारे खंगाल रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इधर, थानाध्यक्ष सुबोध ममगाईं ने बताया कि रेस्क्यू के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। मशीन की मदद से नदी किनारों पर हलचल पैदा की जा रही है, जिससे अगर, नदी किनारे चट्टानी क्षेत्र या गहरे पानी में बच्चे का शव हो तो वह ऊपर आ जाए। रेस्क्यू में पुलिस, एसडीआरएफ और अग्निशमन के गोताखोर गबनी गांव से विजयनगर के बीच नदी को खंगाल रहे हैं। ममगाईं ने बताया कि अगस्त्यमुनि से तिलवाड़ा के बीच भी खोजबीन की जा रही है।
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प्रीतम के साहस को सलाम
अगस्त्यमुनि। घटना के प्रत्यक्षदर्शी गबनी गांव के राजबर पंवार ने बताया कि बीते बुधवार शाम को कुछ युवा मंदाकिनी नदी किनारे अस्थायी मैदान मेें वॉलीबाल खेल रहे थे। गेंद नदी की तरफ गई। पुनीत उसे लाने के लिए दौड़ा। तभी उसने नदी किनारे दो बच्चों की चप्पलें देखीं, जिस पर उसने चिल्लाते हुए अन्य को आवाज दी। लक्की, पवन और प्रीतम (गगन) नदी किनारे पहुंचे। इस दौरान नदी में करीब 50 मीटर दूर बहते हुए एक बच्चे का हाथ ऊपर दिख रहा था। यह देख, प्रीतम ने बिना सोचे नदी में छलांग लगा दी और तेजी से तैरते हुए 100 मीटर की दूरी तक बच्चे को बचा लिया। स्थानीय लोगों ने प्रीतम के साहस की सराहना करते हुए उसे वीरता पुरस्कार से सम्मानित करने की मांग की है। वह, जीआईसी चंद्रापुरी में कक्षा 12वीं का छात्र है।
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