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गौंडार गांव की 13 वर्षीय रिंकी को गंवाना पड़ा अपना दाया पैर...
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रुद्रप्रयाग। जिले के अंतिम गांव गौंडार की 13 वर्षीया बालिका को समय पर इलाज नहीं मिलने से अपना एक पैर गंवाना पड़ा। बालिका को एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया है। उसे कृत्रिम पैर लगाया जाना है। बीमार पिता ने बेटी के इलाज के लिए शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
परिजनों के अनुसार 20 जनवरी को रिंकी लकड़ी लेने जंगल गई थी। तभी सिर पर लकड़ी लाते समय तेज बारिश में फिसल जाने से उसके दाएं पैर का घुटना पत्थर पर टकरा गया। उसके घुटने से खून बहने लगा। घर पहुंचने पर परिजनों ने घरेलू उपचार कर खून को रोकने का प्रयास किया लेकिन सुधार नहीं हुआ। भारी बर्फबारी के चलते रिंकी को समय से अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। दूसरे दिन किसी प्रकार उसे उखीमठ लाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। रुद्रप्रयाग, श्रीनगर और देहरादून में डॉक्टरों ने इलाज के बाद उसे 27 जनवरी को एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया। पैर की हालत काफी खराब होने से डाक्टरों को उसके जख्मी पैर को घुटने से नीचे काटने को मजबूर होना पड़ा। परिजनों ने डॉक्टरों का हवाला देते हुए बताया कि अब रिंकी को कृत्रिम पैर लगाना पड़ेगा, जिसका खर्चा छह लाख तक आ रहा है। रिंकी की बड़ी बहन आरती ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। पिता लंबे समय से बीमार हैं। घर-परिवार का खर्चा खेतीबाड़ी और पशुपालन पर निर्भर है। इधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि पीड़ित छात्रा के उचित उपचार के लिए प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद की जाएगी।
परिजनों के अनुसार 20 जनवरी को रिंकी लकड़ी लेने जंगल गई थी। तभी सिर पर लकड़ी लाते समय तेज बारिश में फिसल जाने से उसके दाएं पैर का घुटना पत्थर पर टकरा गया। उसके घुटने से खून बहने लगा। घर पहुंचने पर परिजनों ने घरेलू उपचार कर खून को रोकने का प्रयास किया लेकिन सुधार नहीं हुआ। भारी बर्फबारी के चलते रिंकी को समय से अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। दूसरे दिन किसी प्रकार उसे उखीमठ लाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। रुद्रप्रयाग, श्रीनगर और देहरादून में डॉक्टरों ने इलाज के बाद उसे 27 जनवरी को एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया। पैर की हालत काफी खराब होने से डाक्टरों को उसके जख्मी पैर को घुटने से नीचे काटने को मजबूर होना पड़ा। परिजनों ने डॉक्टरों का हवाला देते हुए बताया कि अब रिंकी को कृत्रिम पैर लगाना पड़ेगा, जिसका खर्चा छह लाख तक आ रहा है। रिंकी की बड़ी बहन आरती ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। पिता लंबे समय से बीमार हैं। घर-परिवार का खर्चा खेतीबाड़ी और पशुपालन पर निर्भर है। इधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि पीड़ित छात्रा के उचित उपचार के लिए प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद की जाएगी।
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