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केदारनाथ व गुप्तकाशी में शिव महापुराण कथा का हुआ समापन
Updated Mon, 13 Aug 2018 10:40 PM IST
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रुद्रप्रयाग/गुप्तकाशी। केदारनाथ धाम में आयोजित शिव महापुराण के अंतिम दिन विश्वकल्याण के लिए यज्ञ-हवन का आयोजन किया गया। पूर्णाहुति के साथ ही बीकेटीसी की ओर से आयोजित शिव महापुराण का समापन हो गया। साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर में चल रहे 11 दिवसीय शिव महापुराण व श्रीमद् देवी भागवत कथा भी समापन हो गया। समापन अवसर पर हवन कुंड में 21 हजार आहुतियां डालकर विश्व कल्याण की कामना की।
केदारनाथ आपदा में मारे गए लोगों की आत्मशांति के लिए दिल्ली निवासी महेंद्र शर्मा के सहयोग से केदारधाम में चल रहे शिव महापुराण का आयोजन किया जा रहा था। कथा के अंतिम दिन ज्योर्तिषपीठ सम्मान से अलंकृत कथावाचक आचार्य दीपक नौटियाल ने कहा कि श्री शिवमहापुराण न मंदिर जाने की कथा है और न ही तीर्थस्थान जाने की। यह खुद में मंदिर और तीर्थ स्थापित करने की कथा है। यदि हम स्वयं में सुधार लाए तो जग अपने आप ही सुधर जाएगा। उधर, दूसरी ओर श्री काशी विश्वनाथ भक्त मंडली के तत्वाधान में काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित शिव महापुराण व श्रीमद् देवी भागवत कथा के अंतिम दिवस पर महाशिव पुराण कथा वाचक डा. दुर्गेश महाराज ने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंग की कथा के साथ ही महादेव के ब्रह्मचारी स्वरूप, नटेश्वर अवतार, किरात-अर्जुन अवतार, नर्तकेश्वर अवतार, उपमन्यु अवतार समेत कई प्रसंगों का वर्णन किया। श्रीमद्देवी भागवत कथा वाचक आचार्य हिमांशु सेमवाल ने शक्ति की महिमा के बारे में बताया। इस मौके पर बीकेटीसी के सीओ बीडी सिंह, राजकुमार नौटियाल, पुजारी टी गंगाधर लिंग, मुख्य आचार्य शारदानंद देवशाली ओंकार शुक्ला, लोकेंद्र तिवाड़ी समेत भारी संख्या में भक्त मौजूद थे।
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केदारनाथ आपदा में मारे गए लोगों की आत्मशांति के लिए दिल्ली निवासी महेंद्र शर्मा के सहयोग से केदारधाम में चल रहे शिव महापुराण का आयोजन किया जा रहा था। कथा के अंतिम दिन ज्योर्तिषपीठ सम्मान से अलंकृत कथावाचक आचार्य दीपक नौटियाल ने कहा कि श्री शिवमहापुराण न मंदिर जाने की कथा है और न ही तीर्थस्थान जाने की। यह खुद में मंदिर और तीर्थ स्थापित करने की कथा है। यदि हम स्वयं में सुधार लाए तो जग अपने आप ही सुधर जाएगा। उधर, दूसरी ओर श्री काशी विश्वनाथ भक्त मंडली के तत्वाधान में काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित शिव महापुराण व श्रीमद् देवी भागवत कथा के अंतिम दिवस पर महाशिव पुराण कथा वाचक डा. दुर्गेश महाराज ने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंग की कथा के साथ ही महादेव के ब्रह्मचारी स्वरूप, नटेश्वर अवतार, किरात-अर्जुन अवतार, नर्तकेश्वर अवतार, उपमन्यु अवतार समेत कई प्रसंगों का वर्णन किया। श्रीमद्देवी भागवत कथा वाचक आचार्य हिमांशु सेमवाल ने शक्ति की महिमा के बारे में बताया। इस मौके पर बीकेटीसी के सीओ बीडी सिंह, राजकुमार नौटियाल, पुजारी टी गंगाधर लिंग, मुख्य आचार्य शारदानंद देवशाली ओंकार शुक्ला, लोकेंद्र तिवाड़ी समेत भारी संख्या में भक्त मौजूद थे।
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