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इस बार, नहीं चलेगी घोड़ा-खच्चर संचालकों की मनमानी
Updated Sat, 03 Mar 2018 10:08 PM IST
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रुद्रप्रयाग। इस वर्ष 29 अप्रैल से शुरू हो रही केदारनाथ यात्रा में पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चर संचालकों की मनमानी नहीं चलेगी। पैदल यात्रा को व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने घोड़ा-खच्चरों पर आरएफ (रेडियो फ्रिक्वेंसी) चिप लगाने और संचालकों को आरएफ आईडी देने का निर्णय लिया है। इस सुविधा से गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर दोनों की लोकेशन देखी जा सकेगी।
इस वर्ष केदारनाथ यात्रा में बीते वर्ष की तुलना में शुरुआती माह में चार लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। साथ ही घोड़ा-खच्चरों के करीब छह हजार की संख्या में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में पैदल यात्रा को सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने खाका बनाना शुरू कर दिया है। इसके तहत घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण 15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही यात्रा में शामिल होने वाले घोड़ा-खच्चरों पर आरएफ चिप लगाई जाएगी, जो इन पशुओं की चमड़ी पर टैग की जाएगी। संचालकों को भी रेडियो फ्रेक्विेंसी आईडी दी जाएगी। प्रशासन द्वारा यह कार्य पशुपालन विभाग को सौंपा गया है। अधिकारियों के अनुसार आरएफ चिप और आईडी को नियंत्रण सोनप्रयाग व गौरीकुंड प्रीपेड काउंटर सहित घोड़ा पड़ाव केदारनाथ और जिला प्रशासन के कंट्रोल रूप से होगा। यहां से घोड़ा-खच्चर और संचालक की लोकेशन को यात्रा मार्ग पर लगे सीसीटीवी की मदद से देखा जा सकेगा।
घोड़ा-खच्चर का होगा बीमा
मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा. रमेश सिंह नितवाल ने बताया कि इस वर्ष केदारनाथ यात्रा में शामिल होने वाले घोड़ा-खच्चरों का बीमा कराया जाएगा। सभी संचालकों को जिला मुख्यालय सहित यात्रा मार्ग पर स्थित पशु चिकित्सालयों में अपने घोड़ा-खच्चर की यात्रा शुरू होने से पूर्व बीमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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इनका कहना है
केदारनाथ की पैदल यात्रा में किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो, इसके लिए घोड़ा-खच्चरों पर आरएफ चिप लगाई जाएगी। साथ ही संचालकों को आरएफ आईडी दी जाएगी। चिप व आईडी से इन दोनों की लोकेशन पर नजर रखी जाएगी। किसी प्रकार की मनमानी या अव्यवस्था पर संबंधित संचालक का लाइसेंस तत्काल रद्द कर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी होगी।
-मंगेश घिल्डियाल, डीएम रुद्रप्रयाग
इस वर्ष केदारनाथ यात्रा में बीते वर्ष की तुलना में शुरुआती माह में चार लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। साथ ही घोड़ा-खच्चरों के करीब छह हजार की संख्या में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में पैदल यात्रा को सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने खाका बनाना शुरू कर दिया है। इसके तहत घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण 15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही यात्रा में शामिल होने वाले घोड़ा-खच्चरों पर आरएफ चिप लगाई जाएगी, जो इन पशुओं की चमड़ी पर टैग की जाएगी। संचालकों को भी रेडियो फ्रेक्विेंसी आईडी दी जाएगी। प्रशासन द्वारा यह कार्य पशुपालन विभाग को सौंपा गया है। अधिकारियों के अनुसार आरएफ चिप और आईडी को नियंत्रण सोनप्रयाग व गौरीकुंड प्रीपेड काउंटर सहित घोड़ा पड़ाव केदारनाथ और जिला प्रशासन के कंट्रोल रूप से होगा। यहां से घोड़ा-खच्चर और संचालक की लोकेशन को यात्रा मार्ग पर लगे सीसीटीवी की मदद से देखा जा सकेगा।
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घोड़ा-खच्चर का होगा बीमा
मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा. रमेश सिंह नितवाल ने बताया कि इस वर्ष केदारनाथ यात्रा में शामिल होने वाले घोड़ा-खच्चरों का बीमा कराया जाएगा। सभी संचालकों को जिला मुख्यालय सहित यात्रा मार्ग पर स्थित पशु चिकित्सालयों में अपने घोड़ा-खच्चर की यात्रा शुरू होने से पूर्व बीमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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इनका कहना है
केदारनाथ की पैदल यात्रा में किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो, इसके लिए घोड़ा-खच्चरों पर आरएफ चिप लगाई जाएगी। साथ ही संचालकों को आरएफ आईडी दी जाएगी। चिप व आईडी से इन दोनों की लोकेशन पर नजर रखी जाएगी। किसी प्रकार की मनमानी या अव्यवस्था पर संबंधित संचालक का लाइसेंस तत्काल रद्द कर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी होगी।
-मंगेश घिल्डियाल, डीएम रुद्रप्रयाग