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मां हरियाली देवी की राजजात की तैयारियां जोरों पर
Updated Fri, 08 Dec 2017 10:49 PM IST
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रुद्रप्रयाग। बच्छणस्यूं पट्टी के ग्राम पंचायत नवासू में 19 दिसंबर से शुरू हो रही मां हरियाली राजजात की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। 12 वर्ष बाद हो रहे इस अनुष्ठान को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। समिति की ओर से प्रवासी ग्रामीणों व ध्याणियों को आमंत्रित किया गया है।
ग्राम पंचायत बंगोली व निषणी के संयुक्त सहयोग से आयोजित 9 दिवसीय देवी अनुष्ठान के तहत हरियाली मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना और देवनृत्य होगा। इस दौरान देवी भक्तों, विश्ेाषकर ध्याणियों (विवाहिता बेटी व बहन) के परिवार सहित पूजा- अर्चना व आराध्य को भेंट अर्पित की जाएगी। आयोजन समिति के अध्यक्ष व पूर्व प्रधान सुरजीत सिंह रौथाण, कोषाध्यक्ष बीरेंद्र सिंह रौथाण व मंत्री धीरेंद्र सिंह रौथाण ने बताया कि परिसर में आयोजन के सफल संचालन के लिए सभी तैयारियों को 16 दिसंबर तक पूरा कर दिया जाएगा। बताया देवी-देवताओं के पश्वाओं सहित अन्य कार्यकर्ताओं के मंदिर में ठहरने व भोजन व प्रसाद व्यवस्था की जिम्मेदारी भी सौंपी जा रही है। 20 से 27 दिसंबर तक दूर-दराज के देवी भक्तों के लिए मंदिर में भंडारे की व्यवस्था भी की जाएगी। बताया कि हरियाली देवी ही राजजात में शामिल होने के लिए प्रवासी ग्रामीणों व ध्याणियों को निमंत्रण पत्र भेज दिए गए हैं। वर्ष 1994 में पहली बार हरियाली देवी की राजजात का आयोजन किया गया था। दूसरी राजजात 2006 में हुई थी।
ग्राम पंचायत बंगोली व निषणी के संयुक्त सहयोग से आयोजित 9 दिवसीय देवी अनुष्ठान के तहत हरियाली मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना और देवनृत्य होगा। इस दौरान देवी भक्तों, विश्ेाषकर ध्याणियों (विवाहिता बेटी व बहन) के परिवार सहित पूजा- अर्चना व आराध्य को भेंट अर्पित की जाएगी। आयोजन समिति के अध्यक्ष व पूर्व प्रधान सुरजीत सिंह रौथाण, कोषाध्यक्ष बीरेंद्र सिंह रौथाण व मंत्री धीरेंद्र सिंह रौथाण ने बताया कि परिसर में आयोजन के सफल संचालन के लिए सभी तैयारियों को 16 दिसंबर तक पूरा कर दिया जाएगा। बताया देवी-देवताओं के पश्वाओं सहित अन्य कार्यकर्ताओं के मंदिर में ठहरने व भोजन व प्रसाद व्यवस्था की जिम्मेदारी भी सौंपी जा रही है। 20 से 27 दिसंबर तक दूर-दराज के देवी भक्तों के लिए मंदिर में भंडारे की व्यवस्था भी की जाएगी। बताया कि हरियाली देवी ही राजजात में शामिल होने के लिए प्रवासी ग्रामीणों व ध्याणियों को निमंत्रण पत्र भेज दिए गए हैं। वर्ष 1994 में पहली बार हरियाली देवी की राजजात का आयोजन किया गया था। दूसरी राजजात 2006 में हुई थी।
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