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घटना से करीब दो घंटे पहले पत्नी से बातचीत कर पूछी थी कुशलक्षेम!-compat
Updated Mon, 18 Jun 2018 10:52 PM IST
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ऊखीमठ। नगालैंड में शहीद फतेह सिंह नेगी ने रविवार को शहादत से करीब दो घंटे पहले ही पत्नी गीता से फोन पर बात कर सबकी कुशलक्षेम पूछी थी। पत्नी से उन्होंने मानसून सीजन में खेतीबाड़ी के कामकाज से पहले अपने स्वास्थ्य का खास तौर पर ध्यान रखने को कहा था। साथ ही बताया कि अक्तूबर में सोनम (बेटी) की शादी के लिए वह दो माह की छुट्टी लेकर घर आएंगे।
बाड़व गांव में स्व. मुकंद सिंह नेगी की तीन पुत्रियों और दो पुत्रों में फतेह सिंह सबसे छोटे थे। अपने हसंमुख और मिलनसार व्यवहार के कारण वह परिवार ही नहीं बल्कि पूरे गांव के चहेते थे। उनकी दो पुत्रियां पूनम और सोनम व एक पुत्र रॉबिन है। ज्येष्ठ पुत्री पूनम का वर्ष 2015 में विवाह हो चुका है। दूसरी बेटी की शादी आगामी अक्तूबर में होनी तय हुई है। एक वर्ष पूर्व ही फतेह सिंह की पोस्टिंग नगालैंड में हुई थी। गत मार्च माह में वह एक माह की छुट्टी पर घर आए थे। तब, गांव के अधिकांश घरों पर जाकर उन्होंने बड़े बुजुर्गों से मुलाकात की थी। बड़े भाई सते सिंह नेगी से वह हफ्ते में एक दिन जरूर बात करते थेे। 16 जून की रात भी उन्होंने बड़े भाई से करीब 40 मिनट तक फोन पर बातचीत की। इस दौरान घर, परिवार, रिश्तेदारी और गांव के बारे में पूछा। साथ ही कार्तिक स्वामी मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के बारे में भी जानकारी ली। सते सिंह नेगी रुंधे गले से कहते हैं ‘अब मेरा फतेह मुझसे कभी बात नहीं करेगा। मैंने अपना दायां हाथ खो दिया है’। इधर, छोटे भाई की शहादत की खबर सुनकर उनकी तीनों बहनें भी अपने ससुराल से मायके बाड़व पहुंच गई हैं। गांव में मातम पसरा हुआ है।
पापा आपने कहा था अक्तूबर में आऊंगा ...
ऊखीमठ। सोनम और रॉबिन को जैसे ही अपने पिता के शहीद होने की सूचना मिली, वे दोनों अपने घर के लिए दौड़ पड़े। सोमवार को घर पहुंचते ही दोनों भाई-बहन अपनी मां से लिपट कर बिलख-बिलख कर रो पड़े। रोते हुए बेटा कहता रहा, ‘पापा आप हमें क्यों छोड़ कर चले गए, आपने तो अक्तूबर में घर आने की बात कही थी’। रॉबिन बीएससी तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। बेटी सोनम भी गुमसुम है। उधर, बड़ी बेटी पूनम के आंसू थमने को नहीं हैं। पिता को बार-बार याद करते हुए वह, विलाप कर रही है।
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फतेह की कमी शायद ही पूरी हो
पूर्व ग्राम प्रधान शत्रुघ्न सिंह नेगी कहते हैं कि ढाई सौ से अधिक परिवारों वाले गांव में कई तोक हैं। बावजूद फतेह सिंह का सब परिवारों से संपर्क था। छुट्टी से घर आने पर वह, अक्सर सभी घरों में जाकर बड़े-बुजुर्गों से मिलते थे। बच्चों को प्यार और युवा पीढ़ी को पढ़ाई-लिखाई के लिए प्रेरित करते थे।
आज गांव पहुंचेगा शहीद का पार्थिव शरीर
रुद्रप्रयाग। शहीद फतेह सिंह नेगी के बड़े भाई सते सिंह नेगी ने असम राइफल्स के अधिकारियों से हुई बातचीत के हवाले से बताया कि शहीद का पार्थिव शरीर सोमवार को हेलीकाप्टर से दिल्ली लाया गया है। दिल्ली से एंबुलेंस से शव को मंगलवार पूर्वाह्न तक उनके पैतृक गांव पहुंचा दिया जाएगा।
बाड़व गांव में स्व. मुकंद सिंह नेगी की तीन पुत्रियों और दो पुत्रों में फतेह सिंह सबसे छोटे थे। अपने हसंमुख और मिलनसार व्यवहार के कारण वह परिवार ही नहीं बल्कि पूरे गांव के चहेते थे। उनकी दो पुत्रियां पूनम और सोनम व एक पुत्र रॉबिन है। ज्येष्ठ पुत्री पूनम का वर्ष 2015 में विवाह हो चुका है। दूसरी बेटी की शादी आगामी अक्तूबर में होनी तय हुई है। एक वर्ष पूर्व ही फतेह सिंह की पोस्टिंग नगालैंड में हुई थी। गत मार्च माह में वह एक माह की छुट्टी पर घर आए थे। तब, गांव के अधिकांश घरों पर जाकर उन्होंने बड़े बुजुर्गों से मुलाकात की थी। बड़े भाई सते सिंह नेगी से वह हफ्ते में एक दिन जरूर बात करते थेे। 16 जून की रात भी उन्होंने बड़े भाई से करीब 40 मिनट तक फोन पर बातचीत की। इस दौरान घर, परिवार, रिश्तेदारी और गांव के बारे में पूछा। साथ ही कार्तिक स्वामी मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के बारे में भी जानकारी ली। सते सिंह नेगी रुंधे गले से कहते हैं ‘अब मेरा फतेह मुझसे कभी बात नहीं करेगा। मैंने अपना दायां हाथ खो दिया है’। इधर, छोटे भाई की शहादत की खबर सुनकर उनकी तीनों बहनें भी अपने ससुराल से मायके बाड़व पहुंच गई हैं। गांव में मातम पसरा हुआ है।
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पापा आपने कहा था अक्तूबर में आऊंगा ...
ऊखीमठ। सोनम और रॉबिन को जैसे ही अपने पिता के शहीद होने की सूचना मिली, वे दोनों अपने घर के लिए दौड़ पड़े। सोमवार को घर पहुंचते ही दोनों भाई-बहन अपनी मां से लिपट कर बिलख-बिलख कर रो पड़े। रोते हुए बेटा कहता रहा, ‘पापा आप हमें क्यों छोड़ कर चले गए, आपने तो अक्तूबर में घर आने की बात कही थी’। रॉबिन बीएससी तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। बेटी सोनम भी गुमसुम है। उधर, बड़ी बेटी पूनम के आंसू थमने को नहीं हैं। पिता को बार-बार याद करते हुए वह, विलाप कर रही है।
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फतेह की कमी शायद ही पूरी हो
पूर्व ग्राम प्रधान शत्रुघ्न सिंह नेगी कहते हैं कि ढाई सौ से अधिक परिवारों वाले गांव में कई तोक हैं। बावजूद फतेह सिंह का सब परिवारों से संपर्क था। छुट्टी से घर आने पर वह, अक्सर सभी घरों में जाकर बड़े-बुजुर्गों से मिलते थे। बच्चों को प्यार और युवा पीढ़ी को पढ़ाई-लिखाई के लिए प्रेरित करते थे।
आज गांव पहुंचेगा शहीद का पार्थिव शरीर
रुद्रप्रयाग। शहीद फतेह सिंह नेगी के बड़े भाई सते सिंह नेगी ने असम राइफल्स के अधिकारियों से हुई बातचीत के हवाले से बताया कि शहीद का पार्थिव शरीर सोमवार को हेलीकाप्टर से दिल्ली लाया गया है। दिल्ली से एंबुलेंस से शव को मंगलवार पूर्वाह्न तक उनके पैतृक गांव पहुंचा दिया जाएगा।