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केदारघाटी की सांस्कृतिक व धार्मिक विरासत संजो रहे 11 गांव
Updated Tue, 02 Jan 2018 10:09 PM IST
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रुद्रप्रयाग। केदारघाटी के 11 गांव रामलीला समिति क्षेत्र की सांस्कृतिक, सामाजिक व धार्मिक विरासत को संजोकर उसका प्रचार-प्रचार कर रहे हैं। बीते तीन वर्षों से संयुक्त रूप से रामायण, महाभारत, नंदा राजजात से जुड़ी लीलाओं का मंचन कर नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से रूबरू करा रहे हैं।
आपदा से व्यापक रूप से प्रभावित केदारघाटी के लोक संस्कृति और रीति-रीवाजों को पुन: पटरी पर लाने में 11 गांव रामलीला समिति ने अहम भूमिका निभाई है। गुप्तकाशी, सेमी, भैंसारी, सांकरी, नाला, देवर, रुद्रपुर, नाला, देवसाल, नारायणकोटी और कोठेड़ा गांव के ग्रामीणों द्वारा बनाई गई समिति बीते तीन वर्षों से प्रतिवर्ष धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन कर रही है। समिति के अध्यक्ष मदन सिंह रावत बताते हैं आयोजन का मुख्य उद्देश्य केदारघाटी की लोक संस्कृति, रीति-रीवाज और धार्मिक महत्ता को संजोना है। श्रीनिवास पोस्ती, आनंदमणि सेमवाल आदि का कहना है कि एक मंच पर अलग-अलग युगों से जुड़ी धार्मिक घटनाओं का मंचन गौरव की बात है।
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आपदा से व्यापक रूप से प्रभावित केदारघाटी के लोक संस्कृति और रीति-रीवाजों को पुन: पटरी पर लाने में 11 गांव रामलीला समिति ने अहम भूमिका निभाई है। गुप्तकाशी, सेमी, भैंसारी, सांकरी, नाला, देवर, रुद्रपुर, नाला, देवसाल, नारायणकोटी और कोठेड़ा गांव के ग्रामीणों द्वारा बनाई गई समिति बीते तीन वर्षों से प्रतिवर्ष धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन कर रही है। समिति के अध्यक्ष मदन सिंह रावत बताते हैं आयोजन का मुख्य उद्देश्य केदारघाटी की लोक संस्कृति, रीति-रीवाज और धार्मिक महत्ता को संजोना है। श्रीनिवास पोस्ती, आनंदमणि सेमवाल आदि का कहना है कि एक मंच पर अलग-अलग युगों से जुड़ी धार्मिक घटनाओं का मंचन गौरव की बात है।
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