फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Rudraprayag News ›   सूने पड़े घर-आंगनों में भी रौनक ले आई हरियाली मां

सूने पड़े घर-आंगनों में भी रौनक ले आई हरियाली मां

Tue, 26 Dec 2017 10:33 PM IST
Updated Tue, 26 Dec 2017 10:33 PM IST
विज्ञापन
सूने पड़े घर-आंगनों में भी रौनक ले आई हरियाली मां

विज्ञापन
रुद्रप्रयाग। पलायन की मार से झेल रही ग्राम पंचायतें नवासू, बंगोली और निषणी में इन दिनों खासी रौनक दिखाई दे रही है। यहां के प्रवासी और उनकी ध्याणियां इन दिनों मां हरियाली देवी की जात में शामिल होने आए हैं। इससे सूने पड़े घर-आंगन गुलजार हो गए हैं।
अगस्त्यमुनि ब्लॉक के नवासू गांव में 12 वर्ष के बाद हो रही मां हरियाली की जात में दिनोंदिन भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। आयोजन से जहां नवासू गांव पूरी तरह से गुलजार हो गया है, वहीं, खिंगासारी, डांडरा, सारगड्डी, बंगोली, निषणी, पणधारा, कपलखील, ढिग़णी, डुमाणी और कलेथ आदि गांवों में भी रौनक बढ़ गई है।
विज्ञापन

इन गांवों के कई घरों के ताले तो 6 से 8 वर्ष के बाद खुले हैं। दिल्ली, मुंबई, देहरादून, बंगलूरू, हैदराबाद, फरीदाबाद और गुड़गांव में बस चुके गांव के लोग देवी अनुष्ठान के चलते इन दिनों गांव पहुंचे हैं। हरियाली जात में पहुंचे अव्वल सिंह रौथाण, विक्रम सिंह असवाल, रमेश कठैत, रवींद्र सिंह रौथाण, सुरेंद्र सिंह असवाल, मोहन सिंह रौथाण और पदमेंद्र सिंह रौथाण का कहना है कि अगर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बैंक, संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं मिल जाए तो उनके गांव फिर गुलजार हो सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इंदौर से परिवार सहित अपने पैतृक गांव खिंगासारी (नवासू) पहुंचे उमराव सिंह रौथाण कहते हैं कि जन्मभूमि को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। शासन-प्रशासन और विभागों की उदासीनता से अलग राज्य उत्तराखंड बनने के बाद भी गांवों में सुविधाएं नहीं जुट पाई हैं, लेकिन आराध्य मां हरियाली के बुलावे पर वे और उनके साथ के कई परिवार अपने घरों को पहुंचे हैं। ध्याणी भुवनेश्वरी भंडारी करीब 10 वर्ष बाद जात में शामिल होने मायके पहुंची हैं। वह बताती हैं कि भाई-बंधुओं की नई पीढ़ी से मिलकर वह बहुत खुश हैं। वयोवृद्ध सीपी बहुुगुणा, पीएस रौथाण और बीएस रौथाण का कहना है कि वर्ष 1994 को आराध्य मां हरियाली की जात को पुन: आयोजन का प्रयास रंग ला रहा है। नई पीढ़ी, इस पारंपरिक धरोहर को यूं ही संजोए रखें, इसके लिए सभी को स्वप्रेरित होना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed