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ग्रीष्मकाल के लिए गौरी माई मंदिर के कपाट खुले
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गुप्तकाशी। केदारनाथ यात्रा के अंतिम पड़ाव गौरीकुंड स्थित मां गौरी माई मंदिर के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं।
रविवार को गौरी गांव स्थित गोरी माई मंदिर में सुबह पूजा अर्चना की गई। इसके पश्चात गौरी माई की मूर्ति को डोली में विराजमान कर गौरीकुंड के लिए प्रस्थान किया गया। डोली का गौरीकुंड बाजार आगमन पर व्यापारियों व स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। इसके बाद सुबह 8.40 बजे मंदिर के कपाट खोलकर गौरी माई की मूर्ति को मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित किया गया। ग्रीष्मकाल के छह माह तक गौरीकुंड में ही भक्त गौरी माई के दर्शन कर सकेंगे। इस मौके पर पुजारी लोकेश्वर जमलोकी, मठापति संपूर्णानंद, प्रबंधक कैलाश बगवाडी, प्रधान राकेश गोस्वामी, संरपंच नरोत्तम गोस्वामी, व्यापार संघ अध्यक्ष कुलानंद आदि मौजूद थे।
रविवार को गौरी गांव स्थित गोरी माई मंदिर में सुबह पूजा अर्चना की गई। इसके पश्चात गौरी माई की मूर्ति को डोली में विराजमान कर गौरीकुंड के लिए प्रस्थान किया गया। डोली का गौरीकुंड बाजार आगमन पर व्यापारियों व स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। इसके बाद सुबह 8.40 बजे मंदिर के कपाट खोलकर गौरी माई की मूर्ति को मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित किया गया। ग्रीष्मकाल के छह माह तक गौरीकुंड में ही भक्त गौरी माई के दर्शन कर सकेंगे। इस मौके पर पुजारी लोकेश्वर जमलोकी, मठापति संपूर्णानंद, प्रबंधक कैलाश बगवाडी, प्रधान राकेश गोस्वामी, संरपंच नरोत्तम गोस्वामी, व्यापार संघ अध्यक्ष कुलानंद आदि मौजूद थे।