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मानसून पूर्व बरसात में ही जलमग्न होने लगे नमामि गंगे के घाट
Updated Sun, 10 Jun 2018 10:44 PM IST
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रुद्रप्रयाग। बरसात में ही नमामि गंगे परियोजना के तहत बने घाट जलमग्न होने लगे हैं। घाट पर जहां सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम में नहीं हैं, वहीं अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से खतरा बढ़ रहा है।
जिला मुख्यालय में अलकनंदा नदी पर पुराने विकास भवन के नीचे शिव मूर्ति और नगर पालिका के नीचे लगभग साढ़े चार करोड़ की लागत से घाट बनाए गए हैं। मंदाकिनी नदी पर भी अगस्त्यमुनि सहित रुद्रप्रयाग संगम पर दो अलग-अलग स्थानों पर भी करीब 5 करोड़ से अधिक लागत से घाट बनाए गए हैं। इन घाटों की सुंदरता जहां बदरी-केदार की यात्रा पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। वहीं, स्थानीय लोग भी काफी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं, लेकिन बीते एक सप्ताह से ऊपरी क्षेत्रों में दोपहर बाद व रात्रि को हो रही बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है, जिस कारण रुद्रप्रयाग व अगस्त्यमुनि के घाटों की अधिकांश सीढ़ियां जलमग्न हो चुकी हैं। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष देवेंद्र सिंह झिक्वांण, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कालिका प्रसाद खन्ना, सभासद संतोष रावत आदि का कहना है कि नमामि गंगे परियोजना में करोड़ों रुपये की लागत से बने घाटों की सुरक्षा और नदी किनारे सुरक्षा चेन के इंतजाम नहीं किए गए हैं। इन हालात में श्रद्धालुओं/पर्यटकों के लिए खतरा बना हुआ है। परियोजना प्रबंधक नमामि गंगे, हरिद्वार अमित शर्मा का कहना है कि
रुद्रप्रयाग, अगस्त्यमुनि व श्रीनगर में परियोजना के तहत घाटों का निर्माण कार्य अब भी पांच फीसदी बचा हुआ है। इनके चारों तरफ जाली व सुरक्षा चेन लगाई जानी है। जल्द ही इस कार्य को पूरा कर दिया जाएगा।
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जिला मुख्यालय में अलकनंदा नदी पर पुराने विकास भवन के नीचे शिव मूर्ति और नगर पालिका के नीचे लगभग साढ़े चार करोड़ की लागत से घाट बनाए गए हैं। मंदाकिनी नदी पर भी अगस्त्यमुनि सहित रुद्रप्रयाग संगम पर दो अलग-अलग स्थानों पर भी करीब 5 करोड़ से अधिक लागत से घाट बनाए गए हैं। इन घाटों की सुंदरता जहां बदरी-केदार की यात्रा पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। वहीं, स्थानीय लोग भी काफी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं, लेकिन बीते एक सप्ताह से ऊपरी क्षेत्रों में दोपहर बाद व रात्रि को हो रही बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है, जिस कारण रुद्रप्रयाग व अगस्त्यमुनि के घाटों की अधिकांश सीढ़ियां जलमग्न हो चुकी हैं। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष देवेंद्र सिंह झिक्वांण, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कालिका प्रसाद खन्ना, सभासद संतोष रावत आदि का कहना है कि नमामि गंगे परियोजना में करोड़ों रुपये की लागत से बने घाटों की सुरक्षा और नदी किनारे सुरक्षा चेन के इंतजाम नहीं किए गए हैं। इन हालात में श्रद्धालुओं/पर्यटकों के लिए खतरा बना हुआ है। परियोजना प्रबंधक नमामि गंगे, हरिद्वार अमित शर्मा का कहना है कि
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रुद्रप्रयाग, अगस्त्यमुनि व श्रीनगर में परियोजना के तहत घाटों का निर्माण कार्य अब भी पांच फीसदी बचा हुआ है। इनके चारों तरफ जाली व सुरक्षा चेन लगाई जानी है। जल्द ही इस कार्य को पूरा कर दिया जाएगा।
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