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चकरकित्सा सेवा सुधार के साथ जरूरमंदों की मदद सर्वोपरी
Updated Wed, 07 Mar 2018 10:32 PM IST
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रुद्रप्रयाग। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. सरोज नैथानी ने जनपद में चिकित्सा व्यवस्थाओं को सुधारने के साथ जरूरतमंदों की मदद का भी बीड़ा उठाया है। पिता और पति के सेना में होने के चलते वे भी सेना को करियर बनाना चाहती थी, लेकिन पति ने उन्हें समाज की सेवा के लिए चिकित्सा सेवा में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।
पौड़ी जनपद के पाबौ ब्लाक के पीपली गांव की मूल निवासी डा. सरोज का जन्म फैजाबाद में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा दिल्ली में हुई। पिता के सेना में तैनाती के चलते उन्हें अपनी पढ़ाई कोलकाता, असम, महाराष्ट्र और देहरादून में पूरी करनी पड़ी।
वर्ष 1990 में बतौर महिला चिकित्सा अधिकारी के तौर पर उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौंड़ में पहली तैनाती हुई। इसके बाद वे देहरादून में निदेशालय में तैनात हुई। उत्तराखंड के तत्कालीन राज्यपाल डा. अजीजी कुरैशी ने नारी शक्ति सम्मान से उन्हें नवाजा। वर्ष 2017 जुलाई में रुद्रप्रयाग में बतौर सीएमओ तैनाती के बाद से वे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए कार्य कर रहीं हैं। उन्होंने जहां जखोली ब्लाक के दूरस्थ गांव के एक विकलांग बच्चे को गोद लेकर प्रतिमाह दो हजार रुपये आर्थिक मदद का संकल्प लिया है।
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वहीं, रुद्रप्रयाग को प्रदेश का पहला जिला बनाने की शुरूआत की है, जहां आधार लिंक बर्थ रजिस्ट्रेशन होने जा रहा है। वे महिलाओं को मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए दूरस्थ गांवों तक चिकित्सा व्यवस्था बहाल करना चाहती हैं।
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पौड़ी जनपद के पाबौ ब्लाक के पीपली गांव की मूल निवासी डा. सरोज का जन्म फैजाबाद में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा दिल्ली में हुई। पिता के सेना में तैनाती के चलते उन्हें अपनी पढ़ाई कोलकाता, असम, महाराष्ट्र और देहरादून में पूरी करनी पड़ी।
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वर्ष 1990 में बतौर महिला चिकित्सा अधिकारी के तौर पर उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौंड़ में पहली तैनाती हुई। इसके बाद वे देहरादून में निदेशालय में तैनात हुई। उत्तराखंड के तत्कालीन राज्यपाल डा. अजीजी कुरैशी ने नारी शक्ति सम्मान से उन्हें नवाजा। वर्ष 2017 जुलाई में रुद्रप्रयाग में बतौर सीएमओ तैनाती के बाद से वे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए कार्य कर रहीं हैं। उन्होंने जहां जखोली ब्लाक के दूरस्थ गांव के एक विकलांग बच्चे को गोद लेकर प्रतिमाह दो हजार रुपये आर्थिक मदद का संकल्प लिया है।
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वहीं, रुद्रप्रयाग को प्रदेश का पहला जिला बनाने की शुरूआत की है, जहां आधार लिंक बर्थ रजिस्ट्रेशन होने जा रहा है। वे महिलाओं को मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए दूरस्थ गांवों तक चिकित्सा व्यवस्था बहाल करना चाहती हैं।