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50 वर्षो से अधिक समय तक चोराबाड़ी ताल से नहीं केदारनाथ को खतरा
Updated Sun, 12 Nov 2017 10:02 PM IST
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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ में 16/17 जून 2013 की तबाही की वजह बने चोराबाड़ी ताल से आगामी 50 से अधिक वर्षों तक केदारनाथ मंदिर, केदारपुरी और केदारघाटी को कोई खतरा नहीं है। केदारनाथ मंदिर से चार किमी की दूरी पर स्थित ताल में पानी का बहाव बहुत कम हो चुका है। वहीं, काफी बड़े क्षेत्र में मुहाना क्षतिग्रस्त होने से यह क्षेत्र मिनी मैदान में तब्दील हो चुका है। वाडिया संस्थान के वैज्ञानिक पूरे क्षेत्र पर नजर रखे हुए हैं।
समुद्रतल से 12582 फीट की ऊंचाई पर स्थित चोराबाड़ी ताल इन दिनों अधिकांश सूखा पड़ा है। यहां चारों तरफ रेतीली मिट्टी बिखरी हुई है और अन्य क्षेत्र में सूखी घास है। ग्लेशियर से जो पानी निकल रहा है उसका बहाव भी कम हो चुका है और पानी सीधे मंदाकिनी नदी में मिल रहा है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक एपी डोभाल ने बताया कि ताल का मुहाना 10 मीटर से अधिक क्षतिग्रस्त है, जिससे यहां मैदान सा बना हुआ है। ऐसे में झील बनने या काफी मात्रा में पानी ठहरने की कोई संभावना नहीं रह गई है। आपदा के बाद से हर वर्ष कम से कम दो बार, बरसात से पूर्व और बरसात के बाद चोराबाड़ी ताल और निकटवर्ती इलाके का उपकरणों के माध्यम से वृहद अध्ययन किया जा रहा है। वहां की जो वर्तमान स्थिति है, उससे आने वाले 50 वर्षों या उससे अधिक समय तक मंदिर सहित केदारपुरी को कोई खतरा नहीं है। इधर, कुछ दिन पूर्व जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण रुद्रप्रयाग की टीम ने भी चोराबाड़ी ताल का भ्रमण किया है। टीम सदस्यों ने बताया कि वहां पानी की मात्रा बहुत कम है।
समुद्रतल से 12582 फीट की ऊंचाई पर स्थित चोराबाड़ी ताल इन दिनों अधिकांश सूखा पड़ा है। यहां चारों तरफ रेतीली मिट्टी बिखरी हुई है और अन्य क्षेत्र में सूखी घास है। ग्लेशियर से जो पानी निकल रहा है उसका बहाव भी कम हो चुका है और पानी सीधे मंदाकिनी नदी में मिल रहा है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक एपी डोभाल ने बताया कि ताल का मुहाना 10 मीटर से अधिक क्षतिग्रस्त है, जिससे यहां मैदान सा बना हुआ है। ऐसे में झील बनने या काफी मात्रा में पानी ठहरने की कोई संभावना नहीं रह गई है। आपदा के बाद से हर वर्ष कम से कम दो बार, बरसात से पूर्व और बरसात के बाद चोराबाड़ी ताल और निकटवर्ती इलाके का उपकरणों के माध्यम से वृहद अध्ययन किया जा रहा है। वहां की जो वर्तमान स्थिति है, उससे आने वाले 50 वर्षों या उससे अधिक समय तक मंदिर सहित केदारपुरी को कोई खतरा नहीं है। इधर, कुछ दिन पूर्व जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण रुद्रप्रयाग की टीम ने भी चोराबाड़ी ताल का भ्रमण किया है। टीम सदस्यों ने बताया कि वहां पानी की मात्रा बहुत कम है।
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