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तीन दिवसीय तल्लानागपुर महोत्सव का रंगारंग आगाज
Updated Sun, 15 Oct 2017 09:39 PM IST
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रुद्रप्रयाग। तीन दिवसीय तल्लानागपुर औद्योगिक विकास, कृषि एवं पर्यटन महोत्सव का रंगारंग कार्यक्रमों के साथ शुभारंभ हुआ। पहले दिन कलश साहित्य ट्रस्ट के लोक कवि सम्मेलन और स्कूली छात्र-छात्राओं के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम रहा।
चोपता में शुरू हुए महोत्सव का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर बतौर मुख्य अतिथि विधायक भरत सिंह चौधरी ने कहा कि लोक संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए नई पीढ़ी को आगे आना होगा। प्राचीन रीति-रीवाजों और परंपराओं को जीवित रखने के लिए इस तरह के मेलों का आयोजन जरूरी है। कहा कि भाजपा सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत साहित्यिक संस्था कलश ट्रस्ट की ओर से कवि सम्मेलन से की गई। इस अवसर पर संयोजक ओम प्रकाश सेमवाल ने ‘जा भुला तू दूर परदेश मां, हुनर सीखी कि ऐ अपणा गढ़देश मा’, सुधीर बर्त्वाल ने ‘पंडो नचोण मा भगतु भैजी, स्वीली सुजोण मा लाटी दादी’, मुरली दिवान ने लोग गढ़वाली मां कवि सम्मेलन, जगदंबा प्रसाद चमोला ने ‘कुछ नि छा तुम तनै बबरा बटिन बौंड तक’, विक्रम कप्रवाण ने मनखीे रे तू अभी भी चैति जै, ललित गुंसाई त्येरी झूठी माया मा आदि कविताओं की प्रस्तुतियां दी। वहीं, क्षेत्र के शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओं ने गढ़-कुमाऊं की लोक संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर समिति के पदाधिकारी व ग्रामीण मौजूद थे। ब्यूरो
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चोपता में शुरू हुए महोत्सव का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर बतौर मुख्य अतिथि विधायक भरत सिंह चौधरी ने कहा कि लोक संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए नई पीढ़ी को आगे आना होगा। प्राचीन रीति-रीवाजों और परंपराओं को जीवित रखने के लिए इस तरह के मेलों का आयोजन जरूरी है। कहा कि भाजपा सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत साहित्यिक संस्था कलश ट्रस्ट की ओर से कवि सम्मेलन से की गई। इस अवसर पर संयोजक ओम प्रकाश सेमवाल ने ‘जा भुला तू दूर परदेश मां, हुनर सीखी कि ऐ अपणा गढ़देश मा’, सुधीर बर्त्वाल ने ‘पंडो नचोण मा भगतु भैजी, स्वीली सुजोण मा लाटी दादी’, मुरली दिवान ने लोग गढ़वाली मां कवि सम्मेलन, जगदंबा प्रसाद चमोला ने ‘कुछ नि छा तुम तनै बबरा बटिन बौंड तक’, विक्रम कप्रवाण ने मनखीे रे तू अभी भी चैति जै, ललित गुंसाई त्येरी झूठी माया मा आदि कविताओं की प्रस्तुतियां दी। वहीं, क्षेत्र के शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओं ने गढ़-कुमाऊं की लोक संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर समिति के पदाधिकारी व ग्रामीण मौजूद थे। ब्यूरो
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