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वर्ष 2019 की केदारनाथ यात्रा में गुलजार होगा गरुड़चट्टी
Updated Mon, 05 Nov 2018 10:13 PM IST
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रुद्रप्रयाग। बाबा केदार के दर्शनों को देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अगले वर्ष से गरुड़चट्टी में भगवान गरुड़ के भी दर्शन कर सकेंगे। आपदा के साढ़े पांच वर्ष बाद गरुड़चट्टी की राह आसान हो गई है। डीडीएमए (लोनिवि) द्वारा केदारनाथ से गरुड़चट्टी तक 3.5 किमी पैदल मार्ग का निर्माण पूरा कर दिया गया है।
16/17 जून 2013 की आपदा के बाद से यह क्षेत्र वीरान पड़ा है। रामबाड़ा सहित पैदल मार्ग के भूस्खलन से तबाह होने से यहां तक पहुंच नहीं हो पा रही है। बीते साढ़े पांच वर्षों में बाबा केदार की यात्रा पर आया कोई श्रद्धालु यहां नहीं पहुंचा है। लेकिन, अब यह स्थान पूर्व की भांति यात्राकाल में गुलजार रहेगा। डीडीएमए (लोनिवि) द्वारा साढ़े तीन किमी लंबे व चार मीटर चौड़े पैदल मार्ग का निर्माण पूरा कर दिया गया है। इस पैदल मार्ग को धाम से जोड़ने के लिए मंदाकिनी नदी पर झूला पुल निर्माण किया जा रहा है। वयोवृद्ध तीर्थपुरोहित श्रीनिवास पोस्ती का कहना है कि केदारनाथ यात्रा में गरुड़चट्टी का विशेष धार्मिक महत्व है। यह स्थान आध्यात्म व ध्यान साधना के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मन की शांति के लिए दशकों से सैकड़ों साधु-संत यहां पहुंचते रहे हैं। आपदा के बाद छाई वीरानगी अब खत्म होने से यहां पुन: साधु-संत आ सकेंगे।
मोदी ने डेढ़ माह तक की थी साधना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 के दशक में गरुड़चट्टी में डेढ़ माह साधना की थी। तब वे हर रोज यहां से केदारनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन व जलाभिषेक करते थे। बीते वर्ष वर्ष 3 मई और 20 अक्तूबर को भी केदारनाथ पहुंचने पर पीएम मोदी ने यहां बिताए दिनों को याद किया था। उन्होंने इस स्थान तक पहुंच मार्ग बनाने के साथ इसे विकसित करने को कहा था। मुख्य सचिव उत्पल कुमार के आदेश पर जिला प्रशासन द्वारा लोनिवि की मदद से मार्ग बनाने को सर्वे किया गया था। पहले चरण में डीडीएमए (लोनिवि) द्वारा केदारनाथ-गरुड़चट्टी मार्ग तैयार कर लिया गया है।
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केदारनाथ से गरुड़चट्टी तक पैदल मार्ग का निर्माण पूरा हो चुका है। मंदाकिनी नदी पर पुल का कार्य चल रहा है। यहां के लिए संचार, बिजली सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं जल्द मुहैया कराई जाएंगी।
-दीपचंद्र नवानी, एई, डीडीएमए (लोनिवि) केदारनाथ
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16/17 जून 2013 की आपदा के बाद से यह क्षेत्र वीरान पड़ा है। रामबाड़ा सहित पैदल मार्ग के भूस्खलन से तबाह होने से यहां तक पहुंच नहीं हो पा रही है। बीते साढ़े पांच वर्षों में बाबा केदार की यात्रा पर आया कोई श्रद्धालु यहां नहीं पहुंचा है। लेकिन, अब यह स्थान पूर्व की भांति यात्राकाल में गुलजार रहेगा। डीडीएमए (लोनिवि) द्वारा साढ़े तीन किमी लंबे व चार मीटर चौड़े पैदल मार्ग का निर्माण पूरा कर दिया गया है। इस पैदल मार्ग को धाम से जोड़ने के लिए मंदाकिनी नदी पर झूला पुल निर्माण किया जा रहा है। वयोवृद्ध तीर्थपुरोहित श्रीनिवास पोस्ती का कहना है कि केदारनाथ यात्रा में गरुड़चट्टी का विशेष धार्मिक महत्व है। यह स्थान आध्यात्म व ध्यान साधना के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मन की शांति के लिए दशकों से सैकड़ों साधु-संत यहां पहुंचते रहे हैं। आपदा के बाद छाई वीरानगी अब खत्म होने से यहां पुन: साधु-संत आ सकेंगे।
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मोदी ने डेढ़ माह तक की थी साधना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 के दशक में गरुड़चट्टी में डेढ़ माह साधना की थी। तब वे हर रोज यहां से केदारनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन व जलाभिषेक करते थे। बीते वर्ष वर्ष 3 मई और 20 अक्तूबर को भी केदारनाथ पहुंचने पर पीएम मोदी ने यहां बिताए दिनों को याद किया था। उन्होंने इस स्थान तक पहुंच मार्ग बनाने के साथ इसे विकसित करने को कहा था। मुख्य सचिव उत्पल कुमार के आदेश पर जिला प्रशासन द्वारा लोनिवि की मदद से मार्ग बनाने को सर्वे किया गया था। पहले चरण में डीडीएमए (लोनिवि) द्वारा केदारनाथ-गरुड़चट्टी मार्ग तैयार कर लिया गया है।
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केदारनाथ से गरुड़चट्टी तक पैदल मार्ग का निर्माण पूरा हो चुका है। मंदाकिनी नदी पर पुल का कार्य चल रहा है। यहां के लिए संचार, बिजली सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं जल्द मुहैया कराई जाएंगी।
-दीपचंद्र नवानी, एई, डीडीएमए (लोनिवि) केदारनाथ