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दशकों से नहीं बन पाई 16 किमी डोभा-गणेशनगर सड़क
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अस्सी के दशक में स्वीकृत डोभा-गणेशनगर मोटर मार्ग का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। जनता व क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के कई बार के आंदोलन के बाद भी यह मोटर मार्ग पूरा होने की राह देख रहा है, लेकिन शासन-प्रशासन व नेताओं से सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले हैं।
केदारनाथ विधानसभा के सैनिक बाहुल्य क्षेत्र में शामिल डोभा, थलड़ा, गबनी, स्यालडोभा आदि गांवों को सड़क से जोड़ने की मांग अविभाजित यूपी के समय वर्ष 1980 हो रही है। तब, यूपी शासन द्वारा लगभग 16 किमी अगस्त्यमुनि-डोला-गणेशनगर मार्ग की स्वीकृति दी गई, लेकिन वन अधिनियम व अन्य कारणों के चलते डेढ़ दशक तक मार्ग का निर्माण ही शुरू नहीं हो पाया। क्षेत्रीय जनता के कई बार के आंदोलनों के बाद वर्ष 1994 में लोनिवि ने सड़क कटिंग शुरू की। लेकिन पांच वर्ष में वर्ष 1999 तक मार्ग अगस्त्यमुनि से भौंसाल तक ही लगभग 11 किमी सड़क बन पाई। शेष 4.75 किमी निर्माण राज्य बनने के 21 वर्ष बाद भी नहीं हो पाया है।
मार्ग को वर्ष 2005/06 में स्पेशल कंपोनेंट प्लान में शामिल कर नाकोट, धान्यूं, बगर, ताली, त्रिशूला, भैंसवाण, नौली, कोटनगर, चौंडाधार, चमेली, जहंगी आदि गांवों को जोडऩे के लिए मार्ग का विस्तार कर आठ किमी वित्तीय स्वीकृति भी मिली, लेकिन वन अधिनियम के चलते आज तक काम शुरू नहीं हो पाया है। मोटर मार्ग संघर्ष समिति के अध्यक्ष कुंवर लाल आर्य, उपाध्यक्ष सुनील झिक्वांण, कोषाध्यक्ष शिशुपाल भंडारी, कैलाश पंवार, त्रिभुवन बुटोला आदि का कहना है कि बीते दो दशक में कई बार शासन-प्रशासन को समस्या बता चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस है। मार्ग का निर्माण पूरा नहीं होने से गणेशनगर सहित क्षेत्र के दस से अधिक गांवों के ग्रामीणों को आज भी रोजमर्रा के कार्यों के लिए अन्यत्र जगह से 20 से 35 किमी अतिरिक्त सफर के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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केदारनाथ विधानसभा के सैनिक बाहुल्य क्षेत्र में शामिल डोभा, थलड़ा, गबनी, स्यालडोभा आदि गांवों को सड़क से जोड़ने की मांग अविभाजित यूपी के समय वर्ष 1980 हो रही है। तब, यूपी शासन द्वारा लगभग 16 किमी अगस्त्यमुनि-डोला-गणेशनगर मार्ग की स्वीकृति दी गई, लेकिन वन अधिनियम व अन्य कारणों के चलते डेढ़ दशक तक मार्ग का निर्माण ही शुरू नहीं हो पाया। क्षेत्रीय जनता के कई बार के आंदोलनों के बाद वर्ष 1994 में लोनिवि ने सड़क कटिंग शुरू की। लेकिन पांच वर्ष में वर्ष 1999 तक मार्ग अगस्त्यमुनि से भौंसाल तक ही लगभग 11 किमी सड़क बन पाई। शेष 4.75 किमी निर्माण राज्य बनने के 21 वर्ष बाद भी नहीं हो पाया है।
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मार्ग को वर्ष 2005/06 में स्पेशल कंपोनेंट प्लान में शामिल कर नाकोट, धान्यूं, बगर, ताली, त्रिशूला, भैंसवाण, नौली, कोटनगर, चौंडाधार, चमेली, जहंगी आदि गांवों को जोडऩे के लिए मार्ग का विस्तार कर आठ किमी वित्तीय स्वीकृति भी मिली, लेकिन वन अधिनियम के चलते आज तक काम शुरू नहीं हो पाया है। मोटर मार्ग संघर्ष समिति के अध्यक्ष कुंवर लाल आर्य, उपाध्यक्ष सुनील झिक्वांण, कोषाध्यक्ष शिशुपाल भंडारी, कैलाश पंवार, त्रिभुवन बुटोला आदि का कहना है कि बीते दो दशक में कई बार शासन-प्रशासन को समस्या बता चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस है। मार्ग का निर्माण पूरा नहीं होने से गणेशनगर सहित क्षेत्र के दस से अधिक गांवों के ग्रामीणों को आज भी रोजमर्रा के कार्यों के लिए अन्यत्र जगह से 20 से 35 किमी अतिरिक्त सफर के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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