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बैठकी होली में कवियों ने बांधा समा
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रुद्रप्रयाग/तिलवाड़ा। कलश साहित्यिक संस्था की ओर से रुद्रप्रयाग व तिलवाड़ा में बैठकी होली का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों द्वारा होली के गीत गाकर पूरा माहौल रंगमय बनाया गया।
जिला मुख्यालय में आयोजित बैठकी होली में कवियों द्वारा कैले बांधिनी चीर ओ रघुंनंदन राजा, पनिया भरन मत जा गुजरिया, ओ हो मोहन गिरधारी, ब्युणली फ्यूंलाड़ी तोड़ल्यां बुरांस, होरी मां रंग लप्वडना बाला, भर पिचकारी रंग डारो रे, शिव के मन मा ही बसे काशी आदि गीत गाए गए। इसके अलावा तिलवाड़ा में आयोजित बैठकी होली में भी कवियों द्वारा विभिन्न रचनाओं की प्रस्तुतियां दी गई। इस मौके पर ओम प्रकाश सेमवाल, जगदंबा चमोला, चंद्रशेखर पुरोहित, केशव डोभाल, भरत रावत, विवेक बंसल, सुरेश गैरोला, डा विश्वनाथ खाली, कुलदीप राणा, भूपेंद्र भंडारी, कृष्णनंद डिमरी समेत अन्य लोग मौजूद थे।
जिला मुख्यालय में आयोजित बैठकी होली में कवियों द्वारा कैले बांधिनी चीर ओ रघुंनंदन राजा, पनिया भरन मत जा गुजरिया, ओ हो मोहन गिरधारी, ब्युणली फ्यूंलाड़ी तोड़ल्यां बुरांस, होरी मां रंग लप्वडना बाला, भर पिचकारी रंग डारो रे, शिव के मन मा ही बसे काशी आदि गीत गाए गए। इसके अलावा तिलवाड़ा में आयोजित बैठकी होली में भी कवियों द्वारा विभिन्न रचनाओं की प्रस्तुतियां दी गई। इस मौके पर ओम प्रकाश सेमवाल, जगदंबा चमोला, चंद्रशेखर पुरोहित, केशव डोभाल, भरत रावत, विवेक बंसल, सुरेश गैरोला, डा विश्वनाथ खाली, कुलदीप राणा, भूपेंद्र भंडारी, कृष्णनंद डिमरी समेत अन्य लोग मौजूद थे।
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