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शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व जंगली जानवर बनें पलायन का कारण : नेगी
Updated Wed, 21 Feb 2018 10:48 PM IST
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अगस्त्यमुनि। राज्य पलायन आयोग के उपाध्यक्ष शरद सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश में 968 गांव पूरी तरह से खाली हो गए हैं। पौड़ी और अल्मोड़ा जिले में तेजी से आबादी घटी है। पलायन की बढ़ती गति पर रोक लगाने के लिए ठोस नीतियां बनाकर धरातल पर कार्य की जरूरत है। उन्होंने गैरसैंण राजधानी की पुरजोर पैरवी की।
मंदाकिनी घाटी के भ्रमण पर पहुंचे राज्य पलायन आयोग के उपाध्यक्ष शरद सिंह नेगी ने गबनी गांव (चंद्रापुरी) में प्रधानमंत्री कौशल केंद्र का निरीक्षण किया। अमर उजाला के साथ बातचीत में नेगी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की 52 फीसदी आबादी उद्यमसिंह नगर, देहरादून और हरिद्वार जिलों में रहती है, लेकिन लोगों का राजधानी के लिए गैरसैंण की तरफ रुझान है। पर्वतीय राज्य की राजधानी पर्वतीय क्षेत्र में होनी जरूरी है। टूरिज्म, ईको टूरिज्म, रेल और ऑल वेदर रोड पर्वतीय क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे। हिमाचल प्रदेश से वन महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त आईएफएस नेगी ने कहा कि प्रदेश के सभी जनपदों से पलायन के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। डेढ़ माह में प्रदेश में हुए पलायन की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। इस बारे में रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। उन्होंने बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व जंगली जानवरों से नुकसान की वजह को पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन का मुख्य कारण माना। आयोग अपनी अगली बैठक में एक ड्राफ्ट बनाएगा, जिसमें लोगों की समस्याएं ओर सुझाव को भी शामिल किया जाएगा। इस मौके पर सेवा इंटरनेशनल कौशल विकास केंद्र के कार्यक्रम प्रबंधक अभिषेक कुमार व परियोजना समन्वयक गुंजन कौशिक मौजूद थे।
मंदाकिनी घाटी के भ्रमण पर पहुंचे राज्य पलायन आयोग के उपाध्यक्ष शरद सिंह नेगी ने गबनी गांव (चंद्रापुरी) में प्रधानमंत्री कौशल केंद्र का निरीक्षण किया। अमर उजाला के साथ बातचीत में नेगी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की 52 फीसदी आबादी उद्यमसिंह नगर, देहरादून और हरिद्वार जिलों में रहती है, लेकिन लोगों का राजधानी के लिए गैरसैंण की तरफ रुझान है। पर्वतीय राज्य की राजधानी पर्वतीय क्षेत्र में होनी जरूरी है। टूरिज्म, ईको टूरिज्म, रेल और ऑल वेदर रोड पर्वतीय क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे। हिमाचल प्रदेश से वन महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त आईएफएस नेगी ने कहा कि प्रदेश के सभी जनपदों से पलायन के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। डेढ़ माह में प्रदेश में हुए पलायन की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। इस बारे में रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। उन्होंने बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व जंगली जानवरों से नुकसान की वजह को पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन का मुख्य कारण माना। आयोग अपनी अगली बैठक में एक ड्राफ्ट बनाएगा, जिसमें लोगों की समस्याएं ओर सुझाव को भी शामिल किया जाएगा। इस मौके पर सेवा इंटरनेशनल कौशल विकास केंद्र के कार्यक्रम प्रबंधक अभिषेक कुमार व परियोजना समन्वयक गुंजन कौशिक मौजूद थे।
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