फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Rudraprayag News ›   पैदल पुलों के इंतजार में गुजर गए साढ़े चार वर्ष

पैदल पुलों के इंतजार में गुजर गए साढ़े चार वर्ष

Thu, 14 Dec 2017 10:30 PM IST
Updated Thu, 14 Dec 2017 10:30 PM IST
विज्ञापन
पैदल पुलों के इंतजार में गुजर गए साढ़े चार वर्ष

विज्ञापन
रुद्रप्रयाग। आपदा के साढ़े चार वर्ष बाद भी मंदाकिनी नदी पर बहे झूला पुलों के स्थान पर स्टील गार्डर पुलों का निर्माण नहीं हो पाया है। जनपद में अन्य कई मोटर व झूला पुल भी हादसों को न्योता दे रहे हैं, लेकिन सुध नहीं ली जा रही है।
16/17 जून 2013 की आपदा में मंदाकिनी नदी पर रुद्रप्रयाग से कालीमठ तक छोटे-बड़े झूला पुल और एक मोटर पुल बह गया था। अक्तूबर 2013 में तत्कालीन सरकार द्वारा प्रभावित स्थानों, माई की मढ़ी, सिल्ली, विजयनगर, चंद्रापुरी, रेल-फाटा, कालीमठ, रुच्छ महादेव और सोनप्रयाग में स्टील गार्डर पुल निर्माण की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन साढ़े चार वर्ष बीत जाने के बाद मात्र तीन पैदल पुलों का निर्माण हो पाया है। विजयनगर में 60 मीटर स्पान के स्टील गार्डर पुल के एबेडमेंट तक पूरे नहीं बन पाए हैं। निर्माण पर पूर्व में स्वीकृत 334 लाख रुपये की धनराशि खर्च हो चुकी है। विभाग द्वारा शासन को भेजे गए 605 लाख के रिवाइज इस्टीमेट को स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
विज्ञापन

चंद्रापुरी में भी 60 मीटर स्पान के स्टील गार्डर पुल के निर्माण में स्वीकृत 290 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन कार्य मात्र एबेडमेंट तक हो पाया है। लंबे समय से यहां कार्य ठप पड़ा है। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए लोनिवि द्वारा 2 करोड़ 11 लाख, 94 हजार का रिवाइज इस्टीमेट भेजा गया है, जिसे डेढ़ वर्ष बाद सैद्धांतिक स्वीकृति मिल पाई है। आपदा के बाद से दोनों पुलों पर लोनिवि की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। दो वर्ष पूर्व विजयनर और चंद्रापुरी में पुल के अभाव में ट्राली से गुजरते हुए एक बच्ची सहित दो लोगों की नदी में गिरकर मौत हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक ग्रामीण घायल हो गए हैं। इन घटनाओं पर तत्कालीन डीएम डा. राघव लंगर और रंजना द्वारा लोनिवि अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सचिव को पत्र भी लिखे गए थे, लेकिन आज तक स्थिति नहीं सुध पाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वैली ब्रिज बना खेवनहार
रुद्रप्रयाग। बाईपास पर बीआरओ द्वारा जवाड़ी बना चार वर्ष पूर्व मंदाकिनी नदी पर बनाया गया वैली ब्रिज खेवनहार बना हुआ है। रुद्रप्रयाग में वन-वे व्यवस्था के चलते गौरीकुंड और चमोली जनपद से श्रीनगर, ऋषिकेश जाने वाले वाहन इसी पुल से होकर गुजर रहे हैं। यात्राकाल में अधिक ट्रैफिक का बोझ भी पुल पर पड़ रहा है। यहीं नहीं, भारी वाहन भी इसी पुल से गुजर रहे हैं, जिससे इसकी क्षमता पर असर पड़ रहा है। पुल का बीच का हिस्सा हल्का झुक गया है।

हादसों को न्योता दे रहा पुल
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी को जिला मुख्यालय से जोडने वाला बेलणी पुल कभी भी हादसों का सबब बन सकता है। भारी वाहन गुजरने से पुल दिनोंदिन जर्जर हो रहा है। निर्माण के करीब छह दशक पूरे कर चुके पुल के प्रति शासन, प्रशासन व विभाग गंभीर नहीं है। उधर, अलकनंदा नदी पर घोलतीर झूला पुल सहित जिले में फतेहपुर, भीरी, लांबर पुल की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है।


इनका कहना है -
आपदा में बहे झूला पुलों के स्थान पर बनाए जा रहे स्थायी पुलों के निर्माण के लिए विभाग द्वारा भेजे गए रिवाइज इस्टीमेट को स्वीकृति मिल गई है। जिले में अन्य पुलों के सुधार के लिए पर्याप्त धन नहीं मिल पा रहा है, जिस कारण समुचित मरम्मत नहीं हो पाई है। बावजूद जिला, राज्य और आपदा मद में प्रत्येक वर्ष झूला पुलों की मरम्मत के प्रस्ताव शामिल किए जा रहे हैं।
-इंद्रजीत बोस, अधिशासी अभियंता, लोनिवि प्रांतीय खंड, रुद्रप्रयाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed