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तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के पीछे लगे कूड़े के ढेर
Updated Sun, 05 Nov 2017 10:34 PM IST
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रुद्रप्रयाग। तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के पीछे कई कुंतल कूड़ा-कचरा बिखरा है, जो वहां के पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन धाम के कपाट बंद होने के बाद से प्रशासन और बीकेटीसी समस्या से अंजान बने हुए हैं।
तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के पीछे की तरफ खाई क्षेत्र में कई कुंतल प्लास्टिक व अन्य प्रकार का कचरा फैला हुआ है। यह कचरा, पूरे यात्राकाल का है, जो धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं व अन्य पर्यटकों द्वारा उडेला गया है, बीते 27 अक्तूबर को कपाट बंद होने के बाद से यह कूड़ा ऐसे ही क्षेत्र में बिखरा पड़ा है, जिससे यहां के पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। मंदिर के मठापति रामप्रसाद मैठाणी, सुरेंद्र मैठाणी, मुकेश मैठाणी ने मंदिर समिति और प्रशासन से धाम क्षेत्र में मौजूद कूड़े के निस्तारण की मंाग की है। इधर, पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली का कहना है कि श्रद्धा के नाम पर मध्य हिमालय के उच्च स्थानों पर पहुंच रहा प्लास्टिक कचरा भविष्य के लिए नया खतरा बन रहा है, जिस पर रोक जरूरी है। इस संबंध में ऊखीमठ के उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि मामले में पूरी जानकारी लेकर जल्द समस्या का उचित निस्तारण कर दिया जएगा।
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तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के पीछे की तरफ खाई क्षेत्र में कई कुंतल प्लास्टिक व अन्य प्रकार का कचरा फैला हुआ है। यह कचरा, पूरे यात्राकाल का है, जो धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं व अन्य पर्यटकों द्वारा उडेला गया है, बीते 27 अक्तूबर को कपाट बंद होने के बाद से यह कूड़ा ऐसे ही क्षेत्र में बिखरा पड़ा है, जिससे यहां के पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। मंदिर के मठापति रामप्रसाद मैठाणी, सुरेंद्र मैठाणी, मुकेश मैठाणी ने मंदिर समिति और प्रशासन से धाम क्षेत्र में मौजूद कूड़े के निस्तारण की मंाग की है। इधर, पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली का कहना है कि श्रद्धा के नाम पर मध्य हिमालय के उच्च स्थानों पर पहुंच रहा प्लास्टिक कचरा भविष्य के लिए नया खतरा बन रहा है, जिस पर रोक जरूरी है। इस संबंध में ऊखीमठ के उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि मामले में पूरी जानकारी लेकर जल्द समस्या का उचित निस्तारण कर दिया जएगा।
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