{"_id":"5b82df0342c792465b689971","slug":"131535303427-rudraprayag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेल गांव को जोडने वाली ट्राली का पिलर खतरे की जद में-compat","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेल गांव को जोडने वाली ट्राली का पिलर खतरे की जद में-compat
Updated Sun, 26 Aug 2018 10:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ आपदा से प्रभावित केदारघाटी के रेल गांव के ग्रामीण पांच वर्ष से ट्राली के सहारे आवाजाही कर रहे हैं, लेकिन अब, ट्राली भी खतरे की जद में आ गई है। मंदाकिनी नदी के दूसरे छोर पर जहां ट्राली खड़ी रहती है, वहां भारी भूधंसाव हो रहा है, जिससे खतरा बढ़ गया है।
16/17 जून 2013 की आपदा में मंदाकिनी नदी पर रेल गांव को जोड़ने वाला झूला पुल बह गया था। तब, से ग्रामीण ट्राली के सहारे आवाजाही कर रहे हैं। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे भूकटाव हो रहा है। ऐसे में ट्राली भी खतरे की जद में आ गई है। गांव की तरफ वाले हिस्से में जहां पर ट्राली का तार बांधने के लिए पिलर लगाया गया है, उसके ठीक नीचे भूकटाव हो रहा है। बारिश इसी तरह रही तो पिलर कभी भी नदी में बह सकता है। इन हालात में गांव के 15 परिवारों का गौरीकुंड हाईवे और फाटा बाजार से संपर्क कट जाएगा और वह गांव में ही कैद होकर रह जाएंगे। ग्रामीण देवेंद्र सिंह तिंदोरी, कलम सिंह चौहान आदि का कहना है कि आपदा के बाद से स्थायी पुल निर्माण की मांग होती आ रही है, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। अब, हालात फिर आपदा जैसे हो गए हैं। इधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि रेल गांव के बारे में तहसील ऊखीमठ से पूरी जानकारी मांगी गई है। ग्रामीणों की आवाजाही निरंतर बनी रहे, इसके लिए जल्द पुख्ता इंतजाम के प्रयास किए जा रहे हैं।
16/17 जून 2013 की आपदा में मंदाकिनी नदी पर रेल गांव को जोड़ने वाला झूला पुल बह गया था। तब, से ग्रामीण ट्राली के सहारे आवाजाही कर रहे हैं। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे भूकटाव हो रहा है। ऐसे में ट्राली भी खतरे की जद में आ गई है। गांव की तरफ वाले हिस्से में जहां पर ट्राली का तार बांधने के लिए पिलर लगाया गया है, उसके ठीक नीचे भूकटाव हो रहा है। बारिश इसी तरह रही तो पिलर कभी भी नदी में बह सकता है। इन हालात में गांव के 15 परिवारों का गौरीकुंड हाईवे और फाटा बाजार से संपर्क कट जाएगा और वह गांव में ही कैद होकर रह जाएंगे। ग्रामीण देवेंद्र सिंह तिंदोरी, कलम सिंह चौहान आदि का कहना है कि आपदा के बाद से स्थायी पुल निर्माण की मांग होती आ रही है, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। अब, हालात फिर आपदा जैसे हो गए हैं। इधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि रेल गांव के बारे में तहसील ऊखीमठ से पूरी जानकारी मांगी गई है। ग्रामीणों की आवाजाही निरंतर बनी रहे, इसके लिए जल्द पुख्ता इंतजाम के प्रयास किए जा रहे हैं।
विज्ञापन