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तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के वीर अगुवानी के रूप में पूजनीय भूतनाथ देवता-compat
Updated Mon, 30 Apr 2018 10:48 PM IST
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ऊखीमठ। भगवान भूतनाथ को तृतीय केदार तुंगनाथ के अगुवानी वीर के रूप में पूजा जाता है। वे मठ क्षेत्र के रक्षक भी हैं। बिना भूतनाथ की पूजा किए बगैर तुंगनाथ भगवान की पूजा आधी-अधूरी मानी जाती है।
मक्कूमठ गांव के दक्षिण में विराजमान भगवान भूतनाथ यहां आस्था के मुख्य केंद्र हैं। मान्यता है कि तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली के हिमालय स्थित तुंगनाथ धाम को प्रस्थान करने के दौरान हक हकूकधारियों, दस्तूरदारों और तुंगनाथ के 85 गूठ गांवों द्वारा भगवान को नए अनाज का भोग लगाया जाता है। इस मौके पर आराध्य देव और अगुवानी वीर भूतनाथ की संयुक्त पूजा की जाती है। वयोवृद्ध जगदीश प्रसाद मैठाणी बताते हैं कि जब भगवान तुंगनाथ अपने धाम में विराजमान होते हैं, तब छह माह तक भूतनाथ ही पूरे क्षेत्र की रक्षा करते हैं। ब्यूरो
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मक्कूमठ गांव के दक्षिण में विराजमान भगवान भूतनाथ यहां आस्था के मुख्य केंद्र हैं। मान्यता है कि तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली के हिमालय स्थित तुंगनाथ धाम को प्रस्थान करने के दौरान हक हकूकधारियों, दस्तूरदारों और तुंगनाथ के 85 गूठ गांवों द्वारा भगवान को नए अनाज का भोग लगाया जाता है। इस मौके पर आराध्य देव और अगुवानी वीर भूतनाथ की संयुक्त पूजा की जाती है। वयोवृद्ध जगदीश प्रसाद मैठाणी बताते हैं कि जब भगवान तुंगनाथ अपने धाम में विराजमान होते हैं, तब छह माह तक भूतनाथ ही पूरे क्षेत्र की रक्षा करते हैं। ब्यूरो
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