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यक्षराज जाख देवता ने धधकते अंगारों के अग्निकुंड में किया नृत्य
Updated Sun, 15 Apr 2018 11:08 PM IST
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गुप्तकाशी। धधकते अंगारों के अग्निकुंड में भगवान यक्षराज जाख देवता के प्रवेश करते ही पूरी केदारघाटी आराध्य की जयकारों से गूंज उठी। इसके बाद भगवान यक्षराज ने अंगारों पर नृत्य करना शुरू किया। इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बने हजारों श्रद्धालुओं ने देवता का आशीर्वाद लिया और अग्निकुंड की भभूत को प्रसाद के रूप में अपने साथ घर ले गए।
तीन दिवसीय जाख मेला में रविवार को भगवान यक्षराज जाख देवता के पश्वा (मदन सिंह) श्रद्धालुओं के साथ गंगा स्नान को पहुंचे। मंदाकिनी नदी किनारे पूजा-अर्चना और स्नान कर आराध्य ढोल-दमाऊं, रणसिंह की थाप पर नारायणकोटि गांव से नृत्य करते हुए कोठेड़ा और देवशाल गांव के विंदवासिनी मंदिर के रास्ते दोपहर 2 बजे जाख मंदिर पहुंचे। यहां पर पुजारियों ने आराध्य की विशेष पूजा की। करीब आधा दर्जन ढोल-दमाऊं व अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों और गीतों के साथ देवता का आह्वान किया गया। इसके बाद भगवान यक्षराज अपने पश्वा पर अवतरित हुए और सीधे मंदिर के द्वार पर पहुंचे और यहां से दौड़ते हुए धधकते हुए अग्निकुंड में प्रवेश कर गए। देवता ने पूरे कुंड का चक्कर लगाया। इस दृश्य को देखने के लिए प्रात: 9 बजे से ही मंदिर में केदारघाटी सहित जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। जाख मेला समिति के रेवती नंद देवशाली, आत्मराम बहुगुणा, मनोहर देवशाली, भूपाल सिंह बिष्ट, विनोद देवशाली ने सफल आयोजन के लिए क्षेत्रवासियों का आभार जताया। इससे पूर्व बीते शनिवार की सुबह से कोठेड़ा गांव के पुजारियों, देवशाल के वेदपाठियों और नारायणकोटि के सेवक- श्रद्धालुओं ने जाख मंदिर परिसर में धार्मिक विधि-विधान से अग्निकुंड की रचना की। बैसाख संक्रांति की दोपहर को अग्नि प्रज्ज्वलित कर अग्निकुंड की रात्रि के चारों पहर पूजा-अर्चना की गई। वहीं इस मौके पर ग्रामीणों ने मंदिर में कीर्तन-भजन भी किए। इससे पहले दो दिन पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए गए।
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तीन दिवसीय जाख मेला में रविवार को भगवान यक्षराज जाख देवता के पश्वा (मदन सिंह) श्रद्धालुओं के साथ गंगा स्नान को पहुंचे। मंदाकिनी नदी किनारे पूजा-अर्चना और स्नान कर आराध्य ढोल-दमाऊं, रणसिंह की थाप पर नारायणकोटि गांव से नृत्य करते हुए कोठेड़ा और देवशाल गांव के विंदवासिनी मंदिर के रास्ते दोपहर 2 बजे जाख मंदिर पहुंचे। यहां पर पुजारियों ने आराध्य की विशेष पूजा की। करीब आधा दर्जन ढोल-दमाऊं व अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों और गीतों के साथ देवता का आह्वान किया गया। इसके बाद भगवान यक्षराज अपने पश्वा पर अवतरित हुए और सीधे मंदिर के द्वार पर पहुंचे और यहां से दौड़ते हुए धधकते हुए अग्निकुंड में प्रवेश कर गए। देवता ने पूरे कुंड का चक्कर लगाया। इस दृश्य को देखने के लिए प्रात: 9 बजे से ही मंदिर में केदारघाटी सहित जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। जाख मेला समिति के रेवती नंद देवशाली, आत्मराम बहुगुणा, मनोहर देवशाली, भूपाल सिंह बिष्ट, विनोद देवशाली ने सफल आयोजन के लिए क्षेत्रवासियों का आभार जताया। इससे पूर्व बीते शनिवार की सुबह से कोठेड़ा गांव के पुजारियों, देवशाल के वेदपाठियों और नारायणकोटि के सेवक- श्रद्धालुओं ने जाख मंदिर परिसर में धार्मिक विधि-विधान से अग्निकुंड की रचना की। बैसाख संक्रांति की दोपहर को अग्नि प्रज्ज्वलित कर अग्निकुंड की रात्रि के चारों पहर पूजा-अर्चना की गई। वहीं इस मौके पर ग्रामीणों ने मंदिर में कीर्तन-भजन भी किए। इससे पहले दो दिन पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए गए।
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