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जखोली के सिलगढ़ पट्टी के 16 गांवों में बूंद-बूंद पानी का संकट
Updated Wed, 13 Jun 2018 10:44 PM IST
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तिलवाड़ा। विकासखंड जखोली के सिलगढ़ पट्टी के 16 गांव तीन माह से पेयजल संकट से जूझ रहे है। यहां स्वीकृत तैला-सिलगढ़ पेयजल योजना का निर्माण एक दशक बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। आक्रोशित जनप्रतिनिधियों व सिलगढ़ विकास संघर्ष समिति ने शासन, प्रशासन और निगम से लटकी पेयजल योजना का जल्द निर्माण करने की मांग की है। उन्होंने एक सप्ताह में कार्य शुरू नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
सिलगढ़ क्षेत्र के शीशों, कंडाली, सिरसोलिया, तेला, बंदरतोली, जैली, चाका-फलाटी, कुमड़ी, बुडोली, मुसाढुंग, धारकोट, मरगांव आदि गांवों में बीते मार्च माह से पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीण दूरस्थ पेयजल स्रोतों से अपनी प्यास बुझा रहे हैं, लेकिन बरसात के चलते प्राकृतिक स्रोतों व गदेरों का पानी दूषित हो रहा है, जिसे पीना सेहत के लिए ठीक नहीं है। बावजूद मजबूरी में ग्रामीण इसी पानी से अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। सिलगढ़ विकास संघर्ष समिति के सचिव दीपक रावत ने बताया कि गांवों को पर्याप्त जलापूर्ति के लिए वर्ष 2006-07 में तैला सिलगढ़ पेयजल योजना स्वीकृत हुई थी। जलनिगम द्वारा 2010-11 में कार्य शुरू किया गया, लेकिन 6 करोड़ रुपये खर्च के बाद भी अभी तक योजना पूरी नहीं हो पाई है। बताया कि योजना पर मुख्य पाइप लाइनों को मात्र टैंकों ही पहुंचाया गया है, लेकिन गांवों तक वितरण की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। पुरानी लाइनों से जलापूर्ति हो रही है, जो नाकाफी है। ग्राम प्रधान सुशीला देवी ने बताया कि तीन माह से गांवों में पेयजल संकट बना हुआ है। इधर, जल निगम के अधीशासी अभियंता नवल कुमार ने बताया कि तैला-सिलगढ़ योजना का निर्माण पूरा करने के लिए 3.29 करोड़ रुपये का रिवाइज स्टीमेट शासन को भेजा गया है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। धन स्वीकृति पर ही शेेष कार्य पूरा हो पाएगा।
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सिलगढ़ क्षेत्र के शीशों, कंडाली, सिरसोलिया, तेला, बंदरतोली, जैली, चाका-फलाटी, कुमड़ी, बुडोली, मुसाढुंग, धारकोट, मरगांव आदि गांवों में बीते मार्च माह से पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीण दूरस्थ पेयजल स्रोतों से अपनी प्यास बुझा रहे हैं, लेकिन बरसात के चलते प्राकृतिक स्रोतों व गदेरों का पानी दूषित हो रहा है, जिसे पीना सेहत के लिए ठीक नहीं है। बावजूद मजबूरी में ग्रामीण इसी पानी से अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। सिलगढ़ विकास संघर्ष समिति के सचिव दीपक रावत ने बताया कि गांवों को पर्याप्त जलापूर्ति के लिए वर्ष 2006-07 में तैला सिलगढ़ पेयजल योजना स्वीकृत हुई थी। जलनिगम द्वारा 2010-11 में कार्य शुरू किया गया, लेकिन 6 करोड़ रुपये खर्च के बाद भी अभी तक योजना पूरी नहीं हो पाई है। बताया कि योजना पर मुख्य पाइप लाइनों को मात्र टैंकों ही पहुंचाया गया है, लेकिन गांवों तक वितरण की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। पुरानी लाइनों से जलापूर्ति हो रही है, जो नाकाफी है। ग्राम प्रधान सुशीला देवी ने बताया कि तीन माह से गांवों में पेयजल संकट बना हुआ है। इधर, जल निगम के अधीशासी अभियंता नवल कुमार ने बताया कि तैला-सिलगढ़ योजना का निर्माण पूरा करने के लिए 3.29 करोड़ रुपये का रिवाइज स्टीमेट शासन को भेजा गया है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। धन स्वीकृति पर ही शेेष कार्य पूरा हो पाएगा।
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