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लक्ष्मण ने सूर्पणखा के नाक-कान काटे, सीता को हर ले गया लंकापति रावण
Updated Sun, 11 Nov 2018 09:41 PM IST
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रुद्रप्रयाग। नया बस अड्डा परिसर में आयोजित रामलीला के छठवें दिन लक्ष्मण द्वारा सूपर्णखा के नाक-कान काटने और सीता हरण लीला का मंचन किया गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद पांडाल में देर रात्रि तक दर्शकों की भीड़ जुटी रही।
श्री शक्ति संस्कृति एवं सांस्कृतिक ट्रस्ट की ओर से चल रही रामलीला में पंचवटी में घूमते हुए सूपर्णखा राम, लक्ष्मण से मिलती है। उन पर मोहित होकर सूपर्णखा दोनों के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है, लेकिन दोनों भाई उसे मना कर देते हैं। इस पर सूपर्णखा क्रोधित होकर सीता पर हमला करने का प्रयास करती है। तभी लक्ष्मण उसके नाक व कान काट देते हैं। रोती-बिलखती हुई वह अपने भाई खरदूषण के पास पहुंचकर उन्हें अपनी व्यथा सुनाती है। दोनों भाई राम-लक्ष्मण से युद्ध के लिए पंचवटी पहुंचते हैं और मारे जाते हैं। लंकापति रावण को जब यह सुचना मिलती है, तो उसे आभास हो जाता है कि नारायण मनुष्य रूप में पृथ्वी पर जन्म ले चुके हैं। इसके बाद रावण साधु के भेष में आकर माता सीता को हर लेता है। दूसरी ओर रामलीला में हास्य कवि नवीन सेमवाल ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के संयोजक एसएन सेमवाल, अध्यक्ष विजय कप्रवाण, चंद्रमोहन सेमवाल, हरि सिंह, रमेश भट, सतीश नौटियाल, हरि सिंह बिष्ट, नरेंद्र सिंह, रुपेश सेमवाल समेत भारी संख्या में दर्शक मौजूद थे।
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श्री शक्ति संस्कृति एवं सांस्कृतिक ट्रस्ट की ओर से चल रही रामलीला में पंचवटी में घूमते हुए सूपर्णखा राम, लक्ष्मण से मिलती है। उन पर मोहित होकर सूपर्णखा दोनों के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है, लेकिन दोनों भाई उसे मना कर देते हैं। इस पर सूपर्णखा क्रोधित होकर सीता पर हमला करने का प्रयास करती है। तभी लक्ष्मण उसके नाक व कान काट देते हैं। रोती-बिलखती हुई वह अपने भाई खरदूषण के पास पहुंचकर उन्हें अपनी व्यथा सुनाती है। दोनों भाई राम-लक्ष्मण से युद्ध के लिए पंचवटी पहुंचते हैं और मारे जाते हैं। लंकापति रावण को जब यह सुचना मिलती है, तो उसे आभास हो जाता है कि नारायण मनुष्य रूप में पृथ्वी पर जन्म ले चुके हैं। इसके बाद रावण साधु के भेष में आकर माता सीता को हर लेता है। दूसरी ओर रामलीला में हास्य कवि नवीन सेमवाल ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के संयोजक एसएन सेमवाल, अध्यक्ष विजय कप्रवाण, चंद्रमोहन सेमवाल, हरि सिंह, रमेश भट, सतीश नौटियाल, हरि सिंह बिष्ट, नरेंद्र सिंह, रुपेश सेमवाल समेत भारी संख्या में दर्शक मौजूद थे।
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