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100 दिन का वादा साढ़े चार साल बाद भी अधूरा
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100 दिन में रुद्रप्रयाग में जिला सहकारी बैंक खोलने का वादा साढ़े चार साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया। तीन वर्ष से फाइल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) में फंसी हुई है। आज भी चमोली और टिहरी जिला सहकारी बैंक के सहारे कामकाज हो रहा है और रुद्रप्रयाग से लोगों को वहीं जाना पड़ता है।
रुद्रप्रयाग को आज भी अपना सहकारी बैंक नहीं मिल पाया है। जबकि, 14 अप्रैल 2017 को उच्च शिक्षा व सहकारिता मंत्री डा. धन सिंह रावत ने बधाणीताल महोत्सव में 100 दिन में जिले में सहकारी बैंक की स्थापना की घोषणा की थी। चमोली व नई टिहरी जिला सहकारी बैंक की 10 शाखाओं के सहारे जिले में सहकारिता के कार्य हो रहे हैं। इन्हीं बैंक की शाखाओं से जिले की 37 साधन सहकारी समितियां संबद्ध हैं। समितियों के कर्मचारियों को बैंकिंग कार्य और ऋण मामलों के लिए गोपेश्वर और नई टिहरी की दौड़ लगानी पड़ रही है। यही नहीं, रुद्रप्रयाग के किसानों और अन्य लोगों को सहकारी बैंक से जुड़ी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता महावीर सिंह जगवाण, काश्तकार राकेश बिष्ट, विजय सेमवाल का कहना है कि विभाग व सरकारों की लापरवाही से जिले को अपना सहकारी बैंक नहीं मिल पाया है। इन हालातों में जरूरतमंदों को मीलों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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टिहरी, चमोली जिला बैंक कर चुके प्रस्ताव पारित
रुद्रप्रयाग। वर्ष 2018 में चमोली व टिहरी जिला बैंक की वार्षिक बैठक में भी रुद्रप्रयाग जिले में संचालित 10 शाखाओं को अलग करने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। सहकारिता विभाग ने इस प्रस्ताव को शासन को भेजा था। जहां से इसे केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इसे स्वीकृति देते हुए आरबीआई को भेजा। लेकिन आरबीआई से अभी तक सहकारी बैंक संचालन को लेकर हरी झंडी नहीं मिल पाई है।
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जिला सहकारी बैंक के प्रस्ताव के तहत भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने जो भी जानकारियां मांगी थी, उन्हें समयबद्ध भेज दिया गया था। लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी जिला सहकारी बैंक संचालन की अनुमति नहीं मिल पाई है। इस संबंध में आला अधिकारियों व शासन से भी नियमित पत्राचार किया जा रहा है।
-योगेश जोशी, सहायक निबंधक, सहकारिता विभाग रुद्रप्रयाग।
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रुद्रप्रयाग को आज भी अपना सहकारी बैंक नहीं मिल पाया है। जबकि, 14 अप्रैल 2017 को उच्च शिक्षा व सहकारिता मंत्री डा. धन सिंह रावत ने बधाणीताल महोत्सव में 100 दिन में जिले में सहकारी बैंक की स्थापना की घोषणा की थी। चमोली व नई टिहरी जिला सहकारी बैंक की 10 शाखाओं के सहारे जिले में सहकारिता के कार्य हो रहे हैं। इन्हीं बैंक की शाखाओं से जिले की 37 साधन सहकारी समितियां संबद्ध हैं। समितियों के कर्मचारियों को बैंकिंग कार्य और ऋण मामलों के लिए गोपेश्वर और नई टिहरी की दौड़ लगानी पड़ रही है। यही नहीं, रुद्रप्रयाग के किसानों और अन्य लोगों को सहकारी बैंक से जुड़ी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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सामाजिक कार्यकर्ता महावीर सिंह जगवाण, काश्तकार राकेश बिष्ट, विजय सेमवाल का कहना है कि विभाग व सरकारों की लापरवाही से जिले को अपना सहकारी बैंक नहीं मिल पाया है। इन हालातों में जरूरतमंदों को मीलों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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टिहरी, चमोली जिला बैंक कर चुके प्रस्ताव पारित
रुद्रप्रयाग। वर्ष 2018 में चमोली व टिहरी जिला बैंक की वार्षिक बैठक में भी रुद्रप्रयाग जिले में संचालित 10 शाखाओं को अलग करने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। सहकारिता विभाग ने इस प्रस्ताव को शासन को भेजा था। जहां से इसे केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इसे स्वीकृति देते हुए आरबीआई को भेजा। लेकिन आरबीआई से अभी तक सहकारी बैंक संचालन को लेकर हरी झंडी नहीं मिल पाई है।
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जिला सहकारी बैंक के प्रस्ताव के तहत भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने जो भी जानकारियां मांगी थी, उन्हें समयबद्ध भेज दिया गया था। लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी जिला सहकारी बैंक संचालन की अनुमति नहीं मिल पाई है। इस संबंध में आला अधिकारियों व शासन से भी नियमित पत्राचार किया जा रहा है।
-योगेश जोशी, सहायक निबंधक, सहकारिता विभाग रुद्रप्रयाग।