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छात्रों को नशे के दुष्प्रभाव से बचाना जरूरी

Thu, 24 Feb 2022 08:14 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 08:14 PM IST
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'Youth becomes a victim of drugs due to lack of time for parents'
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत एसएसडीपीसी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आयोजित ऑनलाइन एंटी ड्रग्स सर्वेक्षण में किशोर-किशोरियों और अन्य लोगों के नशे की गिरफ्त में आने के कारणों पर चर्चा की गई। मंथन में ये भी सामने आया कि अक्सर अभिभावकों से पूरा समय नहीं मिलने के चलते किशोर नशे की लत का शिकार हो जाते हैं।
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बृहस्पतिवार को कॉलेज में उच्च शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर एंटी ड्रग्स क्लीनिक की गतिविधियों के तहत डॉ. शालिनी और डॉ. रुचि के निर्देशन में राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से स्वस्थ भारत-आत्मनिर्भर भारत विषय पर ऑनलाइन एंटी-ड्रग्स सर्वे कराया गया। सर्वे में नशे की लत लगने के कारणों और नशीली दवाओं का जीवनशैली पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा की गई। सर्वेक्षण में 338 लोग शामिल रहे, जो विवाहित, अविवाहित, ग्रामीण क्षेत्र, शहरी क्षेत्र और अन्य वर्ग के लोग थे। सर्वेक्षण में जो रिपोर्ट सामने आई, उसके अनुसार लोग खुशी अनुभव करने के लिए ड्रग्स को इंजेक्शन के माध्यम से भी लेते हैं।
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ड्रग्स की लत में आए लोग इसका इलाज नहीं चाहते हैं। ये बात भी सामने आई कि अक्सर जो अभिभावक अपने बच्चों को पूरा समय नहीं दे पाते, वे तनाव को दूर करने के लिए ड्रग्स के आदी हो जाते हैं। कार्यक्रम संयोजक डॉ. शालिनी और डॉ. रुचि ने बताया कि अभिभावकों को अधिक से अधिक समय बच्चों को देना चाहिए। उनके साथ समय बिताकर उनकी भावनाओं को समझने का प्रयास करें। साथ ही प्रयास रहे कि आसपास का कोई व्यक्ति नशे का शिकार तो नहीं हो रहा है।
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