{"_id":"579a4b2e4f1c1be41321e3ff","slug":"women-s-lok-adalat-became-a-fun","type":"story","status":"publish","title_hn":"मजाक बनकर रह गई महिला लोक अदालत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मजाक बनकर रह गई महिला लोक अदालत
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:43 PM IST
विज्ञापन
लोकअदालत
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित महिला लोक अदालत मजाक बनकर रह गई। प्रचार-प्रसार के अभाव में अदालत में महज एक शिकायत आई। महिलाओं के इस अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को जुटाकर संपन्न कर लिया गया जबकि यह कार्यक्रम आम महिलाओं की समस्याओं के लिए रखा गया था।
सरकार के आदेश पर बृहस्पतिवार को ब्लॉक सभागार रुड़की में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से महिला लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत का मकसद महिलाओं की समस्याओं का समाधान करना था। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए वैसे तो गांव दर गांव पूरा प्रचार-प्रसार किया जाना जरूरी था, लेकिन जिस विभाग को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी, उसने कोई प्रचार-प्रसार करने की बजाए अपने विभाग की आंगनबाड़ियों को बुलाकर लोक अदालत लगवा दी जिसका परिणाम यह रहा कि किसी भी महिला को इसकी कोई जानकारी न होने से अदालत में मात्र एक शिकायत आई, वह भी अर्चना नाम की युवती ने गौरा देवी कन्या धन योजना की सहायता राशि नहीं मिलने की समस्या रखी जिस पर एडीओ समाज कल्याण ने देरी से आवेदन आने से शासन से बजट नहीं आने पर उसे निस्तारित कर दिया। लोक अदालत में पहुंची महिला आयोग की सदस्या गजला जबीं ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा तभी जाकर उन्हें इंसाफ मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया जाना चाहिए। इस मौके पर बीडीओ मुनेश त्यागी, एडीओ समाज कल्याण सोमप्रकाश, एडीओ पंचायत सुखवीर सिंह चौहान, सीपीओ जुलेखा, उद्यान अधिकारी ठाकुर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, विनोद कुमार, सत्य विकास आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरकार के आदेश पर बृहस्पतिवार को ब्लॉक सभागार रुड़की में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से महिला लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत का मकसद महिलाओं की समस्याओं का समाधान करना था। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए वैसे तो गांव दर गांव पूरा प्रचार-प्रसार किया जाना जरूरी था, लेकिन जिस विभाग को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी, उसने कोई प्रचार-प्रसार करने की बजाए अपने विभाग की आंगनबाड़ियों को बुलाकर लोक अदालत लगवा दी जिसका परिणाम यह रहा कि किसी भी महिला को इसकी कोई जानकारी न होने से अदालत में मात्र एक शिकायत आई, वह भी अर्चना नाम की युवती ने गौरा देवी कन्या धन योजना की सहायता राशि नहीं मिलने की समस्या रखी जिस पर एडीओ समाज कल्याण ने देरी से आवेदन आने से शासन से बजट नहीं आने पर उसे निस्तारित कर दिया। लोक अदालत में पहुंची महिला आयोग की सदस्या गजला जबीं ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा तभी जाकर उन्हें इंसाफ मिल सकेगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया जाना चाहिए। इस मौके पर बीडीओ मुनेश त्यागी, एडीओ समाज कल्याण सोमप्रकाश, एडीओ पंचायत सुखवीर सिंह चौहान, सीपीओ जुलेखा, उद्यान अधिकारी ठाकुर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, विनोद कुमार, सत्य विकास आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन