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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Haridwar Maha Kumbh Mela 2021 News: Ganga Water testing Will be Done Every Day

Kumbh Mela 2021: कुंभ में हर दिन जांचा जाएगा गंगा का पानी नहाने और आचमन योग्य है या नहीं

Sun, 20 Dec 2020 06:31 PM IST
देहरादून ब्यूरो अंकित कुमार गर्ग, अमर उजाला, रुड़की
अंकित कुमार गर्ग, अमर उजाला, रुड़की Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Sun, 20 Dec 2020 06:31 PM IST
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Haridwar Maha Kumbh Mela 2021 News: Ganga Water testing Will be Done Every Day
महा कुंभ मेला 2021 - फोटो : अमर उजाला

कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को हर दिन इस बात की जानकारी मिलेगी कि गंगा का जल नहाने और आचमन लायक है या नहीं है। अभी तक जांच शेड्यूल के लिए केंद्र की गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा था। अब इसको लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से प्रदूषण बोर्ड मुख्यालय देहरादून को दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके तहत कुंभ में गंगा के जल की प्रतिदिन मॉनिटरिंग की जाएगी। साथ ही प्रत्येक दिन का डाटा केंद्र सरकार को भी भेजा जाएगा।

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वैसे तो गंगा के उद्गम स्थल गोमुख से निकलने वाली गंगा सबसे पहले हरिद्वार ही पहुंचती है। ऐसे में गंगा का जल नहाने और आचमन के लिहाज से शुद्ध ही रहता है, लेकिन जब से गंगा में आश्रमों और होटलों का सीवर गिरने लगा तब से गंगा के जल में अशुद्धि का स्तर भी बढ़ने लगा है। प्रयागराज और बनारस तक जाते-जाते जल में अशुद्धि की मात्रा और भी बढ़ जाती है। ऐसे में कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को नहाने और आचमन करने के लिए मानकों के अनुरूप जल मिल रहा है या नहीं, इसकी जानकारी देना जरूरी हो जाता है।
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इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार प्रत्येक कुंभ पर जल की मॉनिटरिंग करने के लिए गाइडलाइन जारी करती है। हरिद्वार में मकर संक्रांति से प्रारंभ हो रहे कुंभ के लिए भी गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा था। अब जो गाइडलाइन लाइन आई है, उसके अनुसार 14 जनवरी से प्रत्येक दिन गंगा के जल की गुणवत्ता की जांच होगी। रुड़की स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र कुमार ने बताया कि हरिद्वार में गंगा में फैक्टरियों का प्रदूषित पानी उतना नहीं मिलता है जितना अन्य कुंभ क्षेत्र में मिलता है। साथ ही हरिद्वार जिले में रेड श्रेणी की फैक्टरियां भी न के बराबर है। ऐसे में हरिद्वार में पानी की खराब गुणवत्ता का मामला उतना बड़ा नहीं है। 

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नहाने के साथ आचमन भी है आस्था का विषय 

भले ही प्रदूषण के बावजूद गंगा के जल का आचमन आस्था का विषय हो, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पानी में टोटल कोलीफोर्म बैक्टीरिया की मात्रा से ही यह तय होता है कि पानी पीने लायक है या नहीं। करीब दो माह पूर्व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जो आंकड़े जारी किए गए हैं, उसके अनुसार हरिद्वार में गंगा का जल बी श्रेणी का है।

इसके मायने हैं कि गंगा का जल नहाने लायक है, लेकिन आचमन करने जितना शुद्ध नहीं है। हालांकि सी श्रेणी का जल न नहाने लायक होता है और न ही पीने लायक। अब देखना यह होगा कि कुंभ के दौरान हर रोज होने वाली जांच में गंगा के जल की श्रेणी क्या रहती है। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से दिशा निर्देश जारी हो गए हैं। कुंभ के प्रारंभ होने पर हरिद्वार में गंगा के जल की गुणवत्ता की प्रतिदिन मॉनिटरिंग होगी। प्रतिदिन यह डाटा जारी किया जाएगा। 
- एसपी सुबुद्धि, सदस्य सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुख्यालय देहरादून

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