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Roorkee News: मांगें पूरी नहीं हुईं तो करेंगे सचिवालय कूच
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बिजली कटौती, ऊर्जा निगम की मनमानी और तहसील व चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन रोड़ के बैनर तले किसानों ने प्रदर्शन किया। किसान पैदल मार्च निकालते हुए पांच किलोमीटर की दूरी तय कर तहसील पहुंचे। यहां अपने साथ लाए तिरपाल बिछाकर धरने पर बैठ गए। उन्होंने व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ज्ञापन सौंपा। मांगें पूरी न होने पर किसानों और ट्रैक्टरों के साथ सचिवालय कूच करने का एलान किया।
भारतीय किसान यूनियन रोड़ के प्रदेश अध्यक्ष पदम सिंह रोड़ के नेतृत्व में विभिन्न मांगों लेकर बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने पैदल मार्च निकाला। पहले कार्यकर्ता गंगनहर किनारा स्थित प्रशासनिक भवन पर एकत्र हुए। यहां किसानों को संबोधित करते हुए पदम सिंह रोड़ ने कहा कि सरकार और अधिकारी सुनियोजित तरीके से किसानों का शोषण कर रहे हैं। किसानाें की परीक्षा लेने वाली कोई भी सरकार ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल सकती।
उन्होंने कहा कि बिजली, चकबंदी और तहसील प्रशासन के अधिकारी किसानों का शोषण कर रहे हैं। चकबंदी में करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार किया गया है। इसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। कई आश्वासनों के बाद भी न जांच हुई और न ही अधिकारी बदले गए। इसी तरह तहसील में भ्रष्टाचार के चलते हर काम में किसानों से पैसे वसूले जाते हैं।
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ऊर्जा निगम महज पांच हजार का बकाया होने पर किसानों के कनेक्शन काट देता है। गांवों में भारी बिजली कटौती की जा रही है। फुंके ट्रांसफार्मर नहीं बदले जाते, लाइनें जर्जर पड़ी हैं। ऊर्जा निगम किसानाें पर मुकदमें दर्ज करा रहा है। इसके बाद शुरू हुआ पैदल मार्च प्रशासनिक भवन से बोट क्लब, सिविल लाइंस और रोडवेज होता हुआ तहसील पहुंचा। यहां किसानों ने धरना दिया और सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजीव कुशवाह ने कहा कि किसानों का शोषण किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पैदल मार्च केवल चेतावनी है। मांगें पूरी नहीं हुई तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष पदम रोड़ ने जरूरत पड़ने पर ट्रैक्टर के जरिए सचिवालय कूच कर घेराव करने की चेतावनी दी। इसके बाद किसानों ने एसडीएम लक्ष्मीराज चौहान को मांग पत्र सौंपा। उन्होंने सभी समस्याओं का संबंधित विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर समाधान कराने का आश्वासन दिया। इस मौके पर युवा विंग क प्रदेश अध्यक्ष सचिन टोडा, जिलाध्यक्ष नाजिम अली, मुबारिक अली, प्रदीप त्यागी, रामदास, भुल्लन, जावेद एवं इंदर सिंह आदि माैजूद रहे।
गीतों के जरिए प्रस्तुत की किसानों की व्यथा
धरनास्थल पर किसानों ने रागिनी और गीतों के माध्यम से किसानों की व्यवस्था बताई। किसानाें के गीतों में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मेहनत की फसल का उचित दाम नहीं देने का दर्द छलका। इस दौरान किसानों ने ताली बजाकर स्वागत किया। विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने अपनी बात रखी।
ये रहीं प्रमुख मांगें-
- टोडा कल्याणपुर में जाने वाले मार्ग को सेना द्वारा प्रत्येक शुक्रवार में रोका जाता है, इसे खोला जाए।
- इकबालपुर शुगर मिल पर किसानों का बकाया दिलवाया जाए।
- चकबंदी अधिकारियों द्वारा किसानों का उत्पीड़न बंद हो और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई कर तबादला करें।
- ऊर्जा निगम की मनमानी रोकी जाए, कम बकाया पर कनेक्शन न काटे, बिजली कटौती बंद हो।
- एनएचएआई द्वारा बंद किए गए खेतों पर जाने वाले रास्ते खोले जाएं, हाईवे पर अंडरपास की सुविधा दें।
- खाद्य विभाग द्वारा गरीब किसानों के राशन कार्ड बनवाए जाएं।
- खेतों एवं अन्य स्थानों पर जाने वाले किसानों पर आरटीओ द्वारा चालान की कार्रवाई बंद की जाए।
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भारतीय किसान यूनियन रोड़ के प्रदेश अध्यक्ष पदम सिंह रोड़ के नेतृत्व में विभिन्न मांगों लेकर बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने पैदल मार्च निकाला। पहले कार्यकर्ता गंगनहर किनारा स्थित प्रशासनिक भवन पर एकत्र हुए। यहां किसानों को संबोधित करते हुए पदम सिंह रोड़ ने कहा कि सरकार और अधिकारी सुनियोजित तरीके से किसानों का शोषण कर रहे हैं। किसानाें की परीक्षा लेने वाली कोई भी सरकार ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल सकती।
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उन्होंने कहा कि बिजली, चकबंदी और तहसील प्रशासन के अधिकारी किसानों का शोषण कर रहे हैं। चकबंदी में करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार किया गया है। इसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। कई आश्वासनों के बाद भी न जांच हुई और न ही अधिकारी बदले गए। इसी तरह तहसील में भ्रष्टाचार के चलते हर काम में किसानों से पैसे वसूले जाते हैं।
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ऊर्जा निगम महज पांच हजार का बकाया होने पर किसानों के कनेक्शन काट देता है। गांवों में भारी बिजली कटौती की जा रही है। फुंके ट्रांसफार्मर नहीं बदले जाते, लाइनें जर्जर पड़ी हैं। ऊर्जा निगम किसानाें पर मुकदमें दर्ज करा रहा है। इसके बाद शुरू हुआ पैदल मार्च प्रशासनिक भवन से बोट क्लब, सिविल लाइंस और रोडवेज होता हुआ तहसील पहुंचा। यहां किसानों ने धरना दिया और सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजीव कुशवाह ने कहा कि किसानों का शोषण किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पैदल मार्च केवल चेतावनी है। मांगें पूरी नहीं हुई तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष पदम रोड़ ने जरूरत पड़ने पर ट्रैक्टर के जरिए सचिवालय कूच कर घेराव करने की चेतावनी दी। इसके बाद किसानों ने एसडीएम लक्ष्मीराज चौहान को मांग पत्र सौंपा। उन्होंने सभी समस्याओं का संबंधित विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर समाधान कराने का आश्वासन दिया। इस मौके पर युवा विंग क प्रदेश अध्यक्ष सचिन टोडा, जिलाध्यक्ष नाजिम अली, मुबारिक अली, प्रदीप त्यागी, रामदास, भुल्लन, जावेद एवं इंदर सिंह आदि माैजूद रहे।
गीतों के जरिए प्रस्तुत की किसानों की व्यथा
धरनास्थल पर किसानों ने रागिनी और गीतों के माध्यम से किसानों की व्यवस्था बताई। किसानाें के गीतों में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मेहनत की फसल का उचित दाम नहीं देने का दर्द छलका। इस दौरान किसानों ने ताली बजाकर स्वागत किया। विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने अपनी बात रखी।
ये रहीं प्रमुख मांगें-
- टोडा कल्याणपुर में जाने वाले मार्ग को सेना द्वारा प्रत्येक शुक्रवार में रोका जाता है, इसे खोला जाए।
- इकबालपुर शुगर मिल पर किसानों का बकाया दिलवाया जाए।
- चकबंदी अधिकारियों द्वारा किसानों का उत्पीड़न बंद हो और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई कर तबादला करें।
- ऊर्जा निगम की मनमानी रोकी जाए, कम बकाया पर कनेक्शन न काटे, बिजली कटौती बंद हो।
- एनएचएआई द्वारा बंद किए गए खेतों पर जाने वाले रास्ते खोले जाएं, हाईवे पर अंडरपास की सुविधा दें।
- खाद्य विभाग द्वारा गरीब किसानों के राशन कार्ड बनवाए जाएं।
- खेतों एवं अन्य स्थानों पर जाने वाले किसानों पर आरटीओ द्वारा चालान की कार्रवाई बंद की जाए।