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चकबंदी को गलत बताकर ग्रामीणों ने किया हंगामा
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रुड़की स्थित बेलडा गांव में चकबंदी विभाग द्वारा की जा रही पैमाइश के दौरान मौजूद पुलिस।
- फोटो : ROORKEE
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बेलडा गांव में पैमाइश करने पहुंची चकबंदी विभाग की टीम का ग्रामीणों ने विरोध कर हंगामा कर दिया। ग्रामीणों ने चकबंदी को गलत करार देते हुए विरोध दर्ज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दो साल पहले चकबंदी विभाग ने पैमाइश कर बस्ते जमा कर दिए थे। अब दोबारा तहसील की टीम की मौजूदगी में जांच होनी चाहिए। आरोप था कि जो अधिकारी पैमाइश करने पहुंचे हैं, उनमें से कुछ पर मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि मौके पर जमा पुलिस फोर्स के चलते पैमाइश जारी रही।
बुधवार को रुड़की तहसील के बेलडा गांव में चकबंदी विभाग की टीम पैमाइश करने पहुंची। अधिकारियों ने एक पक्ष की मौजूदगी में पैमाइश शुरू की। सूचना मिलते ही दूसरा पक्ष भी मौके पर पहुंच गया। वहां उसने पैमाइश को गलत ठहराते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि गांव में करीब दो साल पहले चकबंदी विभाग ने पैमाइश कर बस्ते तहसील में जमा कर दिए थे। ऐसे में अब दो साल बाद दोबारा पैमाइश करने का कोई औचित्य नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चकबंदी विभाग के अधिकारी गांव के कुछ दबंगों के दबाव में पैमाइश गलत तरीके से कर रहे हैं। वहीं टीम में कुछ ऐसे अधिकारी भी मौजूद हैं जिनपर भूमि घोटाले के मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने मांग उठाई कि पैमाइश यदि करनी है तो प्रशासन की टीम की मौजूदगी में होनी चाहिए। वहीं इस दौरान दूसरा पक्ष पैमाइश को सही ठहराते हुए पहले पक्ष के सामने आ गया। इससे दोनों पक्षों में नोकझोंक शुरू हो गई। इसी बीच मामला बढ़ते देख पुलिस फोर्स को बीच में आना पड़ा। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया। मामले में चकबंदी विभाग के कानूनगो बंगाल सिंह का कहना है कि पैमाइश तहसील और चकबंदी विभाग की संयुक्त टीम की ओर से की जा रही है। दो साल पहले पैमाइश में जो हिस्सा छूट गया था अब दोबारा उसी हिस्से की पैमाइश की जा रही है।
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बुधवार को रुड़की तहसील के बेलडा गांव में चकबंदी विभाग की टीम पैमाइश करने पहुंची। अधिकारियों ने एक पक्ष की मौजूदगी में पैमाइश शुरू की। सूचना मिलते ही दूसरा पक्ष भी मौके पर पहुंच गया। वहां उसने पैमाइश को गलत ठहराते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि गांव में करीब दो साल पहले चकबंदी विभाग ने पैमाइश कर बस्ते तहसील में जमा कर दिए थे। ऐसे में अब दो साल बाद दोबारा पैमाइश करने का कोई औचित्य नहीं है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि चकबंदी विभाग के अधिकारी गांव के कुछ दबंगों के दबाव में पैमाइश गलत तरीके से कर रहे हैं। वहीं टीम में कुछ ऐसे अधिकारी भी मौजूद हैं जिनपर भूमि घोटाले के मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने मांग उठाई कि पैमाइश यदि करनी है तो प्रशासन की टीम की मौजूदगी में होनी चाहिए। वहीं इस दौरान दूसरा पक्ष पैमाइश को सही ठहराते हुए पहले पक्ष के सामने आ गया। इससे दोनों पक्षों में नोकझोंक शुरू हो गई। इसी बीच मामला बढ़ते देख पुलिस फोर्स को बीच में आना पड़ा। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया। मामले में चकबंदी विभाग के कानूनगो बंगाल सिंह का कहना है कि पैमाइश तहसील और चकबंदी विभाग की संयुक्त टीम की ओर से की जा रही है। दो साल पहले पैमाइश में जो हिस्सा छूट गया था अब दोबारा उसी हिस्से की पैमाइश की जा रही है।
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