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Roorkee News: जिले में शुरू हुआ लंपी रोग के खिलाफ वैक्सीनेशन अभियान
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जिले में एक बार फिर लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का खतरा बढ़ने लगा है। गोवंश को इस संक्रामक बीमारी से बचाने के लिए पशु चिकित्सा विभाग ने 20 जून से व्यापक वैक्सीनेशन अभियान शुरू कर दिया है। विभाग का कहना है कि समय रहते रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
पशु चिकित्सा विभाग के अनुसार 2023 में प्रदेशभर में लंपी संक्रमण ने बड़े स्तर पर गोवंश को प्रभावित किया था। जिले में भी स्थिति गंभीर रही थी और करीब 219 गोवंश की मौत हो गई थी जबकि दो लाख से अधिक पशु संक्रमण की चपेट में आए थे। हाल के दिनों में माधोपुर, गुम्मावाला और इमलीखेड़ा क्षेत्र में 10 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं।
इससे पहले मार्च माह में धनौरी, धनौरा और पिरान कलियर क्षेत्र में भी लंपी रोग से प्रभावित कुछ मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। पशु चिकित्सक डॉ. रोहित के अनुसार इमलीखेड़ा क्षेत्र में अब तक 750 गोवंश का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। इससे पहले जिले में लगभग छह हजार पशुओं को टीके लगाए जा चुके हैं और वर्तमान में दो हजार अतिरिक्त गोवंश के टीकाकरण का कार्य जारी है।
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विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि मक्खी-मच्छर इस बीमारी के प्रसार का प्रमुख माध्यम है। इसके अलावा राजस्थान से आने वाले संक्रमित पशुओं के कारण भी संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। पशुपालकों से अपील की गई है कि वे बीमार पशुओं को अलग रखें और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सकों से संपर्क करें।
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पशु चिकित्सा विभाग के अनुसार 2023 में प्रदेशभर में लंपी संक्रमण ने बड़े स्तर पर गोवंश को प्रभावित किया था। जिले में भी स्थिति गंभीर रही थी और करीब 219 गोवंश की मौत हो गई थी जबकि दो लाख से अधिक पशु संक्रमण की चपेट में आए थे। हाल के दिनों में माधोपुर, गुम्मावाला और इमलीखेड़ा क्षेत्र में 10 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं।
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इससे पहले मार्च माह में धनौरी, धनौरा और पिरान कलियर क्षेत्र में भी लंपी रोग से प्रभावित कुछ मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। पशु चिकित्सक डॉ. रोहित के अनुसार इमलीखेड़ा क्षेत्र में अब तक 750 गोवंश का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। इससे पहले जिले में लगभग छह हजार पशुओं को टीके लगाए जा चुके हैं और वर्तमान में दो हजार अतिरिक्त गोवंश के टीकाकरण का कार्य जारी है।
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विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि मक्खी-मच्छर इस बीमारी के प्रसार का प्रमुख माध्यम है। इसके अलावा राजस्थान से आने वाले संक्रमित पशुओं के कारण भी संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। पशुपालकों से अपील की गई है कि वे बीमार पशुओं को अलग रखें और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सकों से संपर्क करें।