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Roorkee News: उत्तराखंड की तीन बिजली कंपनियों पर भ्रष्टाचार के आरोप
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उत्तराखंड की तीन प्रमुख बिजली कंपनियों पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड, उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड और उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और प्रबंध निदेशकों की चयन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री को शिकायत भेजी गई है।
शिकायतकर्ता कांग्रेस नेता सरस्वती विहार रुड़की निवासी आशीष सैनी ने पूरे मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग उठाई है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पिछले कुछ वर्षों में इन कंपनियों में उच्च पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और विभागीय अधिरियों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ।
आरोप है कि बिजली परियोजनाओं, उपकेंद्रों, उपकरण खरीद और निर्माण कार्यों में लागत से अधिक भुगतान कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि कई परियोजनाओं में तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई और विदेशी कंपनियों के साथ हुए अनुबंधों में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
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विशेष रूप से गैस इंसुलेटेड सब-स्टेशन (जीआईएस) परियोजनाओं में भारी वित्तीय नुकसान का आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया कि कुछ परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं जबकि करोड़ों रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। इन वित्तीय अनियमितताओं का भार आम बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़े हुए बिजली बिल, स्थायी शुल्क और अन्य शुल्कों के रूप में डाला जा रहा है। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच उच्च न्यायिक निगरानी में कराए जाने की मांग की है।
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शिकायतकर्ता कांग्रेस नेता सरस्वती विहार रुड़की निवासी आशीष सैनी ने पूरे मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग उठाई है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पिछले कुछ वर्षों में इन कंपनियों में उच्च पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और विभागीय अधिरियों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ।
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आरोप है कि बिजली परियोजनाओं, उपकेंद्रों, उपकरण खरीद और निर्माण कार्यों में लागत से अधिक भुगतान कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि कई परियोजनाओं में तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई और विदेशी कंपनियों के साथ हुए अनुबंधों में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
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विशेष रूप से गैस इंसुलेटेड सब-स्टेशन (जीआईएस) परियोजनाओं में भारी वित्तीय नुकसान का आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया कि कुछ परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं जबकि करोड़ों रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। इन वित्तीय अनियमितताओं का भार आम बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़े हुए बिजली बिल, स्थायी शुल्क और अन्य शुल्कों के रूप में डाला जा रहा है। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच उच्च न्यायिक निगरानी में कराए जाने की मांग की है।