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ऊर्जा निगम में भटकते रहे फरियादी, नहीं मिले अधिकारी
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उत्तराखंड विद्युत कर्मचारी-अधिकारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की टूल डाउन और कलम बंद हड़ताल के चलते फरियादी ऊर्जा निगम के कार्यालय में भटकते रहे, लेकिन उन्हें वहां न कोई अधिकारी मिला और न ही कर्मचारी। संघर्ष मोर्चा और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद के चलते उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है।
बुधवार को लगातार दूसरे दिन संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले अधिकारियों और कर्मचारियों ने विद्युत वितरण खंड कार्यालय परिसर में टूल डाउन, कलम बंद हड़ताल करने के बाद धरना दिया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि ऊर्जा निगम के कार्मिकों को छठे वेतनमान में मिलने वाली एसीपी की पुरानी व्यवस्था यथावत दी जाए। सातवें वेतन आयोग में उनकी पुरानी चली आ रही एसीपी व्यवस्था समाप्त कर दी गई। वहीं, हड़ताल के चलते ऊर्जा निगम कार्यालय पहुंचे फरियादी दिनभर भटकते रहे। कार्यालय में बिल जमा करने से लेकर शिकायत दर्ज करने और कनेक्शन प्रक्रिया आगे बढ़ाने जैसे काम नहीं हो पाए। जिन लोगों के बिल ज्यादा आ रहे हैं या मीटर गलत रीडिंग दे रहे उन्हें भी ठीक नहीं किया गया।
सुबह सलेमपुर से कार्यालय पहुंचे सुरेश धीमान, चाव मंडी से महेश सहगल, आदर्श नगर से सुदेशना रावत व पिंकी रानी, कलियर से मेहताब आदि का कहना है कि एक दिन पहले भी कर्मचारियों ने हड़ताल की बात कहकर लौटा दिया था। फिर हड़ताल के चलते उनके काम नहीं हो पाए हैं। उनका बिल ज्यादा आ रहा है, उसे ठीक कराना था। अब दोबारा कार्यालय पहुंचना पड़ेगा। मामले में उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के महामंत्री दीपक शांडिल्य का कहना है कि उन्होंने पहले ही शासन को चेताया था कि हड़ताल से आमजन को परेशानी होगी, लेकिन शासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी की पूरी जिम्मेदारी शासन की है।
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बुधवार को लगातार दूसरे दिन संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले अधिकारियों और कर्मचारियों ने विद्युत वितरण खंड कार्यालय परिसर में टूल डाउन, कलम बंद हड़ताल करने के बाद धरना दिया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि ऊर्जा निगम के कार्मिकों को छठे वेतनमान में मिलने वाली एसीपी की पुरानी व्यवस्था यथावत दी जाए। सातवें वेतन आयोग में उनकी पुरानी चली आ रही एसीपी व्यवस्था समाप्त कर दी गई। वहीं, हड़ताल के चलते ऊर्जा निगम कार्यालय पहुंचे फरियादी दिनभर भटकते रहे। कार्यालय में बिल जमा करने से लेकर शिकायत दर्ज करने और कनेक्शन प्रक्रिया आगे बढ़ाने जैसे काम नहीं हो पाए। जिन लोगों के बिल ज्यादा आ रहे हैं या मीटर गलत रीडिंग दे रहे उन्हें भी ठीक नहीं किया गया।
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सुबह सलेमपुर से कार्यालय पहुंचे सुरेश धीमान, चाव मंडी से महेश सहगल, आदर्श नगर से सुदेशना रावत व पिंकी रानी, कलियर से मेहताब आदि का कहना है कि एक दिन पहले भी कर्मचारियों ने हड़ताल की बात कहकर लौटा दिया था। फिर हड़ताल के चलते उनके काम नहीं हो पाए हैं। उनका बिल ज्यादा आ रहा है, उसे ठीक कराना था। अब दोबारा कार्यालय पहुंचना पड़ेगा। मामले में उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के महामंत्री दीपक शांडिल्य का कहना है कि उन्होंने पहले ही शासन को चेताया था कि हड़ताल से आमजन को परेशानी होगी, लेकिन शासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी की पूरी जिम्मेदारी शासन की है।
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