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जांच को लंढौरा पहुंची टीम, बंद मिला नर्सिंग होम
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डिलीवरी के दौरान नवजात के शरीर से हाथ अलग होने के मामले की जांच के लिए एसीएमओ स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ नर्सिंग होम पहुंचे, लेकिन नर्सिंग होम बंद मिला। एसीएमओ ने महिला डॉक्टर और बच्चे के पिता से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दोनों के नंबर भी बंद मिले। इसके बाद टीम बैरंग लौट गई।
मोहल्ला बाहर किला निवासी अफजाल की पत्नी की डिलीवरी होनी थी। परिजन गर्भवती को गाधारोना रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में ले गए। यहां पता चला कि महिला के पेट में जुड़वां बच्चे हैं। डिलीवरी के दौरान महिला ने पहले एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया था। आरोप था कि महिला डॉक्टर ने दूसरे बच्चे की डिलीवरी के दौरान बड़ी लापरवाही बरती थी। इसके चलते नवजात का हाथ शरीर से अलग हो गया था। यह बात डॉक्टर ने परिजनों से छिपा ली और महिला की हालत बिगड़ने पर उसे दूसरे अस्पताल में ले जाने को सलाह दी थी। परिजन महिला को रुड़की के एक निजी अस्पताल में ले गए थे। यहां ऑपरेशन के दौरान बच्चा मृत मिला था।
नवजात का एक हाथ भी गायब था, जिसे देख सब हैरत में पड़ गए थे। महिला के परिजनों ने महिला डॉक्टर से जानकारी ली तो पता चला था कि लापरवाही से हाथ अलग हो गया था। महिला डॉक्टर ने अपनी गलती भी स्वीकार की थी। परिजनों ने हंगामा करते हुए पुलिस को तहरीर दी थी। इस मामले में सोमवार को एसीएमओ विवेक तिवारी स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ लंढौरा स्थित नर्सिंग होम पहुंचे तो वह बंद था। एसीएमओ ने बताया कि महिला डॉक्टर से फोन पर संपर्क किया, लेकिन नंबर मिला। बच्चे के पिता का नंबर भी बंद मिला। इसलिए जांच नहीं हो पाई। टीम में गब्बर सिंह रावत, मनोज चौहान, वीरेंद्र, डॉ. संतोष, राजेश राठी, अनिल, रणधीर मौजूद थे।
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मोहल्ला बाहर किला निवासी अफजाल की पत्नी की डिलीवरी होनी थी। परिजन गर्भवती को गाधारोना रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में ले गए। यहां पता चला कि महिला के पेट में जुड़वां बच्चे हैं। डिलीवरी के दौरान महिला ने पहले एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया था। आरोप था कि महिला डॉक्टर ने दूसरे बच्चे की डिलीवरी के दौरान बड़ी लापरवाही बरती थी। इसके चलते नवजात का हाथ शरीर से अलग हो गया था। यह बात डॉक्टर ने परिजनों से छिपा ली और महिला की हालत बिगड़ने पर उसे दूसरे अस्पताल में ले जाने को सलाह दी थी। परिजन महिला को रुड़की के एक निजी अस्पताल में ले गए थे। यहां ऑपरेशन के दौरान बच्चा मृत मिला था।
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नवजात का एक हाथ भी गायब था, जिसे देख सब हैरत में पड़ गए थे। महिला के परिजनों ने महिला डॉक्टर से जानकारी ली तो पता चला था कि लापरवाही से हाथ अलग हो गया था। महिला डॉक्टर ने अपनी गलती भी स्वीकार की थी। परिजनों ने हंगामा करते हुए पुलिस को तहरीर दी थी। इस मामले में सोमवार को एसीएमओ विवेक तिवारी स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ लंढौरा स्थित नर्सिंग होम पहुंचे तो वह बंद था। एसीएमओ ने बताया कि महिला डॉक्टर से फोन पर संपर्क किया, लेकिन नंबर मिला। बच्चे के पिता का नंबर भी बंद मिला। इसलिए जांच नहीं हो पाई। टीम में गब्बर सिंह रावत, मनोज चौहान, वीरेंद्र, डॉ. संतोष, राजेश राठी, अनिल, रणधीर मौजूद थे।
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