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रामायण के आदर्श पात्रों से जीवन में लेनी चाहिए प्रेरणा

Thu, 07 Oct 2021 12:00 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 12:00 AM IST
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'Take inspiration in life from the ideal characters of Ramayana'
रुड़की स्थित आदर्श नगर में देवभूमी आदर्श सोसायटी द्वारा आयोजित डिजिटल रामलीला के शुभारंभ पर विच - फोटो : ROORKEE
देवभूमि आदर्श सोसायटी की ओर से चतुर्थ डिजिटल रामलीला का का शुभारंभ किया गया। मंगलवार रात आदर्शनगर में विधायक प्रदीप बत्रा, मेयर गौरव गोयल, व्यापार मंडल के अध्यक्ष अरविंद कश्यप, सुशील त्यागी, रमेश जोशी, विरेंद्र गुप्ता और सोसायटी अध्यक्ष सचिन काश्यप ने रामलीला का शुभारंभ किया।
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इस मौके पर विधायक प्रदीप बत्रा ने कहा के सोसायटी बहुत पुण्य का कार्य कर रही है। भारत की परंपरा और संस्कृति को ऐसे ही आगे बढ़ाने का काम करना चाहिए। मेयर गौरव गोयल ने कहा समाज के लोगों को रामायण के आदर्श पात्रों से जीवन में प्रेरणा लेनी चाहिए। अरविंद कश्यप ने कहा कि भगवान श्रीराम की कृपा से कोरोना काल धीरे-धीरे समाप्ति की ओर है। इस दौरान राजकुमार शर्मा, विपिन सैनी, प्रदीप चौहान, निखिल वर्मा, कमल भाटी, तरुण कश्यप, आदित्य तोमर, आशीष कश्यप, विकास कश्यप, अंकित सिंगल आदि मौजूद रहे।
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रामलीला देख मंत्रमुग्ध हुए दर्शक
गढ़वाल सभा की ओर से आयोजित रामलीला के दूसरे दिन श्रवण लीला, शिव पार्वती संवाद, रावण की ओर से कैलाश पर्वत उठाने का प्रयास, दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ, श्रीराम जन्म, सीता जन्म का मंचन हुआ। मुख्य अतिथि अरुण नेगी, एमडी, फार्मा इंडस्ट्री भगवानपुर ने रिबन काटकर रामलीला की शुरुआत की। श्रवण का किरदार धीरेंद्र पसबोला, दशरथ का किरदार प्रेम गोदियाल, राजा दशरथ की तीनों रानियों का किरदार विजय सिंह रावत, नंद किशोर डोबरियाल, आशीष रावत, जनक का किरदार भारतेंदु ममगाईं, रावण का किरदार राम प्रकाश कोटनाला, शिव-पार्वती का किरदार दिगंबर ध्यानी और प्रदीप कोटनाला ने निभाया। मंच पर पात्रों का अभिनय देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। इस अवसर पर रुड़की गढ़वाल सभा के अध्यक्ष प्रेम सिंह रावत, संयोजक मोहनलाल बहुगुणा, निर्देशक टीआर भट्ट, सचिव चंद्रमोहन जोशी, विक्रम सिंह नेगी, कमला बमोला, राजेंद्र बिष्ट, महेंद्र रावत, मदन सिंह रावत मौजूद रहे।
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भगवान श्रीराम ने किया ताड़का वध
कस्बे में चल रही श्री रामलीला के पांचवें दिन के प्रसंग में भगवान श्रीराम ने ऋषि विश्वामित्र के साथ वन में जाकर ऋषियों के लिए अभिशाप बनी ताड़का राक्षसी का वध किया। इसके बाद देवताओं ने आसमान से श्रीराम के ऊपर पुष्प वर्षा की। ताड़का वध के साथ ही रामलीला मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

मंगलवार रात पांचवें प्रसंग में ऋषि विश्वामित्र अयोध्या जाकर राजा दशरथ से मिलते हैं और बताते हैं कि जब ऋषि-मुनि आश्रम में यज्ञ, अनुष्ठान या तपस्या करते हैं तो राक्षस उनके धार्मिक कार्यों में विघ्न डालते हैं। उनका कोई भी यज्ञ, अनुष्ठान और तपस्या पूर्ण नहीं हो पा रही है। वह राजा दशरथ से भगवान राम और लक्ष्मण को उनके साथ भेजने का आग्रह करते हैं ताकि श्रीराम और लक्ष्मण राक्षसों का वध कर सके। राजा दशरथ राम और लक्ष्मण को उनके जाने की आज्ञा देते हैं। आश्रम में जब ऋषि-मुनि अनुष्ठान करते हैं तो राक्षस वहां आकर उत्पात मचाना चाहते हैं, लेकिन उससे पहले ही भगवान श्रीराम धनुष पर बाण चढ़ाकर ताड़का का वध कर देते हैं। इसके बाद अन्य राक्षस भाग जाते हैं। ताड़का वध से ऋषि-मुनि राहत की सांस लेते हैं।
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