उत्तरांचल वेंडर्स एसोसिएशन ने नगर निगम की ओर से रेहड़ी ठेली वालों से वसूली जा रहे तहबाजारी शुल्क पर सवाल उठाए हैं। नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर राष्ट्रीय फेरी नीति के तहत सुविधाएं मिलने तक तहबाजारी पर रोक लगाने की मांग की गई है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि फेरी वालों से रोजाना करीब 25 हजार वसूले जा रहे हैं जबकि नगर निगम के कोष में मात्र तीन हजार रुपये जमा कराए जाते हैं। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की मांग की गई है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमित अग्रवाल के नेतृत्व में साजिद मलिक, बंटी रहमान, अकरम, अन्नू शर्मा, नसीम, शमीम, बब्बल, शाकिर एवं फैशल ने नगर आयुक्त विजनाथ शुक्ला को ज्ञापन सौंपकर बताया कि पूरे उत्तराखंड में 2016 में फेरी नियमावली लागू हो चुकी है। इसके अंतर्गत रेहड़ी पटरी और फेरी वालों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करना उस जगह के नगर निकाय का कार्य है। उसके बाद से निगम द्वारा शुल्क लिया जाना वैध है लेकिन तहबाजारी के नाम पर वसूला जा रहे शुल्क की ज्यादातर रेहड़ी वालों को रसीद नहीं दी जाती। 2017 के सर्वे में 2000 से अधिक वेंडर्स चिह्नित किए गए थे। वर्तमान में वास्तविक 3000 से अधिक वेंडर्स है। इनसे निगम द्वारा तहबाजारी के नाम पर करीब 25 हजार तक की वसूली की जा रही है और निगम कोष में मात्र रोजाना तीन हजार रुपये जमा किए जा रहे हैं। वहीं रुड़की के अलावा किसी भी अन्य निगम में तहबाजारी नहीं वसूली जा रही है। ज्ञापन में कहा गया है कि वेंडरों केे नियमानुसार शुल्क देने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन फेरी नीति के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद ही शुल्क लिया जाना उचित है। ऐसे में तहबाजारी पर तत्काल रोक नहीं लगती तो रेहड़ी पटरी वाले लोग सड़क पर उतर कर आंदोलन करेंगे।