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जैसे अभी हुई है शहादत हुसैन की...

Thu, 13 Oct 2016 12:00 AM IST
ब्यूूराो/ अमर उजाला रुड़की
ब्यूूराो/ अमर उजाला रुड़की Updated Thu, 13 Oct 2016 12:00 AM IST
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Shahadat Hossain was just like ...
माोहरम में ‌‌निकाले जुलूस में मातम करते साोगवार। - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो

रुड़की। इस तरह से आज भी मातम हुसैन का, जैसे अभी हुई है शहादत हुसैन की...। आशूरा मोहर्रम के जुलूस में मातमदारों ने जंजीरों का मातम और सीनाजनी कर खुद को लहूलुहान कर लिया। इससे पहले इमलीरोड इमामबाड़े में मजलिस के दौरान सोगवारों ने वाकयात-ए-कर्बला के दर्द को कुछ यूं बयां किया....हाय सकीना तू है मदीना, असगर-ए-नादान झूला-झूला। रुड़की के इमलीरोड स्थित इमामबाड़े से शुरू हुआ मोहर्रम का मातमी जुलूस मच्छी मोहल्ला, रामपुर चुंगी होते हुए गुलाबनगर पहुंचा और ताबूत दफन किया गया। इससे पहले इमलीरोड इमामबाड़े से ताबूत और अलम बरामद किए गए।

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1300 वर्ष पहले कर्बला के रेतीले मैदान में नहर-ए-फराद के किनारे 71 जानिसारों के साथ हजरत इमाम हुसैन ने राह-ए-इस्लाम शहादत दी थी। तब से हर वर्ष मोहर्रम में वाकयाते कर्बला को यादगार सोगवार मातम मनाते हैं और दस मोहर्रम को मातमी जुलूस निकालते हैं। इसके तहत बुधवार दस मोहर्रम को इमलीरोड इमामबाड़े से सोगवारों ने काले लिबास में मातमी जुलूस निकाला। सीनाजनी और नोहाख्वानी सुनकर ऐसा लगा मानो कल की बात है, जब हजरम इमाम हुसैन शहीद हुए हो। इमामबाड़ा से अलम (इस्लाम का झंडा और अब्बास की शहादत का प्रतीक), ताबूत (इमाम हुसैन की कब्र मुबारक) के साथ में सैकड़ों की संख्या में सोगवार जब निकले तो सभी की आंखों में गम के आंसू थे। जुलूस में छोटे बच्चे जहां नोहे पढ़ रहे थे वहीं युवा सीनाजनी और जंजीरों का मातम कर रहे थे। विभिन्न मार्गों से होते हुए जुलूस रामपुर चुंगी होते हुए गुलाबनगर पहुंचा जहां ताबूत दफन किया गया। इससे पहले तकरीर में बिजनौर से आए मौलाना नासिर ने फरमाया कि जिस प्रकार हजरत इमाम हुसैन ने इतनी बड़ी शहादत दी, लेकिन यजीद की हुकूमत को स्वीकार नहीं किया। इससे सबक लेकर हमें भी धर्म और सत्य की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। इससे पहले सुबह अलविदाई मजलिस हुई। उसमें मौलाना नासिर ने कर्बला का वाकया बयां किया। इस मौके पर वक्फ बोर्ड इमलीरोड इमामबाड़ा के अध्यक्ष सिराज मेहंदी, असद जैदी, दानिश, समीर रजा, राजा, शाह मेहंदी, आजाद, राशिद, आबिद आदि मौजूद रहे।
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शाम-ए-गरीबा की मजलिस
रुड़की। आशूरा मोहर्रम का जुलूस खत्म होने के बाद रात में शाम-ए-गरीबा की मजलिस हुई। इसमें भी मौलाना ने वाकयात-ए-कर्बला की दास्तां बयां की। उन्होंने फरमाया कि किस तरह हजरत इमाम हुसैन ने शहादत दी। नोहाख्वान ने कुछ इस तरह कर्बला की दास्तां बयां की...घबराएगी जैनब मर जाएगी जैनब, अब्बास कटे हाथों को देखकर। इस मौके पर बड़ी संख्या में सोगवार ने मातम मनाया।
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जुलजनाह और अलम बरामद
मंगलौर/लंढौरा। पठानपुरा स्थित बड़े इमामबाड़े में बुधवार को मोहर्रम की मजलिस हुई। इसमें वाकयाते कर्बला बयां किया गया। उसके बाद शबीहे जुलजनाह और अलम बरामद किए गए।
मंगलौर में मुख्य मातमी जुलूस पठानपुरा से शुरू होकर बाबुल मुराद होता हुआ बागाहे जैनबया पहुंचा। दरबार-ए-हुसैन से बरामद ताजिया जुलूस भी इसी जुलूस में शामिल हो गया। यहां से यह जुलूस लंढौरा रोड चुंगी नंबर तीन पर पहुंचा। जहां अजादारों ने जंजीर से मातम कर अपने शरीर लहूलुहान किया। बाद में यह जुलूस मोहल्ला टोली होता हुआ थाना बाईपास मार्ग स्थित करबला पहुुंचा। वहां से पुन: बड़े इमामबाड़े आकर संपन्न हुआ। बारगाहे बाबुल मुराद में मौलाना अजहर अब्बास नकवी बारगाहे जैनबया में मौलाना मुजतबा अली ने मजलिसों को खिताब फरमाया। जुलूस का संचालन इतरत हुसैन उर्फ हब्बू, अली मेहंदी, मजाहिर हुसैन, रजब अली और युसूफ हुसैन ने संयुक्त रूप से किया। जुलूस को लेकर पुलिस और प्रशासन भी मुस्तैद रहा। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक देहात प्रमेंद्र सिंह डोभाल, कोतवाल उत्तम सिंह जिमिवाल, एसएसआई नंद किशोर बचकोटी, शहर चौकी प्रभारी विजेंद्रर सिंह कुमाई, टीना रावत पुलिस व पीएसी के साथ मौजूद रहे। वहीं नगर के मोहल्ला बंदरटोल स्थित इमामबाड़े पर मौलाना मुस्तुफा हुसैन ने मजलिस को खिताब किया। यहां से एक मातमी जुलूस शुरू हुआ, जोकि हाईवे से होता हुआ इस्लामनगर स्थित करबला में संपन्न हुआ। जुलूस में याद हुसैन, जिंदा हसन, तसव्वूर हुसैन, अनीस अहमद आदि ने नोहा ख्वानी की।  


आग पर किया मातम
मंगलौर (ब्यूरो)। बीती रात स्थानीय मोहल्ला पठानपुरा स्थित बड़े इमामबाड़े पर अजुंमन गुलजारे हुसैनी के तत्वधान में अजादारों ने आग पर चल कर मातम किया। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश की। बाद में यहां से एक मातमी जुलूस निकाला गया। जो कि बाबुल मुराद, बारगाहे जैनबया होता हुआ दरबारे हुसैन पहुंच कर देर रात संपन्न हुआ। इस दौरान शबाब मेंहदी, वफा आबदी, नजर अब्बास, अली मेंहदी, दानिश जैदी आदि मौजूद रहे।

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