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Roorkee News: नोएडा के वैज्ञानिक जांच रहे हरिद्वार की मिट्टी की सेहत
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भारतीय मृदा एवं भूउपयोग सर्वेक्षण की टीम ने झबरेड़ा क्षेत्र की मिट्टी की उपयोगिता की जांच के लिए खेतों से मिट्टी के नमूने लिए। मिट्टी की जांच के बाद पता चलेगा कि इस क्षेत्र की जमीन में कौन-कौन सी अन्य फसलें उगाई जा सकती हैं और कौन कौन सा उर्वरक जरूरी है और कौन सा नहीं। इससे किसानों का खर्च बचेगा ओर उत्पादन बढ़ जाएगा।
हरिद्वार जिले में नोएडा से सर्वे के लिए एक टीम आई हुई है। यह टीम पिछले तीन दिनों से झबरेड़ा क्षेत्र के अलग अलग स्थानों से मिट्टी के नमूने ले रही है। नमूनों की जांच के बाद मिट्टी में उर्वरक की जरूरत का पता चल जाएगा। इसका किसानों को बहुत लाभ मिलेगा।
सहायक फील्ड ऑफिसर डॉक्टर शंकर राम ने बताया कि भारत की आजादी के बाद पहली बार हरिद्वार जिले की मिट्टी की उपयोगिता का परीक्षण करने के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत मिट्टी के नमूने लिए गए हैं। इसमें एक मीटर से ज्यादा गहरे तक ड्रिल कर मिट्टी की परतों की जांच परख की जाएगी।
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नमूनों की जांच के बाद मिट्टी की गुणवत्ता व उपयोगिता की जानकारी मिल जाएगी। सहायक फील्ड ऑफिसर जितेंद्र मौर्य ने बताया कि नमूनों की जांच में मिट्टी की पोषक, खनिज व कठोरता की स्थिति का पता चलता है। इससे क्षेत्र में अन्य संभावित फसलों को उगाने के अवसर भी मिलते हैं। उपग्रह से प्राप्त नक्शे की मदद से मिट्टी की विभिन्नता को देखा परखा जा रहा है। परीक्षण का मुख्य उद्देश्य विभिन्न प्रकार की मृदा की पहचान करना है।
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हरिद्वार जिले में नोएडा से सर्वे के लिए एक टीम आई हुई है। यह टीम पिछले तीन दिनों से झबरेड़ा क्षेत्र के अलग अलग स्थानों से मिट्टी के नमूने ले रही है। नमूनों की जांच के बाद मिट्टी में उर्वरक की जरूरत का पता चल जाएगा। इसका किसानों को बहुत लाभ मिलेगा।
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सहायक फील्ड ऑफिसर डॉक्टर शंकर राम ने बताया कि भारत की आजादी के बाद पहली बार हरिद्वार जिले की मिट्टी की उपयोगिता का परीक्षण करने के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत मिट्टी के नमूने लिए गए हैं। इसमें एक मीटर से ज्यादा गहरे तक ड्रिल कर मिट्टी की परतों की जांच परख की जाएगी।
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नमूनों की जांच के बाद मिट्टी की गुणवत्ता व उपयोगिता की जानकारी मिल जाएगी। सहायक फील्ड ऑफिसर जितेंद्र मौर्य ने बताया कि नमूनों की जांच में मिट्टी की पोषक, खनिज व कठोरता की स्थिति का पता चलता है। इससे क्षेत्र में अन्य संभावित फसलों को उगाने के अवसर भी मिलते हैं। उपग्रह से प्राप्त नक्शे की मदद से मिट्टी की विभिन्नता को देखा परखा जा रहा है। परीक्षण का मुख्य उद्देश्य विभिन्न प्रकार की मृदा की पहचान करना है।