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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Roorkee News ›   road maintenance work done by filling the soil in the pothole

गड्ढों में मिट्टी भरकर कर दिया मरम्मतीकरण का काम पूरा 

Wed, 20 Jul 2016 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की Updated Wed, 20 Jul 2016 11:43 PM IST
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कांवड़ पटरी मार्ग के मरम्मतीकरण में लीपापोती की जा रही है। रुड़की के समीप भरे गए गड्ढों से देखने पर साफ पता चल रहा है कि इनमें मोटे कटाई वाले पत्थर के साथ मिट्टी भर दी गई है। जब बारिश होगी तो इन गड्ढों से मिट्टी निकल जाएगी और इसके बाद कटाईदार पत्थर शिवभक्तों के पैरों को जख्मी करेंगे। ऐसे में साफ नजर आ रहा है कि पिछले दिनों हुई बारिश के आड़ में कांवड़ पटरी मार्ग के मरम्मतीकरण में लीपापोती की जा रही है।
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गौरतलब है कि कांवड़ पटरी के 32 किलोमीटर मार्ग के मरम्मतीकरण के लिए सिंचाई विभाग को 75 लाख रुपये का बजट दिया गया है। रुड़की से धनौरी की ओर करीब सात किलोमीटर की दूरी पर अभी भी गड्ढे बने हुए हैं। वहीं काफी जगहों पर ठेकेदार ने गड्ढों को बजरी और तारकोल की जगह कटाईदार पत्थरों के साथ मिट्टी भर दी है। दो दिन से निकल रही कड़ी धूप में अब यह मिट्टी भी धीरे-धीरे सूखने लगी है। जिससे मार्ग पर धूल उडने की आशंका पैदा हो गई है। यदि आने वाले दिनों में बारिश होती है तो गड्ढों की मिट्टी के बहने का खतरा हो गया। जिसके बाद गड्ढों में मात्र कटाईदार पत्थर रह जाएंगे और ये पूरी सड़क पर फैलकर शिवभक्तों के लिए परेशानी पैदा करेंगे। श्रावण मास में चलने वाले ज्यादातर शिवभक्त नंगे पैर ही गंगाजल लेकर गंतव्य की ओर जाते हैं। ऐसे में यह उखड़े हुए पत्थर शिवभक्तों के पैरों को छलनी करेंगे। वहीं मरम्मतीकरण की गुणवत्ता के मद्देनजर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। 
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पर्याप्त नहीं होंगे लगाए गए पेयजल टैंक
जल संस्थान की ओर से कांवड़ पटरी मार्ग पर करीब बीस जगहों पर पेयजल टैंक की व्यवस्था करने की बात कही जा रही है। इनमें से कलियर मार्ग पर कई जगहों पर पेयजल टैंक लगा दिए गए हैं। लेकिन कांवडिय़ों की भीड़ के हिसाब से यह व्यवस्था पर्याप्त नजर नहीं आ रही है। कांवडिय़ों को मार्ग में पीने के लिए पानी के अलावा नहाने आदि के लिए भी पानी की जरुरत होती है। ऐसे में इस बार भी कांवडिय़ों को सेवा शिविरों की ओर से मुहैया कराए जाने वाले पानी के पाइपों से ही काम चलना पड़ेगा। 
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रोजगार का जरिया बन रहा कांवड़ मेला 
 हर साल लाखों की तादाद में कांवड़ मार्ग से गुजरने वाला शिवभक्तों का रेला स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी बन रहा है। मेले में जगह-जगह सेवा शिविरों की ओर से शिवभक्तों की निशुल्क सेवा के इंतजाम किए गए हैं। लेकिन इन शिवभक्तों में ऐसे लोग भी बड़ी तादाद में होते हैं जो शिविरों की निशुल्क सेवा नहीं लेते हैं। इसके लिए शहर व आसपास क्षेत्रों के सैकड़ों लोगों की ओर से कांवड़ पटरी मार्ग पर भोजन, चाय व अन्य जरूरतों की सामान की बिक्री के लिए दुकानें खोली गई है। जिससे इन लोगों को रोजगार मिल रहा है। 

कुछ लाइटें नहीं कर रही काम
कांवड़ पटरी मार्ग पर ऊर्जा निगम की ओर से करीब 300 मीटर दूरी पर लाइटें लगाई गई है। लेकिन जगह-जगह कई लाइटों के खराब होने के कारण कांवडिय़ों और दुकानदारों को परेशानी हो रही है। 


मार्ग पर नहीं मोबाइल चार्ज करने की सुविधा, परेशानी 
सूचना क्रांति के युग में शायद ही कोई कांवडिय़ा या फिर दुकानदार हो, जिनके पास मोबाइल की सुविधा नहीं हो। मोबाइल सुविधा यात्रा मार्ग पर चलने वाले शिवभक्तों को उनके परिवार से जोड़े हुए हैं। लेकिन रास्ते में मोबाइल चार्ज किए जाने की सुविधा न होने से यह संपर्क कटता नजर आ रहा है। शिवभक्त ही नहीं कांवड़ मार्ग पर दुकानें लगाने वाले दुकानदारों को भी यह परेशानी हो रही है। शंकरपुर गांव निवासी दुकानदार ने बताया कि मोबाइल चार्ज की कोई सुविधा न होने से परेशानी हो रही है। कांवडिय़े भी दुकान पर रुककर चाय पानी पीते हैं तो सबसे पहले यही पूछते हैं कि मोबाइल चार्ज करने का बोर्ड है या नहीं।  
 
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