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रोडवेज बस अड्डे पर उमड़ी भीड़
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रुड़की। दीपावली पर घर जाने वालों की भीड़ बढ़ी तो रोडवेज बस अड्डे पर यात्रियों के बीच मारामारी का नजारा दिखने लगा है। बसों में चढ़ने के लिए यात्री धक्कामुक्की करते नजर आए। भीड़ का आलम यह था कि बस आते ही लोग उसके पीछे दौड़ने लगते थे। यात्रियों को बसों की कमी न हो, इसके लिए रोडवेज ने बेड़े की सभी बसों का संचालन किया हुआ है।
दीपावली का त्योहार आते ही कामकाजी और पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अपने-अपने घरों की ओर रवानगी करना शुरू कर देते हैं। अधिकतर संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों में धनतेरस से दीपावली के अवकाश शुरू हो जाते हैं। ऐसे में मंगलवार को सुबह ही रोडवेज बस अड्डे पर यात्रियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हालांकि यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रोडवेज की ओर से कोई खास इंतजाम नहीं किए गए थे। रोडवेज अड्डे पर रूटीन जैसे हालात नजर आए। कर्मचारियों में उमड़ी भीड़ को देखकर न कोई उत्साह था और न ही कोई तैयारी। ऐसे में यात्री इधर-उधर भटकते रहे। सबसे अधिक दिक्कत दिल्ली, चंडीगढ़, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, देहरादून, मेरठ आदि रूटों पर जाने वाले यात्रियों को उठानी पड़ी। छोटे रूटों पर सवारियों की संख्या अधिक होने के बावजूद रोडवेज ने बसों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की थी। इस वजह से आसपास के शहरों को जाने वाले यात्री बस अड्डे पर भटकते रहे। वहीं एआरएम आलोक बेनवाल ने बताया कि बेडे़ में जितनी बसें थीं, वे चला दी गई हैं।
डग्गामार वाहनों ने काटी चांदी
मंगलवार को अधिकतर यात्री गंतव्य के लिए रवाना हुए। बस अड्डे पर बसों के नहीं मिलने पर यात्री इधर-उधर भटकते रहे। ऐसे में बस अड्डे के बाहर खड़े डग्गामार वाहनों ने चांदी काटी। यात्रियों को भी किसी भी हाल में अपने घरों तक पहुंचना था तो वे भी डग्गामार वाहनों में सवार हो गए। उन्होंने रोडवेज से ज्यादा किराया वसूला।
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दीपावली का त्योहार आते ही कामकाजी और पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अपने-अपने घरों की ओर रवानगी करना शुरू कर देते हैं। अधिकतर संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों में धनतेरस से दीपावली के अवकाश शुरू हो जाते हैं। ऐसे में मंगलवार को सुबह ही रोडवेज बस अड्डे पर यात्रियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हालांकि यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रोडवेज की ओर से कोई खास इंतजाम नहीं किए गए थे। रोडवेज अड्डे पर रूटीन जैसे हालात नजर आए। कर्मचारियों में उमड़ी भीड़ को देखकर न कोई उत्साह था और न ही कोई तैयारी। ऐसे में यात्री इधर-उधर भटकते रहे। सबसे अधिक दिक्कत दिल्ली, चंडीगढ़, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, देहरादून, मेरठ आदि रूटों पर जाने वाले यात्रियों को उठानी पड़ी। छोटे रूटों पर सवारियों की संख्या अधिक होने के बावजूद रोडवेज ने बसों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की थी। इस वजह से आसपास के शहरों को जाने वाले यात्री बस अड्डे पर भटकते रहे। वहीं एआरएम आलोक बेनवाल ने बताया कि बेडे़ में जितनी बसें थीं, वे चला दी गई हैं।
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डग्गामार वाहनों ने काटी चांदी
मंगलवार को अधिकतर यात्री गंतव्य के लिए रवाना हुए। बस अड्डे पर बसों के नहीं मिलने पर यात्री इधर-उधर भटकते रहे। ऐसे में बस अड्डे के बाहर खड़े डग्गामार वाहनों ने चांदी काटी। यात्रियों को भी किसी भी हाल में अपने घरों तक पहुंचना था तो वे भी डग्गामार वाहनों में सवार हो गए। उन्होंने रोडवेज से ज्यादा किराया वसूला।
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