फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Roorkee News ›   Purport to steal feeds!

चोरी करने से पूरी होती है मुराद!

Mon, 03 Oct 2016 12:11 AM IST
ब्यूूराो/ अमर उजाला रुड़की
ब्यूूराो/ अमर उजाला रुड़की Updated Mon, 03 Oct 2016 12:11 AM IST
विज्ञापन

रुड़की/चुड़ियाला। देश के कानून एवं संविधान के तहत चोरी करने पर सजा का प्रावधान है। वह भी मंदिर में की जाए तो सोच जा सकता है कि अपराधी का क्या होगा। लेकिन इसके ठीक उलट क्षेत्र में एक मंदिर ऐसा भी है जहां चोरी करने से सजा नहीं बल्कि मुराद पूरी होती है। मान्यता है चुड़ियाला स्थित प्राचीन सिद्धपीठ चूड़ामणि देवी मंदिर में चोरी करने वालों को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।

विज्ञापन


मंदिर के बारे में मान्यता है कि माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान शिव शंकर को आमंत्रित नहीं किए जाने से क्षुब्ध माता सती ने यज्ञ में कूदकर यज्ञ को विध्वंस कर दिया था। भगवान शिव जिस समय माता सती के मृत शरीर को उठाकर ले जा रहे थे, उसी समय माता सती का चूड़ा इस घनघोर जंगल में गिर गया था। तभी से इसी स्थान पर माता की पिंडी स्थापित होने के साथ भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। यहां पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति मंदिर में आकर माता के चरणों से लोकड़ा (लकड़ी का गुड्डा) चोरी करके अपने साथ ले जाते हैं और पुत्र रत्न प्राप्ति के बाद अषाढ़ माह में अपने पुत्र के साथ ढोल नगाड़ों सहित मां के दरबार मे पहुंचते हैं। जहां भंडारे के साथ दंपति ले जाए हुए लोकड़े के साथ ही एक अन्य लोकड़ा अपने पुत्र के हाथों से चढ़ाते हैं। यह प्रथा यहां सदियों से चली आ रही है। गांव की प्रत्येक बेटियां भी विवाह के पश्चात पुत्र प्राप्ति के बाद लोकड़ा चढ़वाना नहीं भूलती। इन दिनों नवरात्रों में इस मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
विज्ञापन


ऐसे हुआ भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण
मंदिर के पुजारी पंडित अनिरुद्ध शर्मा एवं मां चूड़ामणि देवी ट्रस्ट के संरक्षक सतवीर त्यागी, अध्यक्ष राजेश त्यागी, कोषाध्यक्ष विनित त्यागी, सचिव नरेश त्यागी, उपाध्यक्ष नीरज आदि बताते हैं कि एक बार लंढौरा रियासत के राजा जंगल में शिकार करने आए हुए थे। जंगल में घूमते-घूमते उन्हें माता की पिंडी के दर्शन हुए। राजा के यहां कोई पुत्र नहीं था। राजा ने उसी समय माता से पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी। पुत्र प्राप्ति के बाद राजा ने वर्ष 1805 में मंदिर का भव्य निर्माण कराया गया। देवी के दर्शनों के लिए उपस्थित हुई रानी ने माता शक्ति कुंड की सीढ़ियां बनवाई।
विज्ञापन
विज्ञापन


शेर भी टेकने आते थे मत्था
जहां आज भव्य मंदिर बना हुआ है। यहां घनघोर जंगल हुआ करता था। जहां शेरों की दहाड़ सुनाई पड़ती थी। जानकार बताते हैं कि माता की पिंडी पर रोजाना शेर भी मत्था टेकने आते थे।  


पौराणिक धरोहर को चारधाम दर्जा देने की मांग
माता चूड़ामणि मंदिर लाखों श्रद्धालुओं का केंद्र होने के साथ एक पौराणिक धरोहर भी है। लेकिन श्रद्धालु मंदिर में कराए गए विकास कार्यों से संतुष्ट नहीं है। जिला पंचायत सदस्य अमन त्यागी, ग्राम प्रधान रेखा का कहना है कि मंदिर को चारधाम का दर्जा दिया जाए। इससे मंदिर का समुचित विकास हो सके।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed