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सरकारी जमीनों को बचाने के लिए होगी फोटोग्राफी
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Wed, 15 Mar 2017 10:11 PM IST
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सरकारी जमीन को भू-माफिया की गिद्द दृष्टि से बचाने और उन्हें आसानी से ढूंढने के लिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की ओर से तैयार किए जा रहे लैंड बैंक में भू-खंडों की फोटो भी डाउनलोड की जाएगी। यह निर्देश ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने नायब तहसीलदारों को जारी किए गए हैं।
शहर एवं ग्राम पंचायत क्षेत्रों में हजारों बीघा सरकारी जमीनें खाली पड़ी हुई हैं। कहीं माफिया ने कब्जा कर लिया है तो कहीं तहसील के कर्मचारियों की मिली भगत से प्लाटिंग भी कर दी गई है। इसके अलावा कई जमीनों पर माफिया ने अतिक्रमण कर लिया हैं। यही नहीं सरकारी जमीनों के बारे में तहसील में कोई सटीक जानकारी भी एकत्रित नहीं की गई है। जिससे सरकारी जमीनों का यही नहीं पता चल पाता है कि उसकी सीमा कहां से कहां तक है। इसी लिए जमीनों को ढूंढने में भी तहसील के कर्मचारियों का समय काफी बर्बाद होता है।
इसी को देखते हुए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित तहसील क्षेत्र की सरकारी जमीनों का एक लैंड बैंक तैयार कर रहे हैं। जिसका सॉफ्टवेयर के माध्यम से समस्त डाटा फीडिंग किया जाना है। इसको एक एप में डालकर सार्वजनिक किया जाना है। जिससे कोई भी आसानी से सरकारी जमीनों की वास्तविक स्थित को देख सके। इसके लिए लेखपालों की ओर से जमीनों का विवरण तो दिया जा चुका है। अब ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने जमीनों की भौगोलिक स्थिति की फोटो उपलब्ध कराने के निर्देश रुड़की एवं मंगलौर के नायब तहसीदार को जारी किए हैं। प्रशिक्षणार्थी लेखपालों एवं उप राजस्व निरीक्षकों के माध्यम जमीनों की खसरा संख्या के हिसाब से फोटोग्राफी करके मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। नायब तहसीलदार पीतम सिंह ने बताया कि जमीनों की फोटोग्राफी का काम जल्द ही शुरू किया जाएगा। जिससे समय पर फोटोग्राफ्स कंप्यूटर में लोड किए जा सकें। उनका कहना है कि इससे सरकारी जमीनों को काफी हद तक सुरक्षित किया जा सकेगा।
शहर एवं ग्राम पंचायत क्षेत्रों में हजारों बीघा सरकारी जमीनें खाली पड़ी हुई हैं। कहीं माफिया ने कब्जा कर लिया है तो कहीं तहसील के कर्मचारियों की मिली भगत से प्लाटिंग भी कर दी गई है। इसके अलावा कई जमीनों पर माफिया ने अतिक्रमण कर लिया हैं। यही नहीं सरकारी जमीनों के बारे में तहसील में कोई सटीक जानकारी भी एकत्रित नहीं की गई है। जिससे सरकारी जमीनों का यही नहीं पता चल पाता है कि उसकी सीमा कहां से कहां तक है। इसी लिए जमीनों को ढूंढने में भी तहसील के कर्मचारियों का समय काफी बर्बाद होता है।
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इसी को देखते हुए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित तहसील क्षेत्र की सरकारी जमीनों का एक लैंड बैंक तैयार कर रहे हैं। जिसका सॉफ्टवेयर के माध्यम से समस्त डाटा फीडिंग किया जाना है। इसको एक एप में डालकर सार्वजनिक किया जाना है। जिससे कोई भी आसानी से सरकारी जमीनों की वास्तविक स्थित को देख सके। इसके लिए लेखपालों की ओर से जमीनों का विवरण तो दिया जा चुका है। अब ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने जमीनों की भौगोलिक स्थिति की फोटो उपलब्ध कराने के निर्देश रुड़की एवं मंगलौर के नायब तहसीदार को जारी किए हैं। प्रशिक्षणार्थी लेखपालों एवं उप राजस्व निरीक्षकों के माध्यम जमीनों की खसरा संख्या के हिसाब से फोटोग्राफी करके मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। नायब तहसीलदार पीतम सिंह ने बताया कि जमीनों की फोटोग्राफी का काम जल्द ही शुरू किया जाएगा। जिससे समय पर फोटोग्राफ्स कंप्यूटर में लोड किए जा सकें। उनका कहना है कि इससे सरकारी जमीनों को काफी हद तक सुरक्षित किया जा सकेगा।
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