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चिकित्सकों की हड़ताल से मरीज बेहाल

Sat, 23 Apr 2016 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला रुड़की
ब्यूरो/अमर उजाला रुड़की Updated Sat, 23 Apr 2016 12:25 AM IST
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Patients suffering from the strike of doctors
मरीज - फोटो : अमर उजाला

रुड़की। जसपुर में चिकित्सक की गोली मारकर हत्या करने के विरोध में शुक्रवार को दूसरे दिन भी सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों ने हड़ताल रखी। हड़ताल के कारण अस्पताल की सभी सुविधाएं ठप रहीं। ओपीडी के साथ-साथ डिलीवरी वार्ड और इमजेंसी सेवाएं भी पूरी तरह से बंद रहीं। यही नहीं, ब्लड बैंक भी बंद रहा। इससे मरीजों और उनके तिमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उपचार के लिए आए 300 से अधिक मरीज बिना उपचार के ही वापस लौट गए। इनमें सबसे ज्यादा परेशानी का सामना दुर्घटना में घायल, डिलीवरी और ब्लड लेने आए लोगों को हुई।

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सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों ने जसपुर में चिकित्सक की हत्या के विरोध में दूसरे दिन भी अपनी हड़ताल जारी रखी, लेकिन चिकित्सकों की हड़ताल से अंजान करीब 300 लोग शहर के साथ ही दूरदराज के इलाकों से उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे, लेकिन यहां पर चिकित्सकों की हड़ताल देखकर वे निराश होकर वापस लौट गए। इकबालपुर निवासी राजेश कुमार ने बताया कि वह मजदूरी करता है। उसका बच्चा बीमार है। उसके उपचार के लिए वह अस्पताल आया था, लेकिन हड़ताल के कारण उसे वापस जाना पड़ रहा है। उसके पास इतने रुपये भी नहीं हैं कि वह प्राइवेट में उपचार करा ले।
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चार घायलों को जाना पड़ा वापस
रुड़की। सिविल अस्पताल में शुक्रवार को विभिन्न दुर्घटनाओं में घायल हुए चार लोग उपचार के लिए अस्पताल की इमरजेंसी पर पहुंचे, लेकिन इमरजेंसी पर ताला और हड़ताल का बोर्ड लगा देख उनके परिजन उन्हें किसी अन्य अस्पताल ले गए। रुड़की में दिल्ली-देहरादून और दिल्ली-हरिद्वार हाईवे होने की वजह से दुर्घटनाएं ज्यादा होती हैं। घायलों को उपचार की आस में सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में लाया जा रहा है, लेकिन यहां मरीजों को बिना उपचार के वापस ले जाया जा रहा है।
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साहब, दो साल की बेटी को खून चाहिए
रुड़की। साहब मेरी दो साल की बेटी जुबेरिया शहर के एक अस्पताल में भर्ती है। उसमें खून की काफी कमी आ गई है। चिकित्सक ने बताया कि बेटी को कम से कम एक यूनिट खून चाहिए। यदि यह खून नहीं मिला तो उसका बचाना मुश्किल हो जाएगा। रायपुर भगवानपुर निवासी जुबैर की दो साल की बेटी बीमार है। उसे खून की जरूरत है, लेकिन जब वह ब्लड लेने के लिए अस्पताल आया तो उसे पता चला कि ब्लड बैंक की हड़ताल है। उसने अस्पताल के कई लोगों से कहा कि बी-पॉजिटिव खून की एक यूनिट दिला दो, लेकिन सभी ने हड़ताल की बात कहते हुए उसे सहारनपुर से खून लेकर आने की बात कही। ब्लड बैंक प्रभारी डा. रजत सैनी ने बताया कि पांच लोग दोपहर तक खून लेने के लिए आ चुके हैं, लेकिन हड़ताल की वजह से वह उन्हें खून नहीं दे पाए हैं।

डिलीवरी के लिए ले जाना पड़ा प्राइवेट अस्पताल
रुड़की। शुक्रवार को दो गर्भवती महिलाओं को उनके परिजन डिलीवरी के लिए अस्पताल लेकर आए थे, लेकिन यहां आकर उन्हें पता चला कि हड़ताल है। इस पर दोनों महिलाओं के परिजन उन्हें किसी प्राइवेट अस्पताल में ले गए हैं।

बिना मेडिकल कराए कोर्ट में पेश करने पड़े दो आरोपी
रुड़की। सरकारी चिकित्सकों की हड़ताल के कारण पुलिस ने शुक्रवार को दो आरोपियों को बिना मेडिकल कराए ही कोर्ट में पेश किया।
पुलिस जब किसी आरोपी को गिरफ्तार करती है तो 24 घंटे के भीतर ही उसका चालान कर उसका मेडिकल कराया जाता है। इसके बाद पुलिस उसे कोर्ट में पेश करती है। कोतवाली रुड़की के एसएसआई गोविंद कुमार ने बताया कि हड़ताल के कारण आरोपियों का मेडिकल नहीं हो पाया। कोर्ट को इस संबंध में बता दिया गया था।

चिकित्सक के परिजनों को मिले मुआवजा
रुड़की। चिकित्सक की हत्या के विरोध में शुक्रवार को आईएमए शाखा रुड़की के अध्यक्ष एसके कौशिक एवं सचिव डा. विकास त्यागी संगठन के सदस्यों के साथ सिविल अस्पताल पहुंचे। आईएमए और सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों ने संयुक्त रूप से सिविल अस्पताल में धरना प्रदर्शन किया। साथ ही सरकार से मृतक चिकित्सक के परिजनों को उचित मुआवजा देने, हत्यारोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग करते हुए चिकित्सकों को सुरक्षा दिलाए जाने की मांग की।


हड़ताल खत्म, स्वास्थ्य सेवाएं हुई बहाल
आज खुलेगी ओपीडी
रुड़की। सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों की हड़ताल खत्म हो गई है। जसपुर में चिकित्सक की हत्या करने वाले दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं अन्य मांगों को भी मान लिया गया है। इसके चलते चिकित्सकों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है। शनिवार को सरकारी अस्पताल की ओपीडी पूर्व की भांति खुलेगी। वहीं इमरजेंसी सेवाएं भी बहाल कर दी गई हैं।

जसपुर स्थित अस्पताल में चिकित्सक की हत्या के विरोध में सरकारी अस्पताल के सभी चिकित्सक बृहस्पतिवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। चिकित्सकों के हड़ताल पर होने से ओपीडी के साथ-साथ इमरजेंसी एवं ब्लड बैंक आदि की सेवाएं भी पूरी तरह से ठप हो गई थीं। सरकारी चिकित्सकों के इस आंदोलन में आईएमए ने भी अपना समर्थन देते हुए शनिवार से हड़ताल पर जाने का एलान किया था, लेकिन दोनों हत्यारोपियों के पकड़े जाने और अन्य मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद चिकित्सकों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है। सरकारी अस्पताल के सीएमएस डा. संजय कंसल ने बताया कि हड़ताल खत्म हो गई है। सभी स्वास्थ्य सेवाएं बहाल हो गई हैं। शनिवार से ओपीडी खुलेगी। आईएमए रुड़की के सचिव डा. विकास त्यागी ने बताया कि आईएमए ने भी हड़ताल का फैसला वापस ले लिया है। दोनों हत्यारोपी पकड़े जा चुके हैं।

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